अथूर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 129) तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के पश्चिमी हिस्से में स्थित है. इसमें अथूर नगर के साथ-साथ आसपास के कई गांव और पश्चिमी घाट की तलहटी वाले क्षेत्र शामिल हैं. यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से काफी विविध है, जहां उपजाऊ मैदान, सूखा कृषि क्षेत्र और पहाड़ी किनारे की बस्तियां एक साथ देखने को मिलती हैं. यहां की मुख्य आजीविका कृषि है, जिसमें पानी की उपलब्धता के अनुसार धान, बाजरा, सब्जियां और बागवानी फसलें उगाई जाती हैं. पहाड़ी क्षेत्रों के पास होने के कारण छोटे स्तर पर बागवानी और प्लांटेशन गतिविधियां भी होती हैं. यहां के मतदाताओं में मुख्य रूप से किसान, कृषि मजदूर, छोटे व्यापारी और ग्रामीण परिवार शामिल हैं.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यह एक ग्रामीण प्रधान क्षेत्र है, जहां लोगों की निर्भरता खेती पर बहुत अधिक है. यहां मुख्य राजनीतिक मुकाबला आमतौर पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच होता है. सामाजिक संरचना में थेवर (मुक्कुलथोर), अनुसूचित जातियां, नायडू और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय शामिल हैं. स्थानीय जातीय समीकरण और ग्रामीण नेतृत्व नेटवर्क चुनावी माहौल और मतदाताओं को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं. चुनाव प्रचार के दौरान मुख्य मुद्दे सिंचाई, ग्रामीण बुनियादी ढांचा और सरकारी कल्याण योजनाएं होते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र पश्चिमी घाट की तलहटी के पास स्थित है और सड़क मार्ग से डिंडीगुल, पलानी और आसपास के शहरों से जुड़ा हुआ है. यहां का परिदृश्य कृषि भूमि, सूखे क्षेत्र और पहाड़ी किनारे के गांवों से मिलकर बना है. जल स्रोतों में तालाब (टैंक), बोरवेल और मौसमी वर्षा शामिल हैं. अथूर नगर स्थानीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण व्यापार और सेवा केंद्र के रूप में कार्य करता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में कामराजर झील और कामराजर सागर बांध, अथूर का मुख्य बाजार और प्रशासनिक केंद्र, सिंचाई और बारिश पर निर्भर कृषि गांव, बागवानी में लगे पहाड़ी किनारे के इलाके, ग्रामीण बाजार और डिंडीगुल-पलानी को जोड़ने वाले परिवहन मार्ग शामिल हैं.
मुख्य समस्याओं की बात करें तो यहां पानी की कमी और सिंचाई का विकास, किसानों के लिए सहयोग और फसलों के दाम में स्थिरता, ग्रामीण बुनियादी ढांचा जैसे सड़क और आवास, पीने के पानी और स्वच्छता, तथा रोजगार के अवसर और पलायन जैसे मुद्दे प्रमुख हैं.
मतदाताओं के रुझान में देखा जाता है कि किसान सिंचाई और पानी की उपलब्धता को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं, जबकि कृषि मजदूर रोजगार और सरकारी योजनाओं पर ध्यान देते हैं. ग्रामीण परिवार आवास और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देते हैं और युवा वर्ग पास के शहरों में नौकरी के अवसर तलाशता है. कुल मिलाकर, यहां का मतदान व्यवहार जातीय समीकरण और राजनीतिक गठबंधनों से काफी प्रभावित होता है.
Thilagabama M
PMK
Simon Justin A
NTK
Sivasakthivel P
MNM
Selvakumar P
AMMKMNKZ
Savadamuthu A
IND
Nota
NOTA
Palraj R
IND
Muthulakshmi R
APTADMK
Silambarasan M
PT
Karthigaiselvan K
BSP
Sankar D
IND
Anbu As
IND
Silambarasan P
IND
Thilagavathy S
IND
Karthi M
IND
Balamurugan A
IND
Veeramalai S
IND
Muruganantham C
IND
Jeyasekaran R
MIDP
Ragupathi P
AMPK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.