पनरुति विधानसभा क्षेत्र (संख्या 154) तमिलनाडु के कडलूर जिले के पश्चिमी हिस्से में स्थित है और इसका केंद्र पनरुति शहर है, जो उत्तरी तमिलनाडु का एक प्रसिद्ध कृषि व्यापारिक केंद्र माना जाता है. यह क्षेत्र अर्ध-शहरी बाजार कस्बों और बड़े ग्रामीण इलाकों का मिश्रण है, जहां ज्यादातर गांव खेती पर आधारित हैं. पनरुति खास तौर पर कटहल और काजू के उत्पादन के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां की अर्थव्यवस्था में कृषि और उससे जुड़ा व्यापार बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यहां के मतदाताओं में मुख्य रूप से किसान, खेतिहर मजदूर, व्यापारी, छोटे कारोबारी और कृषि प्रसंस्करण उद्योगों से जुड़े लोग शामिल हैं. इसके अलावा पनरुति की नजदीकी कडलूर, नेयवेली और विलुप्पुरम जैसे शहरों से होने के कारण यहां रोजगार और व्यापार पर भी इन शहरों का प्रभाव पड़ता है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण और अर्ध-शहरी मतदाताओं वाला है, जहां कृषि और व्यापार से जुड़े समुदायों का प्रभाव मजबूत है. यहां मुख्य राजनीतिक मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच होता है, जबकि पट्टाली मक्कल काची (PMK) का भी प्रभाव है, खासकर बड़ी वन्नियार आबादी के कारण. सामाजिक संरचना में वन्नियार, अनुसूचित जाति, मुदलियार, व्यापारी वर्ग और अन्य कृषि समुदाय शामिल हैं. यहां किसानों के संगठन, व्यापारियों के यूनियन और स्थानीय जातीय नेटवर्क चुनावों में लोगों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. चुनाव प्रचार के दौरान आमतौर पर कृषि विकास, बाजार सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण कल्याण जैसे मुद्दों पर जोर दिया जाता है.
भौगोलिक और कनेक्टिविटी के लिहाज से यह क्षेत्र उत्तरी तमिलनाडु में कडलूर और विलुप्पुरम के बीच स्थित है. यह सड़क और रेलवे नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे क्षेत्र का संपर्क आसपास के प्रमुख शहरों से बना रहता है. यहां की भूमि उपजाऊ है, जिसमें खेती योग्य खेत, बाग-बगीचे और ग्रामीण गांवों के समूह शामिल हैं. काजू प्रोसेसिंग यूनिट्स और कृषि बाजार स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में पनरुति शहर का केंद्र शामिल है, जो कृषि व्यापार और व्यावसायिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र है. इसके अलावा काजू और कटहल की खेती वाले गांव, साप्ताहिक कृषि बाजार जहां किसान और व्यापारी बड़ी संख्या में आते हैं, ग्रामीण पंचायतों के समूह जहां समुदाय आधारित वोटिंग पैटर्न मजबूत होता है, और पनरुति को कडलूर और विलुप्पुरम से जोड़ने वाले प्रमुख परिवहन मार्ग भी महत्वपूर्ण हैं.
मुख्य समस्याओं और विकास के मुद्दों की बात करें तो किसानों के लिए फसलों के दाम स्थिर रखना और खासकर काजू व कटहल किसानों को समर्थन देना एक बड़ा मुद्दा है. इसके साथ ही सिंचाई और जल प्रबंधन, ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे का विकास, कृषि बाजारों और भंडारण सुविधाओं का विस्तार, और युवाओं व छोटे व्यापारियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना भी प्रमुख चिंताएं हैं.
मतदाताओं के मूड की बात करें तो किसान फसलों के उचित दाम और सिंचाई सुविधाओं को प्राथमिकता देते हैं, जबकि खेत मजदूर रोजगार और सरकारी योजनाओं पर ध्यान देते हैं. व्यापारी बाजार सुविधाओं और परिवहन व्यवस्था के सुधार की मांग करते हैं. ग्रामीण परिवारों के लिए आवास योजनाएं, पीने का पानी और स्थानीय विकास महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. यहां चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहां जातीय समीकरण और राजनीतिक गठबंधन चुनाव परिणामों को काफी प्रभावित करते हैं.
Rajendran.r
ADMK
Subhashini.r
NTK
Sivakozhundu.p
DMDK
Jaylani
MNM
Nota
NOTA
Velmurugan.k
IND
Arulkumar.r
IND
Velmurugan.r
IND
Prakash.r
IND
Sumathi.v
IND
Kamadevan.s
IND
Krishnaraj.s
IND
Kumar.d
IND
Nagamani.m
IND
Govindasamy.s
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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