मदुरै साउथ (विधानसभा क्षेत्र संख्या 192) विरासत और दबाव के चौराहे पर खड़ा है. मदुरै शहर के ऐतिहासिक केंद्र के आसपास स्थित यह क्षेत्र सदियों पुरानी सांस्कृतिक गौरव परंपरा को अपने भीतर समेटे हुए है, लेकिन साथ ही अत्यधिक घनत्व वाले शहरी जीवन की चुनौतियों से भी जूझ रहा है. यहां संकरी गलियां, भीड़भाड़ वाले मोहल्ले और जर्जर नागरिक व्यवस्थाएं रोजमर्रा की जिंदगी को परिभाषित करती हैं, न कि बड़े-बड़े विकास के दावे. तेजी से फैलते उपनगरीय क्षेत्रों के विपरीत, मदुरै साउथ एक ऐसे पुराने शहर की तस्वीर पेश करता है जो आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को ढालने की कोशिश कर रहा है.
यहां की राजनीति पूरी तरह स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित है. वार्ड स्तर की समस्याएं, नेताओं की उपलब्धता और जमीन पर दिखने वाले समाधान दूरगामी नीतिगत वादों से कहीं अधिक मायने रखते हैं. मतदाता राजनीतिक रूप से सजग, मुखर और नागरिक सुविधाओं में विफलता पर बेहद कठोर रुख अपनाने वाले हैं।
इस क्षेत्र का राजनीतिक और सामाजिक चरित्र सघन बस्तियों, आपस में जुड़े समुदायों और मजबूत स्थानीय नेटवर्क से आकार लेता है. जातीय समूह, व्यापार संघ और गली-मोहल्लों के नेता जनसमर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभाते हैं. यह सीट किसी लहर पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि यहां चुनावी नतीजे अक्सर बूथ-दर-बूथ समीकरणों से तय होते हैं, न कि वैचारिक बदलावों से.
व्यापारी, छोटे दुकानदार, दिहाड़ी मजदूर, ऑटो चालक, सफाई कर्मचारी और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार इस क्षेत्र का मुख्य मतदाता आधार हैं. यहां निष्ठा मौजूद तो है, लेकिन वह स्थायी नहीं होती. यह लगातार संपर्क, संवाद और ठोस काम की उम्मीदों पर टिकी रहती है.
मदुरै साउथ के प्रमुख केंद्रों में पुराने शहर के बाजार क्षेत्र, बस मार्गों के गलियारे और प्रमुख चौराहे, घनी आवासीय वार्ड, मंदिरों से जुड़े व्यावसायिक मार्ग, सरकारी दफ्तरों के इलाके तथा कचरा संग्रह और स्वच्छता से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं.
यहां की मुख्य समस्याओं में लगातार ट्रैफिक जाम और पार्किंग की अव्यवस्था, कमजोर जलनिकासी व्यवस्था और बार-बार होने वाला जलभराव, अनियमित पेयजल आपूर्ति, ठोस कचरा प्रबंधन की कमी, सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण, पुरानी सीवर लाइनें, सार्वजनिक स्थानों और खेल मैदानों की कमी तथा सरकारी अस्पतालों और क्लीनिकों पर बढ़ता दबाव शामिल है.
मतदाताओं की मनोदशा स्पष्ट है. व्यापारी ट्रैफिक अनुशासन और साफ-सुथरे बाजार चाहते हैं. दिहाड़ी मजदूरों के लिए बुनियादी सेवाएं और महंगाई नियंत्रण प्राथमिकता है. युवा रोजगार की कमी से निराश हैं. महिलाएं जलापूर्ति, स्वच्छता और सुरक्षा पर ध्यान देती हैं. वरिष्ठ नागरिकों को पैदल चलने योग्य सड़कें और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं चाहिए. कुल मिलाकर, लोग नेताओं को उनकी मौजूदगी, त्वरित प्रतिक्रिया और संकट के समय समस्या समाधान की क्षमता के आधार पर आंकते हैं. अस्थायी उपायों और बार-बार दोहराई जाने वाली नागरिक विफलताओं से जनता में थकान और असंतोष साफ दिखाई देता है.
Saravanan. S.s
ADMK
Eswaran.g
MNM
Abbas.m
NTK
Raajalingam.sha
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Saravanan.r
IND
Jeya.k
IND
Rajkumar(a)manikandan.k
IND
Vengadachalapathy.t.s
IND
Bharathi Kannamma. S
NGPP
Ravichandran.v.c
IND
Sadam Hussain.k
MIDP
Umesh.k.r
IND
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्म-जयंती के अवसर पर मदुरंतकम पहुंचे प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत नेताजी और तमिलनाडु के स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करके की. प्रधानमंत्री ने इस रैली को तमिलनाडु में बदलाव का शंखनाद बताते हुए कहा कि राज्य की जनता अब डीएमके के कुशासन से मुक्ति चाहती है और भाजपा-एनडीए गठबंधन उनकी पहली पसंद बनकर उभरा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को केरल और तमिलनाडु के दौरे पर पहुंच रहे हैं. विधानसभा चुनाव के लिहाज से पीएम मोदी का दौरा काफी अहम माना जा रहा है. सवाल यही है कि विकास की सौगात देकर बीजेपी के लिए पीएम मोदी क्या सियासी जमीन उपजाऊ बना पाएंगे?
चुनाव आयोग ने अभिनेता-राजनेता विजय की TVK को ‘व्हिसल’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह विजय की पहली पसंद थी. 2026 विधानसभा चुनाव TVK की पहली चुनावी लड़ाई होगी. पार्टी को भरोसा है कि विजय मुख्यमंत्री बनेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए के अभियान की शुरुआत करेंगे. वह मदुरांतकम में एक जनसभा को संबोधित करेंगे, जिसमें एआईएडीएमके समेत सभी एनडीए सहयोगी दलों के नेता उनके साथ मंच साझा करेंगे.
तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के बीच गठबंधन में बढ़ती खींचतान को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली में साढ़े चार घंटे लंबी मैराथन बैठक की. पार्टी नेतृत्व ने गठबंधन में दरार पैदा करने वाले बयानों पर नेता प्रवीण चक्रवर्ती को कड़ी फटकार लगाई है. पार्टी ने नेताओं को मीडिया से दूर रहने और बयानबाजी न करने की नसीहत दी है.
तमिलनाडु चुनाव से पहले जल्लीकट्टू के अखाड़े से स्टालिन सरकार ने बड़ा सियासी संदेश दिया है. तमिल अस्मिता के प्रतीक इस खेल को नौकरी से जोड़कर डीएमके ने परंपरा, गौरव और शासन को एक फ्रेम में पेश किया है. यह फैसला सांस्कृतिक सम्मान के साथ चुनावी रणनीति भी माना जा सकता है.
तमिलनाडु चुनाव से पहले सूबे में एनडीए का कुनबा बढ़ाने में जुटी बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने अभिनेता से राजनेता बने टीवीके प्रमुख थलापति विजय को एनडीए में आने का न्योता दिया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए सियासी दांव चले जाने लगे हैं. डीएमके ने कांग्रेस को मर्जी के मुताबिक सीटें देने से इनकार किया तो पार्टी का एक धड़ा अभिनेता से नेता थलपति विजय की पार्टी के साथ गठबंधन की वकालत शुरू कर दी है. ऐसे में राहुल गांधी तमिलनाडु दौरे पर एक तीर से 3 निशाना साधते नजर आए.
तमिलनाडु में चुनाव से पहले पोंगल के मौके पर सियासी गिफ्ट पॉलिटिक्स तेज हो गई है. DMK और ADMK के नेता व्यक्तिगत तौर पर मतदाताओं को महंगे उपहार बांट रहे हैं. बीजेपी ने इसे चुनावी लालच बताया है, जबकि DMK इसे पुरानी परंपरा बता रही है. इस बार उपहारों का पैमाना पहले से कहीं ज्यादा बड़ा नजर आ रहा है.
भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद संभालने के बाद नितिन नबीन तमिलनाडु की अपनी पहली यात्रा पर पहुंचे. उन्होंने यहां भाजपा कार्यकर्ताओं से अगले 90 दिनों तक बूथ स्तर पर सघन जनसंपर्क अभियान चलाने का आह्वान किया.