DMK
AIADMK
TVK
NTK
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IND
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तिरुमंगलम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 196) मदुरै जिले के दक्षिण-पश्चिम किनारे पर स्थित एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है. यह दक्षिण तमिलनाडु के कई जिलों को जोड़ने वाले हाईवे कॉरिडोर पर होने की वजह से रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है. इस क्षेत्र में तिरुमंगलम शहर के साथ-साथ बड़ी संख्या में आसपास के कृषि प्रधान गांव शामिल हैं. मदुरै शहर के पास होने के कारण यह इलाका धीरे-धीरे ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और बाजार का एक केंद्र बन गया है, जहां से आसपास के ग्रामीण इलाकों का व्यापार चलता है. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती, छोटे व्यापार, परिवहन सेवाओं और निर्माण कार्यों पर आधारित है.
इस क्षेत्र को खास पहचान 2009 के तिरुमंगलम उपचुनाव के दौरान मिली, जो तमिलनाडु की राजनीति में काफी चर्चा में रहा. उसी समय “तिरुमंगलम फॉर्मूला” नाम का एक शब्द सामने आया, जिसका मतलब कथित तौर पर वोटरों को पैसे देकर प्रभावित करना था, और यह पूरे राज्य में सुर्खियों में रहा.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र आधा शहरी और आधा ग्रामीण प्रकृति का है, जहां किसान, व्यापारी, ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग और दिहाड़ी मजदूर बड़ी संख्या में रहते हैं. यहां की सामाजिक संरचना में थेवर, नायडू, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय प्रमुख हैं. स्थानीय स्तर पर जातिगत नेटवर्क, किसानों के समूह और व्यापारियों के संगठन राजनीति और चुनावी माहौल को काफी प्रभावित करते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र मदुरै शहर के दक्षिण-पश्चिम में समतल इलाके में स्थित है. यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, जो इसे मदुरै, विरुधुनगर और तूतीकोरिन (थूथुकुडी) जैसे शहरों से जोड़ते हैं. यह इलाका माल और यात्री परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण जंक्शन की तरह काम करता है. आसपास के गांव मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं, जहां धान, कपास और दालों की खेती होती है. मदुरै के पास होने के कारण यहां शहरी विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा है.
इस क्षेत्र के मुख्य केंद्रों में तिरुमंगलम शहर का बाजार और प्रशासनिक क्षेत्र शामिल है, जो व्यापार का मुख्य हब है. इसके अलावा हाईवे से जुड़े ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स केंद्र, आसपास के कृषि गांव जो ग्रामीण वोटिंग को प्रभावित करते हैं, बाजार की गलियां जहां छोटे व्यापार चलते हैं, और नए बनते रिहायशी इलाके, ये सभी इस क्षेत्र की अहम पहचान हैं.
यहां के प्रमुख मुद्दों में किसानों के लिए सिंचाई और कृषि सहायता, सड़क और हाईवे की बेहतर व्यवस्था, पीने के पानी की उपलब्धता और भूजल प्रबंधन, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, और बाजार, ट्रांसपोर्ट हब व छोटे उद्योगों का विकास शामिल हैं.
मतदाताओं का रुझान भी इन मुद्दों के आधार पर अलग-अलग दिखता है. किसान सिंचाई और फसल से जुड़ी नीतियों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग और व्यापारी बेहतर सड़क और लॉजिस्टिक्स विकास चाहते हैं. युवा वर्ग रोजगार और शिक्षा के अवसरों पर ज्यादा ध्यान देता है, और ग्रामीण परिवार सरकारी योजनाओं व आवास सुविधाओं को महत्व देते हैं. यहां चुनाव आमतौर पर काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जिन पर जातीय समीकरण और स्थानीय नेताओं का प्रभाव साफ दिखाई देता है.
Manimaran M
DMK
Athi Narayanan K
AMMKMNKZ
Saral M
NTK
Ramkumar M
MNM
Veeranan S
IND
Nota
NOTA
Ramanathan A
IND
Muthuvelraj P
IND
Ramanathan M
IND
Rajanbabu P
IND
Muthuraja M
IND
Ramamoorthi R
IND
Balamurugan N R
IND
Nirmal M
MIDP
Arumugam K
LJP
Marikannan A
NDPOSI
Thiralipandi N
IND
Jegadeesh Kumar R
IND
Alagarsamy M
IND
Vairaseeman G
IND
Duraipandi B
IND
Kali A
IND
Chandrasekaran R
IND
Veeramani V
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.