पेरियाकुलम (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 199), थेनी जिले के पश्चिमी हिस्से में पश्चिमी घाट की तलहटी में स्थित, तमिलनाडु के उन निर्वाचन क्षेत्रों में शामिल है जिनकी पहचान गहरी कृषि परंपरा और सामाजिक विविधता से जुड़ी है. उपजाऊ भूमि, पारंपरिक सिंचाई प्रणालियां और पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े कृषि उत्पाद इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. यहां की पहचान खेती, बागान-आधारित आजीविका और लंबे समय से चले आ रहे स्थानीय सत्ता ढांचों से बनती है.
थेनी शहर की तुलना में कम शहरीकरण होने के बावजूद पेरियाकुलम आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए एक क्षेत्रीय सेवा केंद्र की भूमिका निभाता है. यहां के बाजार, सरकारी कार्यालय और शैक्षणिक संस्थान आसपास के गांवों की जरूरतों को पूरा करते हैं. प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद असमान विकास के कारण प्रशासनिक सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से पेरियाकुलम में जातीय समीकरण, पारिवारिक प्रभाव और परंपरागत दलगत निष्ठाएं निर्णायक भूमिका निभाती हैं. यहां चुनावी परिणाम किसी बड़ी लहर से कम और स्थानीय नेतृत्व, बूथ-स्तरीय संगठन तथा जातीय गणित से अधिक प्रभावित होते हैं. किसान, कृषि मजदूर, छोटे व्यापारी और सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थी मुख्य मतदाता वर्ग हैं. मतदाता कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन, कृषि सहायता और बुनियादी ढांचे के कार्यों पर बारीकी से नजर रखते हैं. प्रगति में कमी आते ही असंतोष तेजी से बढ़ता है, जिससे यह सीट काफी प्रतिस्पर्धी बनी रहती है.
पेरियाकुलम नगर का बाजार क्षेत्र, वराहनदी और उससे जुड़ा सिंचाई क्षेत्र, सरकारी अस्पताल इलाका, बस स्टैंड और परिवहन केंद्र, कोडाइकनाल की ओर जाने वाला तलहटी सड़क मार्ग तथा साप्ताहिक शांडी (हाट) क्षेत्र यहाँ के प्रमुख गतिविधि केंद्र हैं.
मुख्य समस्याओं में सूखे के मौसम में अनियमित सिंचाई, ग्रामीण अंदरूनी सड़कों की खराब हालत, सरकारी अस्पतालों में अपर्याप्त सुविधाएं, नगर क्षेत्रों में जल निकासी और स्वच्छता की दिक्कतें, ग्रामीण युवाओं के लिए सीमित रोजगार, फसल कीमतों में अस्थिरता और खरीद में देरी, तलहटी के गांवों में वन्यजीवों का प्रवेश तथा आवास योजनाओं में देरी शामिल हैं.
मतदाताओं का मिजाज स्पष्ट रूप से मांग-आधारित है. किसान सुनिश्चित सिंचाई, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और सब्सिडी की अपेक्षा रखते हैं. मजदूर सरकारी योजनाओं के तहत स्थायी काम चाहते हैं. युवा स्थानीय रोजगार, कौशल प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं की मांग करते हैं. महिलाएं पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और आवास को प्राथमिकता देती हैं, जबकि छोटे व्यापारी बेहतर सड़क, स्वच्छता और बाजार सुविधाओं की उम्मीद रखते हैं. कुल मिलाकर, मतदाता अपने प्रतिनिधियों का मूल्यांकन उनकी उपलब्धता और शिकायतों के समाधान की क्षमता के आधार पर करते हैं.
M Murugan
ADMK
Dr.k.kathirkamu
AMMKMNKZ
Vimala
NTK
S.pandiyarajan
MNM
Nota
NOTA
Madhu Bharathi
IND
Murugan
IND
S.chinnamuthu
MIDP
M.rajendran
IND
A.murugesan
SUCI
A.c.mohan Raj B.p.t.,
IND
M.muneeswaran
IND
P.ramaiya
IND
M.muniyappan
IND
C.mayazhaku
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.