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Kadayanallur Vidhan Sabha Election Results Live: कदयानल्लूर विधानसभा का रिजल्ट घोषित, DMK ने AIADMK को हराया
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
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कदयानल्लूर निर्वाचन क्षेत्र (संख्या 221) तमिलनाडु के तेनकासी जिले के पश्चिमी हिस्से में और केरल बॉर्डर के पास स्थित है. यह एक खास विधानसभा क्षेत्र है. यह इलाका खेती से ज्यादा व्यापार, टेक्सटाइल और बॉर्डर के पार होने वाले सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए जाना जाता है. पहले से ही यह एक व्यापारिक शहर के रूप में विकसित हुआ है, जहां बुनाई, हैंडलूम और छोटे-छोटे व्यापार मुख्य आधार हैं. केरल के बाजारों से इसका गहरा जुड़ाव है, जिससे यहां का व्यापार और भी मजबूत होता है. यह क्षेत्र अर्ध-शहरी है, जहां पारंपरिक कामकाज, भीड़भाड़ और अलग-अलग धर्मों के लोग मिलकर रहते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह क्षेत्र काफी अलग है, क्योंकि यहां व्यापार नेटवर्क, मजदूरों का आना-जाना और राज्यों के बीच आवाजाही बहुत ज्यादा है. इसलिए यहां के लोग सरकार से अच्छी व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता की उम्मीद रखते हैं. यहां मुस्लिम और हिंदू समुदाय दोनों की अच्छी खासी आबादी है, जिससे एक मिश्रित सांस्कृतिक माहौल बनता है. कई लोग खाड़ी देशों (Gulf) में काम करते हैं, जिससे यहां की अर्थव्यवस्था, रहन-सहन और यहां तक कि राजनीति पर भी असर पड़ता है. मस्जिदें और मंदिर समाज को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं और चुनाव के समय इनका असर साफ दिखता है.
भौगोलिक रूप से यह इलाका पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के पास है, जहां मैदान से लेकर पहाड़ी इलाका देखने को मिलता है. केरल के पास होने से व्यापार तो बढ़ता है, लेकिन सड़कों और ट्रैफिक पर दबाव भी पड़ता है. यह क्षेत्र तेनकासी, पुलियंगुडी और सेनगोट्टई से सड़कों के जरिए जुड़ा हुआ है, लेकिन अंदरूनी गांवों में आज भी संकीर्ण और कमजोर सड़कें हैं. बरसात के मौसम में खासकर निचले इलाकों में पानी भरना और ड्रेनेज की समस्या बढ़ जाती है.
यहां के मुख्य इलाकों में कडायनल्लूर का बाजार क्षेत्र, बुनाई और पावरलूम क्लस्टर, बस स्टैंड और व्यापारिक जंक्शन, केरल जाने वाले बॉर्डर व्यापार मार्ग, निचले रिहायशी वार्ड और आसपास के गांव शामिल हैं.
इस क्षेत्र की मुख्य समस्याएं हैं. बरसात में जलभराव और खराब ड्रेनेज, बुनाई उद्योग के लिए बिजली कटौती, अंदरूनी और बॉर्डर सड़कों की खराब हालत, गर्मियों में पानी की कमी, बुनकरों के लिए कच्चे माल की बढ़ती कीमत, युवाओं में बेरोजगारी और बाहर काम के लिए पलायन, बाजार इलाकों में ट्रैफिक जाम और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी प्रमुख हैं.
मतदाताओं का मूड भी साफ है. बुनकर चाहते हैं कि उन्हें लगातार बिजली, सस्ता कच्चा माल और सरकारी मदद मिले. व्यापारी बेहतर सड़क, ट्रैफिक कंट्रोल और बाजार की सुविधाएं चाहते हैं. युवा रोजगार और स्किल आधारित अवसरों की मांग कर रहे हैं. महिलाएं पानी, सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देती हैं. वहीं आम लोग चाहते हैं कि उनके इलाके की छोटी-छोटी समस्याओं का जल्दी समाधान हो और स्थानीय स्तर पर काम दिखे.
K.a.m.muhammed Abubacker
IUML
S.ayyaduraipandian
AMMKMNKZ
M.muthulakshmi
NTK
M.ambikadevi
MNM
Nota
NOTA
S.seenivasan
IND
Velammal
IND
Sivasubramaniyan R
IND
Poologaraj R
IND
S.muruganantham
IND
A.sankar
IND
S.raja Ram
NGPP
M.ayyadurai
IND
Raja Ponnusamy
IND
P.raji
IND
R.krishnan
IND
A.ganesan
IND
Mariduraipandian
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Ayyadurai R
IND
K.radha Krishnan
IND
Avani Raja.t
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.