कदयानल्लूर निर्वाचन क्षेत्र (संख्या 221) तमिलनाडु के तेनकासी जिले के पश्चिमी हिस्से में और केरल बॉर्डर के पास स्थित है. यह एक खास विधानसभा क्षेत्र है. यह इलाका खेती से ज्यादा व्यापार, टेक्सटाइल और बॉर्डर के पार होने वाले सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए जाना जाता है. पहले से ही यह एक व्यापारिक शहर के रूप में विकसित हुआ है, जहां बुनाई, हैंडलूम और छोटे-छोटे व्यापार मुख्य आधार हैं. केरल के बाजारों से इसका गहरा जुड़ाव है, जिससे यहां का व्यापार और भी मजबूत होता है. यह क्षेत्र अर्ध-शहरी है, जहां पारंपरिक कामकाज, भीड़भाड़ और अलग-अलग धर्मों के लोग मिलकर रहते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह क्षेत्र काफी अलग है, क्योंकि यहां व्यापार नेटवर्क, मजदूरों का आना-जाना और राज्यों के बीच आवाजाही बहुत ज्यादा है. इसलिए यहां के लोग सरकार से अच्छी व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता की उम्मीद रखते हैं. यहां मुस्लिम और हिंदू समुदाय दोनों की अच्छी खासी आबादी है, जिससे एक मिश्रित सांस्कृतिक माहौल बनता है. कई लोग खाड़ी देशों (Gulf) में काम करते हैं, जिससे यहां की अर्थव्यवस्था, रहन-सहन और यहां तक कि राजनीति पर भी असर पड़ता है. मस्जिदें और मंदिर समाज को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं और चुनाव के समय इनका असर साफ दिखता है.
भौगोलिक रूप से यह इलाका पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के पास है, जहां मैदान से लेकर पहाड़ी इलाका देखने को मिलता है. केरल के पास होने से व्यापार तो बढ़ता है, लेकिन सड़कों और ट्रैफिक पर दबाव भी पड़ता है. यह क्षेत्र तेनकासी, पुलियंगुडी और सेनगोट्टई से सड़कों के जरिए जुड़ा हुआ है, लेकिन अंदरूनी गांवों में आज भी संकीर्ण और कमजोर सड़कें हैं. बरसात के मौसम में खासकर निचले इलाकों में पानी भरना और ड्रेनेज की समस्या बढ़ जाती है.
यहां के मुख्य इलाकों में कडायनल्लूर का बाजार क्षेत्र, बुनाई और पावरलूम क्लस्टर, बस स्टैंड और व्यापारिक जंक्शन, केरल जाने वाले बॉर्डर व्यापार मार्ग, निचले रिहायशी वार्ड और आसपास के गांव शामिल हैं.
इस क्षेत्र की मुख्य समस्याएं हैं. बरसात में जलभराव और खराब ड्रेनेज, बुनाई उद्योग के लिए बिजली कटौती, अंदरूनी और बॉर्डर सड़कों की खराब हालत, गर्मियों में पानी की कमी, बुनकरों के लिए कच्चे माल की बढ़ती कीमत, युवाओं में बेरोजगारी और बाहर काम के लिए पलायन, बाजार इलाकों में ट्रैफिक जाम और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी प्रमुख हैं.
मतदाताओं का मूड भी साफ है. बुनकर चाहते हैं कि उन्हें लगातार बिजली, सस्ता कच्चा माल और सरकारी मदद मिले. व्यापारी बेहतर सड़क, ट्रैफिक कंट्रोल और बाजार की सुविधाएं चाहते हैं. युवा रोजगार और स्किल आधारित अवसरों की मांग कर रहे हैं. महिलाएं पानी, सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देती हैं. वहीं आम लोग चाहते हैं कि उनके इलाके की छोटी-छोटी समस्याओं का जल्दी समाधान हो और स्थानीय स्तर पर काम दिखे.
K.a.m.muhammed Abubacker
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S.ayyaduraipandian
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M.muthulakshmi
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M.ambikadevi
MNM
Nota
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S.seenivasan
IND
Velammal
IND
Sivasubramaniyan R
IND
Poologaraj R
IND
S.muruganantham
IND
A.sankar
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S.raja Ram
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M.ayyadurai
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Raja Ponnusamy
IND
P.raji
IND
R.krishnan
IND
A.ganesan
IND
Mariduraipandian
IND
Ayyadurai R
IND
K.radha Krishnan
IND
Avani Raja.t
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.