उसिलामपट्टी विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 197), जो मदुरै जिले के पश्चिमी इलाके में स्थित है, दक्षिणी तमिलनाडु का एक बेहद राजनीतिक रूप से संवेदनशील और सामाजिक रूप से विशिष्ट क्षेत्र माना जाता है. ऊबड़-खाबड़ भौगोलिक बनावट, मजबूत कृषि आधार और गहराई से जमी स्थानीय पहचान इस क्षेत्र की खास पहचान है. शहरी मदुरै की राजनीति से अलग, उसिलामपट्टी की राजनीतिक धारा अपनी स्वतंत्र लय में चलती रही है. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से वर्षा आधारित खेती, पशुपालन और प्रवासी मजदूरी पर निर्भर है, जहां सामाजिक ढांचे चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं.
पर्यटन या उद्योग आधारित सीटों के विपरीत, उसिलामपट्टी की राजनीति जमीन, पानी, सम्मान, कानून-व्यवस्था की धारणा और नेतृत्व की व्यक्तिगत पकड़ के इर्द-गिर्द घूमती है. यहां चुनाव आम तौर पर किसी बड़े राजनीतिक लहर से नहीं, बल्कि स्थानीय समीकरणों से तय होते हैं. मुकाबले कड़े, व्यक्तित्व-केंद्रित और सूक्ष्म सामाजिक संतुलन पर आधारित रहते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से, उसिलामपट्टी में जातीय एकजुटता, मजबूत स्थानीय नेटवर्क और बाहरी हस्तक्षेप के प्रति प्रतिरोध स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. पार्टी के प्रतीक से ज्यादा उम्मीदवार की विश्वसनीयता, स्थानीय वंश, सामाजिक पकड़ और बूथ स्तर की पकड़ मायने रखती है. मतदान व्यवहार सामुदायिक नेतृत्व, अनौपचारिक शक्ति केंद्रों और पुरानी निष्ठाओं से संचालित होता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख मतदाता वर्ग में कृषि मज़दूर, छोटे किसान, पशु व्यापारी, प्रवासी मजदूर परिवार और स्वरोजगार से जुड़े युवा शामिल हैं. सामाजिक अनुशासन, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत प्रभाव अक्सर विकास के वादों से अधिक महत्व रखते हैं, जिससे यह सीट स्थानीय घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील बनी रहती है.
उसिलामपट्टी कस्बे का बाजार क्षेत्र, चेक्कनूरानी रोड जंक्शन, सरकारी अस्पताल क्षेत्र, साप्ताहिक शंडी और पशु व्यापार स्थल, भीतरी पंचायत पट्टियां तथा प्रमुख मंदिर और त्योहार स्थल राजनीतिक गतिविधियों के अहम केंद्र माने जाते हैं.
यहां के प्रमुख मुद्दों में पीने के पानी की कमी, वर्षा आधारित खेती पर निर्भरता, स्थानीय रोजगार के सीमित अवसर, गांवों की खराब सड़कें, अपर्याप्त सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं, युवाओं का पलायन, कमजोर सार्वजनिक परिवहन और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी शामिल हैं.
स्वभाव से यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण, जाति और समुदाय के प्रभाव वाला, कृषि व पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़ा और उम्मीदवार-केंद्रित मतदान प्रवृत्ति वाला है. साथ ही कानून-व्यवस्था को लेकर जनता की धारणा भी चुनावी फैसलों में अहम भूमिका निभाती है.
मतदाता मनोदशा की बात करें तो किसान पानी की सुनिश्चित उपलब्धता और तालाबों के पुनर्जीवन की मांग करते हैं. मजदूर स्थायी काम और मजदूरी सुरक्षा चाहते हैं. युवा रोजंगार, कौशल प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं पर जोर देते हैं. महिलाएं पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं तक आसान पहुंच को प्राथमिकता देती हैं, जबकि बुज़ुर्ग मतदाता पेंशन और नजदीकी स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान देते हैं. कुल मिलाकर, उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी सुलभता, स्थानीय मौजूदगी और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता के आधार पर किया जाता है.
Kathiravan P V
DMK
Mahendran I
AMMKMNKZ
Iyndhukovilan G
NTK
Arumugam K
IND
Thiruselvam C
PT
Nota
NOTA
Arasumayan M
AIJYMKG
Kathiravan A
IND
Dhanasekaran T
IND
Bharath V
MIDP
Arunkumar M
IND
Mahendran A
IND
Alagumurugesan K
IND
Anantha Kumar N
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.