अंबासमुद्रम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 225) तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के पश्चिमी हिस्से में स्थित है और यह उपजाऊ थामिराबरानी नदी के किनारे बसा हुआ है. इस क्षेत्र में कृषि प्रधान गांव, छोटे कस्बे और पश्चिमी घाट से सटे इलाके शामिल हैं. नदी और नहरों की अच्छी सिंचाई व्यवस्था के कारण यह दक्षिण तमिलनाडु के सबसे ज्यादा उत्पादक कृषि क्षेत्रों में से एक माना जाता है. यहां धान की खेती, बागान (प्लांटेशन), छोटे उद्योग और पास के पहाड़ी व वन क्षेत्रों से जुड़ा पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं. राजनीतिक रूप से इस सीट पर हमेशा से बड़े द्रविड़ दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता रहा है.
इस क्षेत्र का सामाजिक और राजनीतिक स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां मतदाताओं में किसान, खेत मजदूर, छोटे व्यापारी और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं. सामाजिक संरचना में थेवर, नादार, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के किसान समुदाय प्रमुख हैं. यहां किसानों के संगठन और सिंचाई से जुड़े समूह राजनीति को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं. खेती का विकास और नदी के पानी की सुरक्षा यहां की राजनीति के मुख्य मुद्दे रहते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के पास स्थित है, जिससे यहां समतल कृषि भूमि और पहाड़ी पारिस्थितिकी का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है. थामिराबरानी नदी और उसकी नहर प्रणाली इस इलाके को सिंचित करती है, जिससे यह तिरुनेलवेली जिले का एक बेहद उपजाऊ इलाका बन जाता है. सड़क मार्ग से यह तिरुनेलवेली, तेनकासी और आसपास के शहरों से जुड़ा हुआ है. पास के जंगल और पहाड़ी क्षेत्र इको-टूरिज्म और बागान गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं. यहां कई ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक सुंदर स्थान भी हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख आकर्षणों में पापनासम पापनासर मंदिर, खूबसूरत अगस्थियार फॉल्स और हरियाली से भरपूर मंजोलाई हिल्स शामिल हैं. अंबासमुद्रम शहर इस क्षेत्र का व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र है. थामिराबरानी नदी के किनारे बसे गांव धान की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं. इसके अलावा पापनासम डैम और मणिमुथार डैम जैसे पर्यटन मार्ग, और पश्चिमी घाट से जुड़े बागान व पहाड़ी गांव भी यहां की पहचान हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और खेती से जुड़े मुद्दे मतदान के रुझान को काफी प्रभावित करते हैं.
मुख्य समस्याओं में थामिराबरानी नदी के पानी का संरक्षण और प्रबंधन, कृषि सब्सिडी, फसल बीमा और किसानों का कल्याण, सड़क और ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास, पापनासम और मणिमुथार क्षेत्र में पर्यटन का विकास, और ग्रामीण युवाओं व छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार के अवसर शामिल हैं.
मतदाताओं के रुझान की बात करें तो किसान सिंचाई की सुरक्षा और फसल सहायता नीतियों को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं. ग्रामीण समुदाय सरकारी योजनाओं, आवास और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देते हैं. पर्यटन से जुड़े लोग इको-टूरिज्म और बेहतर कनेक्टिविटी के विकास का समर्थन करते हैं, जबकि युवा वर्ग रोजगार के लिए पास के शहरों की ओर अवसर तलाशता है. यहां चुनावी नतीजे अक्सर ग्रामीण मतदाताओं की एकजुटता और राजनीतिक गठबंधनों की मजबूती पर निर्भर करते हैं.
Avudaiappan R
DMK
Shenbaga Valli
NTK
C.rani Ranjitham
AMMKMNKZ
Sengulam Ganesan C
MNM
Nota
NOTA
M. Manimaran
BSP
J.rajesh Dharmasingh Pandian
IND
Gavaskar M
IND
S. Lakshmanan
VTVTK
S.ganesan
IND
G. Arunachalam
IND
Abdul Majeeth J
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.