JD(U)
RJD
JSP
BSP
IND
AAP
नोटा
NOTA
IND
SBSP
BRD
RSJSP
Hathua Election Results 2025 Live: हथुआ विधानसभा सीट पर JD(U) ने फहराया परचम, जानें प्रत्याशी Ramsewak Singh को मिली कितनी बड़ी जीत
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हथुआ विधानसभा क्षेत्र बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित एक सामान्य श्रेणी का निर्वाचन क्षेत्र है, जो गोपालगंज (अनुसूचित जाति) लोकसभा सीट का हिस्सा है. इस क्षेत्र में हथुआ और फुलवरिया प्रखंडों के साथ-साथ उच्चकागांव ब्लॉक के जमसर, त्रिलोकपुर, मोहैचा, बलेसरा ग्राम पंचायतें और मीरगंज नगर पंचायत शामिल हैं.
यह इलाका पश्चिमी गंगा के मैदानों में स्थित है, जहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी धान, गेहूं, मक्का और गन्ने जैसी फसलों की अच्छी पैदावार देती है. क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है, जिसे डेयरी और छोटे स्तर के व्यापार का भी सहयोग मिलता है. भूमिहीन और सीमांत किसानों के बीच मौसमी प्रवासन एक आम प्रवृत्ति बनी हुई है. हाल के वर्षों में सड़क संपर्क जैसे बुनियादी ढांचे में कुछ सुधार देखने को मिला है.
हथुआ, जिला मुख्यालय गोपालगंज से लगभग 20 किमी दक्षिण में स्थित है. इसके पूर्व में मीरगंज, दक्षिण-पश्चिम में सिवान (लगभग 35 किमी) और छपरा (लगभग 86 किमी) स्थित हैं. राज्य की राजधानी पटना से यह क्षेत्र करीब 165 किमी दूर है. उत्तर प्रदेश के नजदीकी शहरों में देवरिया (60 किमी) और बलिया (90 किमी) शामिल हैं. क्षेत्र में सड़क मार्ग की अच्छी सुविधा है, वहीं रेल संपर्क सिवान-गोपालगंज रेल लाइन पर स्थित हथुआ और मीरगंज स्टेशनों से उपलब्ध है.
इस विधानसभा क्षेत्र में फुलवरिया गांव भी आता है, जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव का पैतृक गांव है. हालांकि इस प्रतीकात्मक महत्व के बावजूद, राजद को लालू यादव के गृहक्षेत्र में दो बार हार का सामना करना पड़ा, और पहली जीत 2020 में मिली. इसके अलावा, 2008 में क्षेत्र के गठन के बाद से लोकसभा चुनावों में राजद यहां लगातार पिछड़ता रहा है.
विधानसभा क्षेत्र के गठन के बाद से यहां अब तक तीन बार चुनाव हो चुके हैं. 2010 और 2015 में जनता दल (यूनाइटेड) ने यह सीट जीती, जबकि 2020 में राजद ने पहली बार जीत दर्ज की. 2020 में राजद के राजेश कुमार सिंह ने जदयू के रामसेवक सिंह को 30,527 मतों के अंतर से हराया. राजेश को 86,731 वोट (49.84%) मिले जबकि रामसेवक को 56,204 वोट (32.29%) मिले थे. लोजपा उम्मीदवार को 9,894 वोट (5.69%) मिले, लेकिन परिणाम पर उसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा.
2020 के चुनावों में हथुआ में कुल 3,04,045 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें से अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 38,675 (12.72%), अनुसूचित जनजाति के 9,912 (3.26%) और मुस्लिम मतदाता 51,991 (17.1%) थे. कुल मतदान प्रतिशत 57.59 रहा.
2024 के लोकसभा चुनाव तक यह मतदाता संख्या बढ़कर 3,20,877 हो गई, जबकि निर्वाचन आयोग के अनुसार 2020 के मतदाता सूची में दर्ज 4,420 मतदाता क्षेत्र से पलायन कर चुके थे.
2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू के डॉ. आलोक कुमार सुमन ने हथुआ विधानसभा क्षेत्र में वीआईपी पार्टी के चंचल पासवान को 25,119 वोटों से हराकर बढ़त बनाई. इस जीत ने क्षेत्र में एनडीए के हौसले को बल दिया है, हालांकि राजद अभी भी विधानसभा सीट पर काबिज है.
जैसे-जैसे 2025 का विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, हथुआ में जातीय समीकरण, गठबंधन की रणनीति और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता चुनावी नतीजों को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. राजद जहां 2020 की जीत को बरकरार रखने की कोशिश करेगा, वहीं जदयू 2024 में मिली बढ़त के बल पर खोई हुई जमीन वापस पाने की रणनीति में जुटेगा.
(अजय झा)
Ramsewak Singh
JD(U)
Ram Darshan Prasad
LJP
Nota
NOTA
Shreeram Bhagat
IND
Surendra Ram S/o Kanhaiya Ram
BSP
Surendra Gupta
IND
Dr. Shashi Bhushan Rai
IND
Maksudan Prasad Singh
IND
Raj Kumar Srivastav
IND
Sabib Alam
NCP
Surendra Ram
BRD
Mohammad Mustafa
BMP
Abhinandan Pathak
VSP
Kashinath Singh
JNP
Indrajit Gupt Jyotishkar
RJJM
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आरजेडी के दो विधायकों ने पार्टी से किनारा कर लिया है और विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है. दोनों विधायकों का इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है.
बिहार में चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव के वक्त बिहार आते हैं, मगर वादे पूरे नहीं करते. सहनी ने नीतीश कुमार को लेकर अमित शाह के बयान पर भी हमला बोला और एनडीए की मंशा पर सवाल खड़े किए.
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल्स को सट्टा बाजार का खेल बताया. उन्होंने कहा कि मतदान खत्म होने के आधे घंटे में सरकार तय कर देना केवल दिखावा है. यादव ने दावा किया कि सीमांचल में बदलाव होगा और इंडिया गठबंधन को 19 से 23 सीटें मिलेंगी. दिल्ली ब्लास्ट पर उन्होंने इंटेलिजेंस फेलियर बताया और जिम्मेदारों के इस्तीफे की मांग की.
दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग पासवान से जब एयरपोर्ट पर एनडीए से अलग होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, सच से इसका कोई संबंध नहीं है. चिराग ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, एनडीए में दरार की संभावना नहीं है. विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह झूठ फैलाकर भ्रम पैदा कर रहा है. वहीं उन्होंने इस दौरान सीट बंटवारे पर चर्चा न होने की बात भी स्पष्ट की.
अनंत सिंह इस बार मोकामा से चुनाव लड़ रहे हैं. शनिवार को वह चुनाव प्रचार के लिए एक गांव में पहुंचे थे. इस दौरान उनका मंच ही टूट गया. जिससे वह नीचे गिर गए.
शेखपुरा जिले में नामांकन के अंतिम दिन गहमागहमी रही. शेखपुरा विधानसभा से 13 और बरबीघा विधानसभा से 12 लोगों ने अपनी उम्मीदवारी दी है. बरबीघा विधानसभा के लिए एलजेपी से मधुकर कुमार ने नामांकन किया.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा मिलेगी. बिहार सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. इसी बीच नीतीश कुमार से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। 9 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर जाएंगे। 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया इसके साथ ही शुरू हो जाएगी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च के आंकड़े दिलचस्प कहानी सुना रहे हैं. चुनाव आयोग में जमा आंकड़ों पर नजर डालने पर मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किए, और सबसे कम मार्क्सवादी कम्यनिस्ट पार्टी ने - लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सबसे महंगा विधायक किसे पड़ा है?
बिहार विधानसभा चुनाव की गूंज यूपी की सियासी जमीन पर भी सुनाई पड़ रही है. इसकी वजह यह है कि सीएम योगी आदित्यनाथ बिहार में एनडीए को जिताने के लिए मशक्कत कर रहे थे तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महागठबंधन के लिए पूरी ताकत झोंक दी. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार का यूपी कनेक्शन क्या है?
इंडिया टुडे ने चुनाव आयोग के डेटा की गहराई से जांच की और पाया कि SIR और चुनाव नतीजों के बीच कोई सीधा या समझ में आने वाला पैटर्न दिखता ही नहीं. हर बार जब एक ट्रेंड बनता लगता है, तुरंत ही एक दूसरा आंकड़ा उसे तोड़ देता है. बिहार चुनाव में NDA ने 83% सीटें जीतीं, पर SIR से जुड़े नतीजे अलग कहानी कहते हैं.