सत्तूर विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 204) तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित है और यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र माना जाता है. इस विधानसभा क्षेत्र में सत्तूर शहर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाके शामिल हैं. यह इलाका खास तौर पर अपने माचिस उद्योग, छोटे-छोटे निर्माण इकाइयों और मजबूत व्यापार नेटवर्क के लिए जाना जाता है. मदुरै और तूतीकोरिन के बीच हाईवे पर स्थित होने के कारण सत्तूर ने एक परिवहन और वाणिज्यिक हब के रूप में तेजी से विकास किया है. यहां के मतदाता मुख्य रूप से औद्योगिक मजदूर, छोटे व्यवसायी, व्यापारी, किसान और कामकाजी वर्ग के परिवार हैं. यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि 1957 और 1962 में यह तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज का निर्वाचन क्षेत्र रहा, जहां से वे चुनाव जीते थे.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से सत्तूर का स्वरूप शहरी और ग्रामीण मिश्रित है, जहां फैक्ट्री वर्कर्स, व्यापारी और किसान सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यहां की सामाजिक संरचना में नादर, नायडू, अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय शामिल हैं. राजनीति में मजदूर यूनियन, व्यापारिक संगठन और सामुदायिक संस्थाएं लोगों को संगठित करने और चुनावी माहौल बनाने में प्रभाव डालती हैं. चुनावी मुद्दे अक्सर रोजगार, मजदूर कल्याण और बुनियादी ढांचे के विकास के आसपास घूमते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र अर्ध-शुष्क मैदानों में स्थित है. सत्तूर प्रमुख सड़क और रेल मार्गों के किनारे बसा है, जो इसे मदुरै, विरुधुनगर और तूतीकोरिन से जोड़ते हैं. इस कारण यह शहर एक क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन केंद्र के रूप में कार्य करता है. इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में कपास, दालें और मूंगफली जैसी फसलें उगाई जाती हैं, जिससे कृषि भी स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. साथ ही, यहां के औद्योगिक क्लस्टर और छोटे कारखाने रोजगार और आय के प्रमुख स्रोत हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में सत्तूर शहर का केंद्र, जो व्यापार और प्रशासन का मुख्य केंद्र है, माचिस और छोटे उद्योगों के क्लस्टर, जहां स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है, बाजार और थोक व्यापार क्षेत्र, रिहायशी इलाके, जहां मजदूर और मध्यम वर्ग के परिवार रहते हैं, और सत्तूर के आसपास के ग्रामीण गांव, जो कृषि आधारित वोटिंग पैटर्न को प्रभावित करते हैं.
मुख्य समस्याओं में मजदूरों का कल्याण और रोजगार की स्थिरता, छोटे और मध्यम उद्योगों का विकास, पीने के पानी की व्यवस्था और भूजल प्रबंधन, सड़क और परिवहन ढांचे का सुधार, और आसपास के गांवों के लिए कृषि सहायता शामिल हैं.
मतदाताओं के रुझान की बात करें तो औद्योगिक मजदूर नौकरी की सुरक्षा, वेतन और श्रम सुरक्षा नीतियों को प्राथमिकता देते हैं. व्यापारी और उद्यमी व्यापारिक विकास और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर चाहते हैं. किसान सिंचाई सुविधाओं और फसलों के सही दाम पर जोर देते हैं, जबकि शहरी निवासी पानी, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद करते हैं. यहां के चुनाव आमतौर पर काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहां द्रविड़ पार्टियों के मजबूत जमीनी नेटवर्क चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं.
Ravichandhran, R.k.
ADMK
Rajavarman, M.s.r.
AMMKMNKZ
Pandi, K.
NTK
Bharathi, M.
IJK
Marikannan, G.
PT
Nota
NOTA
Saravanakumar, M.
IND
Subramanian, S.
IND
Angusamy, S.
AMPK
Senthur Pandian, R.
IND
Chellapandian, P.
IND
Ragu, B.
IND
Ramesh, A.
IND
Rajkumar, R.
MIDP
Jeyaganesh, K.
VTVTK
Balamurugan, K.
IND
Subburaman, P.
AIMGRMMK
Karuthapandian, S.
IND
Mariappan, M.
IND
Dhamodharan, S.
IND
Palanichamy, P.
BHUDRP
Gurusamy, P.
IND
Bala Subramanian, R.
IND
Prabakaran, J.
IND
Anthonyraj, A.
IND
Manoharan, V.
IND
Maheskumar, M
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.