पलानी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 127) भगवान मुरुगन के छह पवित्र धामों में से एक के रूप में जाना जाता है. यह एक अनूठा मिश्रित निर्वाचन क्षेत्र है, जहां धार्मिक पर्यटन, मंदिर से जुड़ी अर्थव्यवस्था और कृषि- तीनों मिलकर चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं. सामान्य कोंगु क्षेत्र के पूरी तरह कृषि-आधारित सीटों के विपरीत, पलानी में मतदान का व्यवहार तीर्थयात्रियों की आवाजाही, मंदिर-नगर की आजीविका और शहरी-ग्रामीण संतुलन से भी प्रभावित होता है. इसके साथ-साथ पारंपरिक कृषि और सरकारी कल्याण योजनाओं से जुड़े मुद्दे भी यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इस सीट पर जीत-हार का अंतर आमतौर पर मध्यम रहता है, और कभी-कभी परिणामों में बदलाव तब देखने को मिलता है जब मंदिर प्रशासन से जुड़े विवाद, पर्यटन में व्यवधान, पानी की कमी, या शहर की सेवाओं में कमी जैसी स्थितियां सामने आती हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से इस क्षेत्र में कई तरह के मतदाता समूह प्रभाव डालते हैं. इनमें मंदिर से जुड़े कामगार जैसे दुकानदार, लॉज और होटल चलाने वाले, परिवहन से जुड़े लोग और छोटे विक्रेता शामिल हैं. इसके अलावा तीर्थयात्री अर्थव्यवस्था पर निर्भर लोग, जैसे होटल मालिक, ऑटो चालक और गाइड भी एक बड़ा वर्ग हैं. आसपास के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसान, कोंगु और गैर-कोंगु ओबीसी समुदाय, शहर के बाहरी इलाकों और गांवों में रहने वाले अनुसूचित जाति (SC) समुदाय, तथा छोटे व्यापारी, सेवा क्षेत्र के कर्मचारी और दैनिक मजदूरी करने वाले लोग भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से पलानी शहर एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता है. इसके आसपास पलानी पहाड़ियों के तलहटी वाले गांव, सूखे और आंशिक रूप से सिंचित कृषि क्षेत्र, और ऐसे इलाके हैं जहां मौसमी रूप से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं. यहां अर्ध-शहरी बस्तियों का प्रभुत्व है, जबकि बाहरी हिस्सों में ग्रामीण क्षेत्र फैले हुए हैं. इस वजह से मंदिर-नगर की गतिविधियां और माहौल अक्सर पूरे क्षेत्र के राजनीतिक माहौल को प्रभावित करते हैं.
क्षेत्र के प्रमुख केंद्रों या हॉटस्पॉट्स में बाला डंडायुधपानी हिल मंदिर, मंदिर से जुड़े शहर के वार्ड, व्यापार और लॉजिंग के क्षेत्र, आसपास के कृषि प्रधान गांव, SC समुदाय की बस्तियां, और परिवहन तथा छोटे विक्रेताओं से जुड़े इलाके शामिल हैं. इन सभी क्षेत्रों की प्रतिक्रिया तीर्थयात्रियों की संख्या, नगर की सफाई व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, पानी की उपलब्धता, मंदिर प्रशासन के फैसले और मौसमी रोजगार की स्थिति जैसे मुद्दों पर काफी तेज होती है.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में मंदिर नगर में ट्रैफिक, सफाई और भीड़ प्रबंधन, शहर और गांवों के लिए पानी की पर्याप्त आपूर्ति, तीर्थयात्रा से जुड़ी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा जैसे छोटे विक्रेता, ऑटो चालक और लॉज मालिक, शहरी सड़कों और जल निकासी व्यवस्था का विकास, मौसमी रोजगार की उपलब्धता, सरकारी अस्पताल और आपातकालीन सेवाओं की सुविधा, तथा छोटे व्यापारियों के लिए निष्पक्ष नियम-व्यवस्था ताकि उन्हें अनावश्यक परेशान न किया जाए, जैसे मुद्दे प्रमुख हैं.
मतदाताओं की सोच या मूड की बात करें तो यहां के लोग चाहते हैं कि उनका विधायक मंदिर-नगर की संवेदनशीलता को समझते हुए प्रशासनिक कुशलता के साथ काम करे. इसके लिए HR&CE विभाग, नगर पालिका, हाईवे विभाग और पुलिस के साथ मजबूत समन्वय जरूरी माना जाता है. त्योहारों और भीड़भाड़ वाले सीजन में दिखने वाली सक्रियता और प्रबंधन मतदाताओं को प्रभावित करता है. साथ ही छोटे व्यापारियों और सेवा क्षेत्र के कामगारों की सुरक्षा, और शहर के साथ-साथ बाहरी ग्रामीण क्षेत्रों को भी बराबर ध्यान देना जरूरी है. अगर तीर्थयात्रा से जुड़ी अर्थव्यवस्था या शहरी सेवाओं के दबाव को नजरअंदाज किया जाता है, तो मतदाताओं की नाराजगी बहुत जल्दी बढ़ सकती है और चुनावी परिणामों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.
Ravi Manoharan K
ADMK
Vinoth Rajasekaran G
NTK
Poovendhan T
MNM
Veerakumar V
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Sivabala Moorthi K
ABHM
Sudha R B
IND
Suresh M
IND
Nachimuthu S
BSP
Nagendran G
IND
Samiappa Gounder P
IND
Shahul Hameed
IND
Siddiq M
IND
Lathika
IND
Periyadurai M
IND
Ananthan S. P
IND
Thangavel B
MIDP
Munishraja M
IND
Pandeeswaran M
IND
Rasulbeevi Sahabudeen
IND
Thangavel A
IND
Kaliappan K
IND
Azhagumalai A
IND
Karuppusamy P
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.