मनमदुरै विधानसभा क्षेत्र, जो शिवगंगा जिले के पश्चिमी हिस्से में स्थित है, एक महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है. इसमें मनमदुरै शहर के साथ-साथ आसपास के कई ग्रामीण गांव शामिल हैं. यह क्षेत्र मदुरै और रामनाथपुरम को जोड़ने वाले सड़क और रेल मार्ग पर स्थित होने के कारण एक प्रमुख आवागमन और व्यापार केंद्र के रूप में विकसित हुआ है. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती, छोटे व्यापार, परिवहन सेवाओं और सरकारी नौकरियों पर आधारित है. यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, और यहां दलित समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है, साथ ही अन्य ग्रामीण समुदाय भी रहते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह क्षेत्र काफी सक्रिय है. यहां अनुसूचित जाति के मतदाताओं के साथ-साथ थेवर, नादार और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोग भी बड़ी संख्या में हैं. गांवों में राजनीति अक्सर जातीय नेटवर्क, किसानों के संगठन और स्थानीय नेताओं के प्रभाव से चलती है. चुनावों के दौरान सरकार की योजनाएं, सामाजिक न्याय और ग्रामीण विकास के मुद्दे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं. दलित नेतृत्व और जमीनी स्तर के संगठन यहां की राजनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र अर्ध-शुष्क (semi-arid) मैदानों में आता है. यहां सड़क और रेलवे की अच्छी कनेक्टिविटी है, जिससे यह मदुरै, रामनाथपुरम और सिवगंगा से जुड़ा हुआ है. वैगई नदी का बेसिन इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में खेती को प्रभावित करता है. मनमदुरै शहर आसपास के गांवों के लिए एक व्यापारिक और परिवहन केंद्र के रूप में काम करता है, जबकि पूरे क्षेत्र में ग्रामीण बस्तियां अधिक हैं.
अगर मुख्य जगहों की बात करें, तो मनमदुरै का शहर केंद्र प्रशासनिक और व्यापारिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र है. रेलवे और हाईवे जंक्शन के आसपास के इलाके परिवहन और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं. इसके अलावा, आसपास के गांवों में धान, दालें और मूंगफली की खेती होती है. कई पंचायत क्षेत्रों में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की मजबूत उपस्थिति है. साप्ताहिक बाजार भी महत्वपूर्ण हैं, जहां किसान और व्यापारी आपस में लेन-देन करते हैं.
मुख्य मुद्दों में ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास जैसे सड़कें और सार्वजनिक परिवहन, किसानों के लिए सिंचाई, फसल बीमा और सब्सिडी जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके साथ ही अनुसूचित जाति समुदाय के लिए कल्याणकारी योजनाएं और सामाजिक न्याय भी बड़े मुद्दे हैं. पीने के पानी की व्यवस्था, भूजल प्रबंधन, और गांव के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी अहम विषय हैं.
मतदाताओं के मूड की बात करें तो अनुसूचित जाति के लोग सामाजिक न्याय, सरकारी योजनाओं और अपने प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देते हैं. किसान सिंचाई और फसलों के सही दाम को लेकर चिंतित रहते हैं. ग्रामीण परिवार आवास योजनाओं और अन्य सरकारी सुविधाओं को महत्व देते हैं, जबकि युवा रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसर चाहते हैं. यहां चुनाव आमतौर पर कड़े मुकाबले वाले होते हैं, जहां गठबंधन और स्थानीय उम्मीदवार की पकड़ काफी मायने रखती है.
Nagarajan S.
ADMK
Shanmugapriya M.
NTK
Mariappankennady S.
AMMKMNKZ
Sivasankari P.
MNM
Nota
NOTA
Rajaiah C.
IND
Chandrasekar M.
AMPK
Muthumari K.
IND
Thamaraiselvi S.
IND
Muralitharan M.
AMGRDMK
Duraipandi M.
IND
Rajendran A.
MIDP
Karuppaiah S.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.