कराईकुडी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 184) दक्षिण तमिलनाडु के चेत्तिनाड क्षेत्र का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और चर्चित विधानसभा क्षेत्र है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से कराईकुडी शहर के आसपास केंद्रित है, जो पूरे चेत्तिनाड इलाके का आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है. अपनी ऐतिहासिक हवेलियों, पारंपरिक वास्तुकला और सक्रिय व्यापारिक समुदायों के लिए प्रसिद्ध कराईकुडी की अर्थव्यवस्था व्यापार, शिक्षा, हॉस्पिटैलिटी और सेवाओं पर आधारित है. यहां के मतदाताओं में व्यापारी, पेशेवर लोग, छोटे व्यवसायी, सरकारी कर्मचारी और आसपास के अर्ध-शहरी व ग्रामीण इलाकों के निवासी शामिल हैं.
कराईकुडी खास तौर पर अपनी 19वीं सदी की शानदार चेत्तिनाड हवेलियों, तीखे और असली चेत्तिनाड खाने, और हाथ से बनी अथंगुडी टाइल्स के लिए जाना जाता है.
राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप की बात करें तो यहां शहरी और अर्ध-शहरी मतदाताओं का मिश्रण है, जिनमें व्यापारी, प्रोफेशनल, सरकारी कर्मचारी और सर्विस सेक्टर के लोग शामिल हैं. सामाजिक रूप से यहां नगराथार (चेट्टियार) व्यापारिक समुदाय, थेवर, अनुसूचित जातियां और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समूह मौजूद हैं. व्यापारिक संघ, शैक्षणिक संस्थान और सामुदायिक नेटवर्क यहां की राजनीति को काफी प्रभावित करते हैं. चुनावों में आमतौर पर आर्थिक विकास, पर्यटन को बढ़ावा देने और शहरी ढांचे के सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहते हैं.
भौगोलिक स्थिति और कनेक्टिविटी के लिहाज से यह क्षेत्र सिवगंगा जिले के चेत्तिनाड इलाके में स्थित है. सड़क और रेलवे नेटवर्क के माध्यम से कराईकुडी, मदुरै, तिरुचिरापल्ली और रामनाथपुरम जैसे शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यह शहर पूरे क्षेत्र का व्यापारिक, शैक्षणिक और परिवहन केंद्र है, जिसके आसपास अर्ध-शहरी बस्तियां और कृषि आधारित गांव स्थित हैं. यह इलाका अपनी चेत्तिनाड विरासत वास्तुकला और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए भी प्रसिद्ध है.
मुख्य गतिविधि केंद्र में कराईकुडी का शहर केंद्र प्रमुख व्यापारिक और प्रशासनिक हब है. यहां के शैक्षणिक संस्थान और छात्र समुदाय शहरी वोटिंग पैटर्न को प्रभावित करते हैं. ऐतिहासिक चेत्तिनाड रिहायशी इलाके और व्यापारिक बाजार भी महत्वपूर्ण हैं. साप्ताहिक हाट-बाजार और व्यापारिक केंद्र स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं, जबकि आसपास के गांवों में कृषि और सरकारी योजनाएं वोटिंग व्यवहार को प्रभावित करती हैं.
मुख्य समस्याएं में सड़कों, जल निकासी और सार्वजनिक परिवहन जैसी शहरी सुविधाओं का विकास, चेत्तिनाड पर्यटन को बढ़ावा देना और विरासत संरक्षण, शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, और छोटे व्यापारियों व उद्यमियों को सहयोग देना शामिल है.
मतदाताओं का रुझान देखें तो व्यापारी और व्यवसायी वर्ग आर्थिक विकास और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देता है. शहरी लोग साफ-सफाई, नागरिक सुविधाएं और परिवहन पर ध्यान देते हैं, जबकि युवा वर्ग नौकरी और उच्च शिक्षा के अवसर चाहता है. आसपास के ग्रामीण इलाकों के मतदाता सरकारी योजनाओं और कृषि सहायता को ज्यादा महत्व देते हैं. यहां चुनाव आमतौर पर कड़े मुकाबले वाले होते हैं, क्योंकि राजनीतिक दलों की मजबूत पकड़ और सक्रिय स्थानीय नेतृत्व मौजूद रहता है.
H.raja
BJP
Dherpoki V Pandi
AMMKMNKZ
N.durai Manickam
NTK
S.rajkumar
MNM
Nota
NOTA
B.vanitha
PT
N.baluswamy
BSP
N.meenal
IND
K.velu
IND
M.naina Mohamed
IND
A.ganesan
IND
Rajkumar.g
AMGRDMK
A.paramasivam
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.