नांगुनेरी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 227) तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित है और इसमें मुख्य रूप से कृषि प्रधान गांव, मंदिर नगर (टेम्पल टाउन) और छोटे अर्ध-शहरी इलाके शामिल हैं. यह क्षेत्र अपनी मजबूत कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, धार्मिक संस्थानों और तेजी से बढ़ते शिक्षा क्षेत्र के लिए जाना जाता है. यहां स्थित प्रसिद्ध वनमामलाई पेरुमल मंदिर (तोताद्री मठ) नांगुनेरी को एक महत्वपूर्ण वैष्णव धार्मिक केंद्र बनाता है, जहां दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं. यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती, छोटे व्यापार, शिक्षा और सेवा क्षेत्र में रोजगार पर निर्भर करती है.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण मतदाताओं से बना है, जिनमें किसान, कृषि मजदूर, व्यापारी और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं. यहां की सामाजिक संरचना में नादर, थेवर, अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय प्रमुख हैं. इस क्षेत्र में धार्मिक संस्थाएं और सामुदायिक संगठन लोगों को सामाजिक और राजनीतिक रूप से संगठित करने में अहम भूमिका निभाते हैं. चुनावों में अक्सर स्थानीय नेताओं का प्रभाव और राजनीतिक दलों के गठबंधन परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण साबित होते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से नांगुनेरी तिरुनेलवेली–कन्याकुमारी कॉरिडोर पर स्थित है और यह क्षेत्र उपजाऊ कृषि भूमि के लिए जाना जाता है, जहां धान, केला और दालें प्रमुख रूप से उगाई जाती हैं. यह इलाका सड़कों और हाईवे के माध्यम से तिरुनेलवेली, नागरकोइल और आसपास के कस्बों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यहां की खेती को तालाब, नहरों और भूजल स्रोतों से सिंचाई मिलती है. नांगुनेरी कस्बे के आसपास के कई गांव इस विधानसभा क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट) में वनमामलाई मंदिर (दिव्य देशम), नांगुनेरी शहर जो प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्र है, मंदिर के आसपास के गांव जो धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देते हैं, कृषि क्षेत्र जहां धान और बागवानी फसलें उगाई जाती हैं, और तिरुनेलवेली व कन्याकुमारी की ओर जाने वाले प्रमुख सड़क मार्गों के किनारे बसे अर्ध-शहरी इलाके शामिल हैं. इसके अलावा, ग्रामीण बस्तियों में सरकारी योजनाओं और खेती से जुड़े मुद्दे मतदाताओं के व्यवहार को काफी प्रभावित करते हैं.
मुख्य समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों में खेती के लिए पानी और सिंचाई की उपलब्धता, ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे का विकास, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, और किसानों व कमजोर वर्गों के लिए सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन शामिल हैं.
मतदाताओं के रुझान की बात करें तो यहां के किसान सिंचाई, फसल सहायता और कृषि सब्सिडी को प्राथमिकता देते हैं. ग्रामीण परिवार सरकारी योजनाओं और आवास योजनाओं को काफी महत्व देते हैं. वहीं युवा वर्ग रोजगार और बेहतर शिक्षा सुविधाओं पर ध्यान देता है. इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और मंदिर से जुड़ी अर्थव्यवस्था स्थानीय व्यापारियों को प्रभावित करती है. कुल मिलाकर, यहां चुनाव आमतौर पर काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहां अलग-अलग दलों के गठबंधन (एलायंस) परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
Ganesaraja, N.
ADMK
Paramasiva Iyyappan, S.
AMMKMNKZ
Veerapandi, P.
NTK
Nota
NOTA
Kathiravan, T.
IND
Gnana Balaji, D.
IND
Subbulakshmi, R.
BSP
Ashok Kumar, N.
IND
Kandhan, M.
AUTMK
Lenin, K.
IND
Shunmuga Sundaram, S.
NIDP
Muthuraj, H.
IND
Kandasamy, D.
IND
Prabakaran, A.
VTVTK
Muthudurai, S.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.