शिवगंगा विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 186) शिवगंगा जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है. इस क्षेत्र में शिवगंगा शहर के साथ-साथ आसपास के गांव और खेती पर निर्भर बस्तियां शामिल हैं. इतिहास के लिहाज से यह इलाका शिवगंगा रियासत और क्षेत्रीय राजनीतिक आंदोलनों से जुड़ा रहा है, इसलिए यहां सांस्कृतिक विरासत काफी मजबूत है. साथ ही यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर आधारित है.
यहां के लोगों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि, सरकारी नौकरी, छोटे व्यापार और स्थानीय सेवाओं पर टिकी हुई है. मदुरै शहर के पास होने की वजह से यहां के सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी उसका असर पड़ा है.
अगर सामाजिक और राजनीतिक स्थिति की बात करें, तो यहां शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के वोटर मिलते हैं. इनमें किसान, सरकारी कर्मचारी, व्यापारी और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं. समाज में थेवर, अनुसूचित जाति, नाडार और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. यहां चुनाव के समय समुदाय, किसानों के समूह और स्थानीय नेताओं का काफी प्रभाव रहता है. चुनावी मुद्दों में आमतौर पर गांवों का विकास, सरकारी योजनाएं और बुनियादी ढांचे की बातें प्रमुख रहती हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्से के अर्ध-शुष्क मैदानों में स्थित है. सड़क मार्ग से यह क्षेत्र मदुरै, कराईकुडी और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. शिवगंगा शहर खुद जिले का प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र है. आसपास के गांवों में धान (पैडी), दालें और मूंगफली जैसी फसलें उगाई जाती हैं. कई जगहों पर पारंपरिक तालाब (टैंक) सिंचाई व्यवस्था खेती में मदद करती है.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में शिवगंगा शहर का मुख्य बाजार और प्रशासनिक क्षेत्र, सरकारी दफ्तरों वाले इलाके, आसपास के कृषि प्रधान गांव, बाजार और व्यापारिक गलियां, और ग्रामीण पंचायत क्षेत्र शामिल हैं, जहां सरकारी योजनाओं का वोटिंग पर असर पड़ता है.
मुख्य समस्याओं की बात करें तो किसानों के लिए सिंचाई और कृषि सहायता सबसे बड़ी जरूरत है. इसके अलावा गांवों की सड़कों का विकास, साफ पीने का पानी और भूजल प्रबंधन, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, छोटे व्यापारियों के लिए सहूलियतें, और स्वास्थ्य, शिक्षा व प्रशासनिक सेवाओं में सुधार जैसे मुद्दे भी बहुत महत्वपूर्ण हैं.
वोटरों के मूड को समझें तो किसान सिंचाई और सब्सिडी पर ज्यादा ध्यान देते हैं, सरकारी कर्मचारी बेहतर प्रशासन और सेवाओं की मांग करते हैं, ग्रामीण परिवार सरकारी योजनाओं और आवास योजनाओं को महत्व देते हैं, और युवा रोजगार व शिक्षा के अवसर चाहते हैं. कुल मिलाकर यहां चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी रहते हैं और अलग-अलग पार्टियों का मजबूत नेटवर्क देखने को मिलता है.
S. Gunasekaran
CPI
R. Mallika
NTK
K. Anbarasan
AMMKMNKZ
Joseph. C
MNM
P. Viswanathan
IND
Nota
NOTA
N. Pandimuthu
MIDP
Dr. A. Parthasarathy
IND
Vimalraj
IND
Vadivel. C
AMPK
M. Ravi
IND
R. Gunasekaran
IND
M. Thirukumaran
IND
K. Kalaiselvam
IND
C. Kaningprabhu
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.