JD(U)
RJD
JSP
IND
नोटा
NOTA
IND
AKBHJS
IND
PPI(D)
RJLP(S)
IND
TPP
Sandesh Vidhan Sabha Chunav Result: Radha Charan Sah ने संदेश विधानसभा सीट पर लहराया परचम
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Sandesh Assembly Election Result Live: JD(U) उम्मीदवार 80598 वोट पाकर सबसे आगे, कौन दूसरे नंबर पर? जानिए संदेश सीट का हाल
संदेश विधानसभा क्षेत्र बिहार के भोजपुर जिले में स्थित है और यह आरा लोकसभा सीट का एक हिस्सा है. इस विधानसभा क्षेत्र में संदेश प्रखंड के अलावा, उदवंतनगर प्रखंड और कोईलवर प्रखंड के 10 ग्राम पंचायत शामिल हैं.
संदेश पूरी तरह से एक ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र है, जहां 2020 के विधानसभा चुनावों में कुल 2,91,632 मतदाताओं में से केवल 4.66 प्रतिशत शहरी मतदाता थे. अनुसूचित जातियां यहां की एक बड़ी वोटिंग आबादी (16.15 प्रतिशत) हैं, जबकि मुस्लिम मतदाता लगभग 5 प्रतिशत हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या बढ़कर 2,94,047 हो गई है. बिहार के अधिकांश क्षेत्रों की तरह, यहां भी वोटिंग प्रतिशत लगातार गिरावट पर है. 2015 में 56.11 प्रतिशत, 2019 में 54.09 प्रतिशत और 2020 में मात्र 53.09 प्रतिशत मतदान हुआ.
सोन नदी, जो गंगा की एक सहायक नदी है, के किनारे बसे इस क्षेत्र की भूमि अत्यंत उपजाऊ है, जिससे कृषि यहां की मुख्य आजीविका है. संदेश के निकटवर्ती शहरों में जिला मुख्यालय आरा और राजधानी पटना शामिल हैं.
संदेश विधानसभा सीट की स्थापना 1957 में हुई थी और यह आरा संसदीय क्षेत्र के सात हिस्सों में से एक है. तब से अब तक यहां 17 बार विधायक चुने जा चुके हैं. यहां की राजनीति किसी एक पार्टी के प्रति वफादार नहीं रही है. कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने यहां चार-चार बार जीत दर्ज की है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके पूर्व रूप जनसंघ ने तीन बार जीत हासिल की है. भाकपा (माले), जो अब महागठबंधन का हिस्सा है, दो बार विजयी रही है. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, लोक दल और जनता दल ने एक-एक बार यह सीट जीती है. जदयू एकमात्र बड़ी पार्टी है जो अब तक यह सीट नहीं जीत सकी है, हालांकि उसने 2020 में भाजपा की जगह उम्मीदवार उतारा था लेकिन हार का सामना करना पड़ा.
दिलचस्प बात यह है कि राय और महतो उपनाम समेत यादव समुदाय की आबादी लगभग 10.5 प्रतिशत है, इस समिदाय ने अब तक आठ बार इस सीट पर जीत हासिल की है.
2010 का चुनाव संदेश की राजनीति में सबसे चर्चित रहा, जब दो यादव भाई आमने-सामने आए. दो बार के राजद विधायक विजेंद्र कुमार यादव को उनके छोटे भाई अरुण कुमार यादव ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनौती दी. इस संघर्ष में अरुण को 20.53 प्रतिशत वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे, जबकि विजेंद्र को 14.87 प्रतिशत वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर खिसक गए. अंततः भाजपा के संजय सिंह टाइगर 6,822 वोटों से जीत गए.
2015 में राजद ने विजेंद्र की जगह अरुण को टिकट दिया और यह दांव सफल रहा. अरुण ने भाजपा के संजय सिंह टाइगर को 25,527 वोटों से हराया. हालांकि बाद में अरुण कुमार यादव एक नाबालिग से बलात्कार के आरोप में चर्चा में आए. POCSO कोर्ट द्वारा समन के बावजूद अदालत में हाजिर न होने के चलते उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया. अंततः उन्होंने आत्मसमर्पण किया, गिरफ्तार हुए और 2019 में दोषी ठहराए गए. इसके चलते वे 2020 में चुनाव लड़ने के अयोग्य हो गए.
राजद ने उनकी जगह उनकी पत्नी किरण देवी यादव को टिकट दिया. उन्हें चुनौती देने के लिए जदयू ने विजेंद्र कुमार यादव को मैदान में उतारा, लेकिन वे एक बार फिर हार गए. किरण देवी यादव ने 50,607 वोटों के विशाल अंतर से जीत हासिल की.
इसके अलावा, राजद समर्थित भाकपा (माले) के उम्मीदवार ने संदेश विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के मुकाबले 20,604 वोटों की बढ़त बनाई, जो NDA के लिए एक और झटका साबित हुआ.
वर्तमान परिस्थितियों में राजद को 2025 के विधानसभा चुनावों में बढ़त मानी जा रही है. दूसरी ओर, NDA के सामने यह तय करना चुनौती है कि वह अपने गठबंधन में से किस पार्टी को टिकट दे. यदि वे फिर से विजेंद्र कुमार यादव पर दांव लगाते हैं, तो यह जीत की गारंटी नहीं होगी. उन्हें एक ऐसा मजबूत उम्मीदवार तलाशना होगा, जो विवादित अरुण कुमार यादव के स्थानीय प्रभाव को चुनौती दे सके, जो एक मुश्किल, यदि असंभव नहीं, तो अत्यंत कठिन कार्य है.
(अजय झा)
Vijayendra Yadav
JD(U)
Shweta Singh
LJP
Nota
NOTA
Shiv Shankar Prasad
RLSP
Baban Kumar
JAP(L)
Krishna Paswan
BKVP
Santosh Kumar Singh
RJJP
Manmohan Singh
RJLP(S)
Akhileshwar Tiwari
JSNP
Ramdev Singh
IND
Kamal Kumar Singh
VPI
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आरजेडी के दो विधायकों ने पार्टी से किनारा कर लिया है और विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है. दोनों विधायकों का इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है.
बिहार में चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव के वक्त बिहार आते हैं, मगर वादे पूरे नहीं करते. सहनी ने नीतीश कुमार को लेकर अमित शाह के बयान पर भी हमला बोला और एनडीए की मंशा पर सवाल खड़े किए.
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल्स को सट्टा बाजार का खेल बताया. उन्होंने कहा कि मतदान खत्म होने के आधे घंटे में सरकार तय कर देना केवल दिखावा है. यादव ने दावा किया कि सीमांचल में बदलाव होगा और इंडिया गठबंधन को 19 से 23 सीटें मिलेंगी. दिल्ली ब्लास्ट पर उन्होंने इंटेलिजेंस फेलियर बताया और जिम्मेदारों के इस्तीफे की मांग की.
दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग पासवान से जब एयरपोर्ट पर एनडीए से अलग होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, सच से इसका कोई संबंध नहीं है. चिराग ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, एनडीए में दरार की संभावना नहीं है. विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह झूठ फैलाकर भ्रम पैदा कर रहा है. वहीं उन्होंने इस दौरान सीट बंटवारे पर चर्चा न होने की बात भी स्पष्ट की.
अनंत सिंह इस बार मोकामा से चुनाव लड़ रहे हैं. शनिवार को वह चुनाव प्रचार के लिए एक गांव में पहुंचे थे. इस दौरान उनका मंच ही टूट गया. जिससे वह नीचे गिर गए.
शेखपुरा जिले में नामांकन के अंतिम दिन गहमागहमी रही. शेखपुरा विधानसभा से 13 और बरबीघा विधानसभा से 12 लोगों ने अपनी उम्मीदवारी दी है. बरबीघा विधानसभा के लिए एलजेपी से मधुकर कुमार ने नामांकन किया.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा मिलेगी. बिहार सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. इसी बीच नीतीश कुमार से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। 9 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर जाएंगे। 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया इसके साथ ही शुरू हो जाएगी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च के आंकड़े दिलचस्प कहानी सुना रहे हैं. चुनाव आयोग में जमा आंकड़ों पर नजर डालने पर मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किए, और सबसे कम मार्क्सवादी कम्यनिस्ट पार्टी ने - लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सबसे महंगा विधायक किसे पड़ा है?
बिहार विधानसभा चुनाव की गूंज यूपी की सियासी जमीन पर भी सुनाई पड़ रही है. इसकी वजह यह है कि सीएम योगी आदित्यनाथ बिहार में एनडीए को जिताने के लिए मशक्कत कर रहे थे तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महागठबंधन के लिए पूरी ताकत झोंक दी. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार का यूपी कनेक्शन क्या है?
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में एक दिलचस्प पैटर्न सामने आया है. जहां सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीती गई पांचों सीटें NDA के खाते में गईं, वहीं बेहद कम मार्जिन वाली सीटों पर अलग-अलग दलों की जीत दर्ज हुई. चुनावी आंकड़े बताते हैं कि भारी अंतर वाली सीटों पर NDA का दबदबा स्पष्ट दिखा जबकि कम अंतर वाली सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा.