ओड्डनचत्रम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 128) एक ऐसा क्षेत्र है जहां राजनीति पर कृषि और व्यापार का गहरा प्रभाव दिखाई देता है. यहां के चुनाव अक्सर सब्जी मंडी की अर्थव्यवस्था, किसानों और व्यापारियों के संबंध, और स्थानीय मजबूत नेताओं की छवि के आधार पर तय होते हैं. यह क्षेत्र किसी मंदिर नगर या केवल सिंचाई आधारित खेती वाले इलाके की तरह नहीं है, बल्कि यहां बाजार का नियंत्रण, सब्जियों की कीमतों की स्थिरता और माल के परिवहन की व्यवस्था चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. ओड्डनचत्रम में तमिलनाडु की दूसरी सबसे बड़ी सब्जी मंडी स्थित है, जहां से प्याज, मिर्च, टमाटर जैसी सब्जियां पड़ोसी राज्यों तक भेजी जाती हैं. इसके अलावा यह क्षेत्र बड़े पशु बाजार, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और आसपास के पर्यटन स्थलों, जैसे परप्पलार के लिए भी जाना जाता है. यहां चुनावी जीत का अंतर आम तौर पर बहुत ज्यादा नहीं होता, बल्कि यह मध्यम लेकिन तेजी से बदलने वाला होता है. सब्जियों की कीमतों में गिरावट, बाजार तक पहुंच में दिक्कत, परिवहन में बाधा या नेताओं की छवि में बदलाव जैसे कारण चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं.
सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से यहां कई प्रमुख मतदाता समूह प्रभावशाली हैं. इनमें सब्जी उगाने वाले किसान (जैसे टमाटर, प्याज, मिर्च और बैंगन की खेती करने वाले), थोक व्यापारी, कमीशन एजेंट और ट्रांसपोर्टर, कोंगु और तेलुगु मूल के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय, अनुसूचित जाति के कृषि मजदूरों की बस्तियां, मंडी से जुड़े दिहाड़ी मजदूर, और छोटे दुकानदार तथा सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं. भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र मुख्य रूप से सूखी भूमि वाले गांवों से बना है जहां मौसमी सिंचाई पर खेती निर्भर करती है. ओड्डनचत्रम कस्बे के आसपास का इलाका सब्जी उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और यह शहर कृषि और व्यापार का बड़ा हब माना जाता है. सड़क संपर्क भी मजबूत है और यहां से पालनी, धारापुरम और डिंडीगुल जैसे शहरों तक अच्छी कनेक्टिविटी है. यहां की बसावट का पैटर्न ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों का मिश्रण है.
इस क्षेत्र में कुछ ऐसे स्थान हैं जिन्हें चुनावी दृष्टि से हॉटस्पॉट माना जाता है. इनमें सब्जी मंडी और गोदामों में काम करने वाले मजदूरों के इलाके, अनुसूचित जाति के मजदूरों की बस्तियां, ओड्डनचत्रम शहर के व्यावसायिक वार्ड, और ट्रांसपोर्ट तथा ट्रक मालिकों के इलाके शामिल हैं. इन सभी समूहों की प्रतिक्रिया अक्सर सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मंडी शुल्क, पुलिस जांच, परिवहन लागत, बिजली आपूर्ति और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा जैसी चीजों से प्रभावित होती है.
यहां के मुख्य स्थानीय मुद्दों में सब्जियों की कीमतों की स्थिरता और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी व्यवस्था, मंडी का बुनियादी ढांचा (सड़कें, शेड और जल निकासी व्यवस्था), कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग सुविधाएं, परिवहन नियम और चेक-पोस्ट पर होने वाली परेशानियां, सिंचाई और गोदामों के लिए बिजली आपूर्ति, और मजदूरों के लिए कल्याण योजनाएं तथा बीमा प्रमुख हैं. मतदाताओं की अपेक्षा होती है कि उनका विधायक बाजार की समझ रखने वाला और फैसले लेने में सक्षम हो. उसे कृषि विपणन विभाग, पुलिस और राजमार्ग विभाग के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करना चाहिए, ताकि संकट के समय तुरंत हस्तक्षेप किया जा सके. इसके अलावा व्यापारियों और किसानों को अत्यधिक सरकारी नियमों या दखल से सुरक्षा देना और मंडी से जुड़े विवादों में स्पष्ट और मजबूत नेतृत्व दिखाना भी यहां के मतदाताओं की बड़ी अपेक्षा होती है.
Nataraj N.p
ADMK
Sakthi Devi T
NTK
Nota
NOTA
Siva Kumar M
DMDK
Abdul Hadi A
MNM
Murugaraj P
BSP
Marimuthu T.s
IND
Balasubramani S
IND
Chellamuthu K
IND
Ravi M
AMPK
Sivanesan K
IND
Ravichandran K
MIDP
Sivaprakash S
IND
Shanmugavel P
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.