परमकुडी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 209) रामनाथपुरम जिला में स्थित है. यह एक अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाका है. यहां की पहचान खेती-किसानी, छोटे शहरों के बाजार और अलग-अलग समाजों के मिश्रण से बनती है. यह इलाका मशहूर अभिनेता-राजनेता कमल हासन का जन्मस्थान भी है.
इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान पुराने मंदिरों, धार्मिक त्योहारों और व्यापारिक परंपरा से जुड़ी है. लेकिन यहां की अर्थव्यवस्था आज भी मुख्य रूप से खेती, पशुपालन और छोटे व्यापार पर आधारित हैय बड़े औद्योगिक या शहरी क्षेत्रों के विपरीत, यहां की राजनीति पर लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें ज्यादा असर डालती हैं, जिनमें सरकारी योजनाओं का सही तरीके से मिलना, जाति और समाज का प्रभाव, पानी की उपलब्धता और स्थानीय विकास कार्य शामिल हैं. यहां के वोटर बड़े-बड़े विचारों से ज्यादा अपनी जिंदगी में होने वाले असली बदलाव (रोजगार, सड़क, शिक्षा) को महत्व देते हैं.
भौगोलिक रूप से इस क्षेत्र में सूखे इलाके, गांव और छोटे शहरी इलाके शामिल हैं. पानी की कमी यहां की सबसे बड़ी समस्या है, जो खेती को सीधे प्रभावित करती है. यहां धान, मोटे अनाज, दालें और पशुपालन पर आधारित खेती होती है. परमकुडी शहर सड़कों से रामनाथपुरम, मुदुकुलाथुर और मानामदुरै से जुड़ा हुआ है, लेकिन गांवों के अंदर की सड़कें अभी भी ठीक से विकसित नहीं हैं. सार्वजनिक परिवहन मौजूद तो है, लेकिन हर जगह समान रूप से नहीं पहुंचता, जिससे महिलाओं, छात्रों और बुजुर्गों को परेशानी होती है.
इस क्षेत्र के मुख्य महत्वपूर्ण स्थानों में परमकुडी टाउन मार्केट, बड़े सिंचाई तालाब और नहरें, पंचायत और गांव की सड़कें, स्कूल और सरकारी दफ्तर, और धार्मिक स्थल शामिल हैं.
यहां की प्रमुख समस्याएं हैं. इनमें सिंचाई के लिए पानी की अनिश्चित उपलब्धता, खेती की बढ़ती लागत, गांवों की खराब सड़कें, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, युवाओं के लिए रोजगार की कमी और उनका बाहर पलायन, सार्वजनिक परिवहन की कमी, पीने के पानी की समस्या, और सरकारी योजनाओं के मिलने में देरी शामिल हैं.
वोटरों की सोच भी अलग-अलग वर्गों के हिसाब से है, किसान अच्छी सिंचाई, सस्ती लागत और फसलों के सही दाम चाहते हैं. खेत मजदूर स्थिर मजदूरी और सरकारी मदद चाहते हैं. युवा रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और पढ़ाई के मौके चाहते हैं. तो वहीं महिलाएं पानी, स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं. बुजुर्ग पेंशन, इलाज और परिवहन सुविधाओं को महत्व देते हैं.
अब यहां के वोटर पार्टी से ज्यादा अपने प्रतिनिधि के काम को देखते हैं, जैसे वह कितनी आसानी से मिलते हैं, इलाके में मौजूद रहते हैं और लोगों की समस्याएं हल करते हैं.
राजनीतिक इतिहास में देखा जाए तो यहां के वोटर समय-समय पर अलग-अलग पार्टियों को समर्थन देते रहे हैं. पहले AIADMK ने लगभग 6 बार जीत हासिल की है, जबकि DMK भी कई बार यहां से जीत चुकी है. यहां किसी एक पार्टी का स्थायी दबदबा नहीं रहा है.
Sadhan Prabhakar N
ADMK
Sasikala S
NTK
Karuppu Raja M
MNM
Selvi U
DMDK
Nota
NOTA
Murukesan K
IND
Govindan V
BSP
Rajiv Gandhi K
IND
Udhayakumar M
IND
Balamurugan S
IND
Parthasarathi M
MIDP
Ramapandi C
IND
Ravisankar V
IND
Udayakumar
IND
Kumar S
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.