DMK
BJP
TVK
AIPTMMK
NTK
PTM
नोटा
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BSP
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PMTDK
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TLMNK
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Tamil Nadu Election Result 2026 Live: सत्तूर विधानसभा सीट पर DMK ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
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सत्तूर विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 204) तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित है और यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र माना जाता है. इस विधानसभा क्षेत्र में सत्तूर शहर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाके शामिल हैं. यह इलाका खास तौर पर अपने माचिस उद्योग, छोटे-छोटे निर्माण इकाइयों और मजबूत व्यापार नेटवर्क के लिए जाना जाता है. मदुरै और तूतीकोरिन के बीच हाईवे पर स्थित होने के कारण सत्तूर ने एक परिवहन और वाणिज्यिक हब के रूप में तेजी से विकास किया है. यहां के मतदाता मुख्य रूप से औद्योगिक मजदूर, छोटे व्यवसायी, व्यापारी, किसान और कामकाजी वर्ग के परिवार हैं. यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि 1957 और 1962 में यह तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज का निर्वाचन क्षेत्र रहा, जहां से वे चुनाव जीते थे.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से सत्तूर का स्वरूप शहरी और ग्रामीण मिश्रित है, जहां फैक्ट्री वर्कर्स, व्यापारी और किसान सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यहां की सामाजिक संरचना में नादर, नायडू, अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय शामिल हैं. राजनीति में मजदूर यूनियन, व्यापारिक संगठन और सामुदायिक संस्थाएं लोगों को संगठित करने और चुनावी माहौल बनाने में प्रभाव डालती हैं. चुनावी मुद्दे अक्सर रोजगार, मजदूर कल्याण और बुनियादी ढांचे के विकास के आसपास घूमते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र अर्ध-शुष्क मैदानों में स्थित है. सत्तूर प्रमुख सड़क और रेल मार्गों के किनारे बसा है, जो इसे मदुरै, विरुधुनगर और तूतीकोरिन से जोड़ते हैं. इस कारण यह शहर एक क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन केंद्र के रूप में कार्य करता है. इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में कपास, दालें और मूंगफली जैसी फसलें उगाई जाती हैं, जिससे कृषि भी स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. साथ ही, यहां के औद्योगिक क्लस्टर और छोटे कारखाने रोजगार और आय के प्रमुख स्रोत हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में सत्तूर शहर का केंद्र, जो व्यापार और प्रशासन का मुख्य केंद्र है, माचिस और छोटे उद्योगों के क्लस्टर, जहां स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है, बाजार और थोक व्यापार क्षेत्र, रिहायशी इलाके, जहां मजदूर और मध्यम वर्ग के परिवार रहते हैं, और सत्तूर के आसपास के ग्रामीण गांव, जो कृषि आधारित वोटिंग पैटर्न को प्रभावित करते हैं.
मुख्य समस्याओं में मजदूरों का कल्याण और रोजगार की स्थिरता, छोटे और मध्यम उद्योगों का विकास, पीने के पानी की व्यवस्था और भूजल प्रबंधन, सड़क और परिवहन ढांचे का सुधार, और आसपास के गांवों के लिए कृषि सहायता शामिल हैं.
मतदाताओं के रुझान की बात करें तो औद्योगिक मजदूर नौकरी की सुरक्षा, वेतन और श्रम सुरक्षा नीतियों को प्राथमिकता देते हैं. व्यापारी और उद्यमी व्यापारिक विकास और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर चाहते हैं. किसान सिंचाई सुविधाओं और फसलों के सही दाम पर जोर देते हैं, जबकि शहरी निवासी पानी, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद करते हैं. यहां के चुनाव आमतौर पर काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहां द्रविड़ पार्टियों के मजबूत जमीनी नेटवर्क चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं.
Ravichandhran, R.k.
ADMK
Rajavarman, M.s.r.
AMMKMNKZ
Pandi, K.
NTK
Bharathi, M.
IJK
Marikannan, G.
PT
Nota
NOTA
Saravanakumar, M.
IND
Subramanian, S.
IND
Angusamy, S.
AMPK
Senthur Pandian, R.
IND
Chellapandian, P.
IND
Ragu, B.
IND
Ramesh, A.
IND
Rajkumar, R.
MIDP
Jeyaganesh, K.
VTVTK
Balamurugan, K.
IND
Subburaman, P.
AIMGRMMK
Karuthapandian, S.
IND
Mariappan, M.
IND
Dhamodharan, S.
IND
Palanichamy, P.
BHUDRP
Gurusamy, P.
IND
Bala Subramanian, R.
IND
Prabakaran, J.
IND
Anthonyraj, A.
IND
Manoharan, V.
IND
Maheskumar, M
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
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तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
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तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
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