केरल सीमा के पास कन्याकुमारी जिले के पश्चिमी हिस्से में स्थित किलियूर (नंबर 234), तमिलनाडु के भौगोलिक रूप से सबसे संवेदनशील और सामाजिक रूप से जटिल निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है. पश्चिमी घाट की तलहटी और अरब सागर के तट के बीच बसा यह क्षेत्र कृषि, तटीय आजीविका, बागान गतिविधि और सीमा पार सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मिश्रण दिखाता है. पारंपरिक रूप से धान के खेतों, नारियल के बागों, रबर के बागानों और मछली पकड़ने वाले गांवों के लिए जाना जाने वाला किलियूर आज पारिस्थितिक नाजुकता और विकास की आकांक्षा के चौराहे पर खड़ा है.
इस निर्वाचन क्षेत्र में आबादी वाले गांव, तटीय बस्तियां, बागान क्षेत्र और अर्ध-शहरी बाजार केंद्र शामिल हैं. जहां साक्षरता का स्तर ऊंचा है और सामाजिक जागरूकता मजबूत है, वहीं रोजमर्रा की शासन संबंधी चुनौतियां- तटीय सुरक्षा, पीने का पानी, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और रोजगार वैचारिक बहसों की तुलना में स्थानीय राजनीतिक कहानी को ज्यादा आकार देती हैं.
किलियूर का भूगोल एक संकरी तटीय पट्टी, अंदरूनी कृषि गांव, बागान की ढलानें और पश्चिमी घाट से बहने वाली नदी प्रणालियों से परिभाषित होता है. मौसमी मानसून आजीविका, बुनियादी ढांचे की स्थिरता और आवाजाही को काफी प्रभावित करते हैं.
कनेक्टिविटी तटीय सड़कों, अंदरूनी गांव के रास्तों और राज्य राजमार्गों पर निर्भर करती है जो निर्वाचन क्षेत्र को नागरकोइल, कोलाचेल और पास के केरल शहरों से जोड़ते हैं. हालांकि बुनियादी पहुंच मौजूद है, लेकिन सड़कों की गुणवत्ता, जल निकासी और मानसून से होने वाला नुकसान लगातार चिंता का विषय बना हुआ है, खासकर अंदरूनी और तटीय इलाकों में.
किलियूर निर्वाचन क्षेत्र में मछली पकड़ने वाले गांव, कृषि प्रधान अंदरूनी इलाके, बागानों के किनारे की बस्तियां और छोटे बाजार शहर शामिल हैं. हर इलाके की अपनी अलग प्राथमिकताएं हैं. मछली पकड़ने वाले गांव समुद्री सुरक्षा और आवास सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हैं. खेती वाले गांव सिंचाई और कीमतों में स्थिरता पर जोर देते हैं. बागान क्षेत्र मजदूरों के कल्याण और सड़क पहुंच की तलाश करते हैं. अर्ध-शहरी समूह बेहतर स्वास्थ्य सेवा और परिवहन सेवाओं की मांग करते हैं.
इस सीट से जुड़े मुख्य मुद्दों की बातस करें तो तटीय कटाव, मछली पकड़ने की सुरक्षा और आजीविका सुरक्षा, गर्मियों में पीने के पानी की कमी, गांवों में सड़कों की खराब हालत, उच्च-स्तरीय स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुंच, युवा बेरोजगारी और पलायन, मानसून से संबंधित बाढ़ और भूस्खलन, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में देरी शामिल है.
यहां की अर्थव्यवस्था मछली पकड़ने, कृषि और बागानों पर आधारित है.
यहां रहने वाले मछुआरा समुदाय सुरक्षा जाल, आवास सुरक्षा और आपदा राहत चाहते हैं. किसान की सुनिश्चित सिंचाई, उचित मूल्य और समय पर इनपुट सहायता की मांग है. बागान मजदूर श्रम कल्याण और सड़क कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देते हैं. युवा स्थिर रोजगार, कौशल प्रशिक्षण और स्थानीय अवसरों की तलाश में हैं. महिलाओं की बात करें उनके लिए पीने के पानी की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता और सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दे हैं. यहां के निवासी लगातार कल्याणकारी योजनाओं के वितरण और जवाबदेह स्थानीय शासन की उम्मीद करते हैं.
Jude Dev K.v
ADMK
Peter H
NTK
Sivakumar V
BSP
Jayaraj E
TNLK
Antony A
AISMK
Seema A
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Sivan Raj K
IND
Ramesh Raja Kumar C
IND
John Benadict G
IND
Shaju Singh M R
IND
Anchalose R
IND
Thankappan C
TMGMK
Vijikumar K
NDPOSI
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.