LJPRV
CPI(ML)(L)
JSP
नोटा
NOTA
SBSP
BSP
IND
Darauli (SC) Vidhan Sabha Results Live: बिहार की दरौली (एससी) विधानसभा सीट पर LJPRV का दबदबा, CPI(ML)(L) को हराया
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Darauli (SC) Chunav Results Live: दरौली (एससी) सीट पर LJPRV का वर्चस्व, 9572 वोटों के विशाल अंतर से CPI(ML)(L) को पछाड़ा
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दरौली, बिहार के सिवान जिले में स्थित एक अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है. यह सीट दरौली, गुठनी और अंदर प्रखंडों को शामिल करती है और जिले के पश्चिमी सिरे पर, उत्तर प्रदेश की सीमा के निकट स्थित है. यह इलाका घाघरा बेसिन के उपजाऊ मैदानों में आता है, जहां कृषि मुख्य जीविका का साधन है. धान, गेहूं और मौसमी सब्जियों की खेती यहां व्यापक रूप से होती है. इसके अलावा, बहुत से घर ऐसे हैं जो अपने परिजनों द्वारा अन्य राज्यों से भेजी गई कमाई (रेमिटेंस) पर निर्भर हैं.
दरौली की कनेक्टिविटी भी उल्लेखनीय है. यह सिवान शहर से लगभग 30 किमी पूर्व में और उत्तर प्रदेश के बलिया से लगभग 40 किमी पश्चिम में स्थित है. छपरा यहां से करीब 70 किमी दक्षिण-पूर्व में है, जबकि राज्य की राजधानी पटना लगभग 150 किमी दूर है.
दरौली विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1951 में सामान्य सीट के रूप में हुई थी, लेकिन 2008 के परिसीमन के बाद इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घोषित किया गया. अब तक यहां कुल 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 2020 का चुनाव भी शामिल है.
राजनीतिक रूप से, दरौली पर वामपंथी ताकतों का खासा प्रभाव रहा है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन) यानी CPI(ML)(L) ने इस सीट से पांच बार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस ने चार बार जीत हासिल की है. भारतीय जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मिलकर तीन बार जीत दर्ज की है. इसके अलावा जनता पार्टी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, लोकदल, जनता दल और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी एक-एक बार इस सीट पर कब्जा जमाया है.
1995 से वामपंथी दल CPI(ML)(L) ने इस क्षेत्र में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है और 2015 व 2020 में लगातार जीत हासिल की है. 2010 में जब यह सीट आरक्षित हुई, तब भी पार्टी का प्रभाव बरकरार रहा.
दरौली अब वाम और दक्षिणपंथी ताकतों के बीच एक कड़ा मुकाबला बन चुका है. 2010 में भाजपा के रामायण मांझी ने CPI(ML)(L) को 7,006 वोटों से हराया था. इसके बाद 2015 और 2020 में सत्यदेव राम ने CPI(ML)(L) के प्रत्याशी के तौर पर क्रमशः 9,584 और 12,119 वोटों से जीत हासिल की. हालांकि ये अंतर पार्टी की मजबूती तो दर्शाते हैं, लेकिन वर्चस्व की स्थिति नहीं बनाते. भाजपा अब भी एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनी हुई है.
2024 के लोकसभा चुनाव में, जदयू ने दरौली विधानसभा क्षेत्र में बढ़त हासिल की, जिससे एनडीए को आगामी 2025 के विधानसभा चुनाव में नई उम्मीद मिली है.
2020 के विधानसभा चुनाव में दरौली में कुल 3,20,063 पंजीकृत मतदाता थे, जिसमें से 50.18% ने मतदान किया. इनमें अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 46,377 (14.49%), अनुसूचित जनजाति के मतदाता 14,531 (4.54%), और मुस्लिम मतदाता करीब 20,484 (6.4%) थे. यह क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण है- यहां कोई भी शहरी मतदाता नहीं है.
2024 के आम चुनाव तक मतदाता संख्या बढ़कर 3,23,945 हो गई, लेकिन चुनाव आयोग के अनुसार, 2020 की मतदाता सूची के 3,431 मतदाता बाहर प्रवास कर चुके थे.
2020 के चुनाव में आधे से ज्यादा मतदाता मतदान से दूर रहे. ऐसे में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे इन गैर-हाजिर मतदाताओं को 2025 में मतदान केंद्र तक लाएं. यदि ऐसा हुआ, तो CPI(ML)(L) के लिए यह दशक की सबसे कठिन चुनावी लड़ाई साबित हो सकती है, जहां राजद के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन में वह एक प्रमुख दल के रूप में चुनाव लड़ेगी.
दरौली का आगामी विधानसभा चुनाव न केवल वाम और दक्षिणपंथ के बीच टकराव को दिखाएगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि बिहार की ग्रामीण राजनीति में किसका वर्चस्व आगे रहेगा.
(अजय झा)
Ramayan Manjhi
BJP
Nota
NOTA
Sheo Kumar Manjhi
IND
Kumar Shashi Ranjan
PP
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आरजेडी के दो विधायकों ने पार्टी से किनारा कर लिया है और विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है. दोनों विधायकों का इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है.
बिहार में चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव के वक्त बिहार आते हैं, मगर वादे पूरे नहीं करते. सहनी ने नीतीश कुमार को लेकर अमित शाह के बयान पर भी हमला बोला और एनडीए की मंशा पर सवाल खड़े किए.
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल्स को सट्टा बाजार का खेल बताया. उन्होंने कहा कि मतदान खत्म होने के आधे घंटे में सरकार तय कर देना केवल दिखावा है. यादव ने दावा किया कि सीमांचल में बदलाव होगा और इंडिया गठबंधन को 19 से 23 सीटें मिलेंगी. दिल्ली ब्लास्ट पर उन्होंने इंटेलिजेंस फेलियर बताया और जिम्मेदारों के इस्तीफे की मांग की.
दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग पासवान से जब एयरपोर्ट पर एनडीए से अलग होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, सच से इसका कोई संबंध नहीं है. चिराग ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, एनडीए में दरार की संभावना नहीं है. विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह झूठ फैलाकर भ्रम पैदा कर रहा है. वहीं उन्होंने इस दौरान सीट बंटवारे पर चर्चा न होने की बात भी स्पष्ट की.
अनंत सिंह इस बार मोकामा से चुनाव लड़ रहे हैं. शनिवार को वह चुनाव प्रचार के लिए एक गांव में पहुंचे थे. इस दौरान उनका मंच ही टूट गया. जिससे वह नीचे गिर गए.
शेखपुरा जिले में नामांकन के अंतिम दिन गहमागहमी रही. शेखपुरा विधानसभा से 13 और बरबीघा विधानसभा से 12 लोगों ने अपनी उम्मीदवारी दी है. बरबीघा विधानसभा के लिए एलजेपी से मधुकर कुमार ने नामांकन किया.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा मिलेगी. बिहार सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. इसी बीच नीतीश कुमार से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। 9 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर जाएंगे। 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया इसके साथ ही शुरू हो जाएगी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च के आंकड़े दिलचस्प कहानी सुना रहे हैं. चुनाव आयोग में जमा आंकड़ों पर नजर डालने पर मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किए, और सबसे कम मार्क्सवादी कम्यनिस्ट पार्टी ने - लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सबसे महंगा विधायक किसे पड़ा है?
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