अरुप्पुकोट्टई विधानसभा क्षेत्र तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के उत्तरी भाग में स्थित है और अपनी मजबूत व्यापारिक संस्कृति तथा छोटे उद्योगों के लिए जाना जाता है. इस क्षेत्र में अरुप्पुकोट्टई शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाके शामिल हैं. ऐतिहासिक रूप से यहां का विकास टेक्सटाइल व्यापार, छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, कृषि और रिटेल कारोबार के आधार पर हुआ है. मदुरै और विरुधुनगर के बीच इसकी रणनीतिक स्थिति ने इसे दक्षिण तमिलनाडु का एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र बना दिया है. यहां के मतदाताओं में व्यापारी, कपड़ा उद्योग से जुड़े कामगार, किसान, छोटे उद्यमी और मध्यम वर्ग के परिवार प्रमुख रूप से शामिल हैं.
इस क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक प्रकृति मिश्रित है, जहां अर्ध-शहरी मतदाता समूह में व्यापारी, उद्योगों में काम करने वाले मजदूर, किसान और सेवा क्षेत्र के कर्मचारी शामिल हैं. यहां मुख्य राजनीतिक मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच रहता है, जबकि कभी-कभी देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (DMDK) और अन्य क्षेत्रीय दल भी प्रभाव डालते हैं. सामाजिक संरचना में नादर, नायडू, थेवर, अनुसूचित जातियां और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के व्यापारी समुदाय शामिल हैं. यहां व्यापारियों के संगठन, औद्योगिक समूह और सामुदायिक संगठन राजनीतिक गतिविधियों और जनसमर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभाते हैं. चुनावी मुद्दों में अक्सर आर्थिक विकास, रोजगार और शहरी बुनियादी ढांचा प्रमुख रहते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र विरुधुनगर जिले के अर्ध-शुष्क मैदानों में स्थित है. यह प्रमुख सड़कों के जरिए मदुरै, विरुधुनगर और तूतीकोरिन (Thoothukudi) से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे यह आसपास के गांवों के लिए एक क्षेत्रीय व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करता है. यहां के आसपास की कृषि भूमि में कपास, दालें और मूंगफली जैसी फसलें उगाई जाती हैं. अच्छी सड़क और परिवहन व्यवस्था व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देती है.
इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण हिस्सों में अरुप्पुकोट्टई शहर का मुख्य बाजार और प्रशासनिक क्षेत्र, टेक्सटाइल व्यापार के केंद्र और छोटे उद्योग वाले इलाके, शहर के आसपास के गांव जहां खेती होती है, बाजार की गलियां और रिटेल हब, जो व्यापारियों के वोटिंग पैटर्न को प्रभावित करते हैं, और मध्यम व कामकाजी वर्ग के आवासीय इलाके शामिल हैं.
मुख्य समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों में छोटे उद्योगों और टेक्सटाइल यूनिट्स का विकास, स्थानीय उद्योगों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, सड़क और शहरी सुविधाओं का सुधार, अर्ध-शुष्क क्षेत्र में पानी की आपूर्ति और भूजल प्रबंधन, और कपास जैसी सूखा-प्रधान फसलों के किसानों को समर्थन देना शामिल है.
मतदाताओं के रुझान (वोटर मूड) की बात करें तो व्यापारी और छोटे कारोबारी आर्थिक विकास और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देते हैं, औद्योगिक मजदूर स्थिर रोजगार और श्रमिक कल्याण चाहते हैं, जबकि किसान सिंचाई और फसल के उचित दाम पर ध्यान देते हैं. शहरी निवासी पीने का पानी, सड़क और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं को महत्वपूर्ण मानते हैं. यहां चुनाव आमतौर पर काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहां दोनों प्रमुख द्रविड़ पार्टियों के मजबूत संगठन होते हैं और सामुदायिक गठजोड़ चुनाव के नतीजों को प्रभावित करते हैं.
Vaigaichelvan
ADMK
Uma
NTK
V.umadevi
MNM
R.ramesh
DMDK
Nota
NOTA
K. Boominathan
IND
M.karuppasamy
PT
P.prasanth
IND
Thangapandian
IND
Lingapandi
IND
G.subburaj
BSP
V. Poornisha
IND
S.manivannan
IND
S.ramachandran
IND
M Muthumariappan
IND
Ponmuniasamy
IND
Dhanasekarapandian
IND
E.ramachandran
IND
R.ramachandran
IND
R.s.ramachandran
IND
Thanga Vadivel.a.n
IND
G.ramachandran
IND
Vijayakumar
IND
S.deenathayalan
AMPK
G.ranjith
IND
A.p.s.johnson
MIDP
S.pandiyan
BHUDRP
T.ramachandran
IND
Venkatesan
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.