तिरुवन्नामलाई विधानसभा क्षेत्र (संख्या 63), एक बेहद चर्चित, धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक सीट मानी जाती है. यह क्षेत्र विश्वप्रसिद्ध अरुणाचलेश्वर मंदिर के इर्द-गिर्द विकसित हुआ है, जो पंचभूत स्थलों में से “अग्नि” तत्व का प्रतिनिधित्व करता है. इस कारण यह सीट सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक पहचान भी रखती है और हमेशा सार्वजनिक व मीडिया की नजर में रहती है. यहां की राजनीति तीर्थयात्रा आधारित अर्थव्यवस्था, शहरी सेवाओं की गुणवत्ता, बड़े पैमाने पर भीड़ प्रबंधन और ग्रामीण-शहरी संतुलन से प्रभावित होती है. तिरुवन्नामलाई विश्व स्तर पर प्रसिद्ध संत-दार्शनिक श्री रमण महर्षि और उनके आश्रम के कारण भी जाना जाता है, जिससे इस क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान और मजबूत होती है.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यहां का मतदाता वर्ग विविध है. इसमें मंदिर से जुड़े व्यापारी और सेवा प्रदाता, शहरी मध्यमवर्गीय परिवार, बाहरी इलाकों के ग्रामीण किसान, ओबीसी, एमबीसी और एससी समुदाय, तथा छोटी लेकिन सक्रिय अल्पसंख्यक आबादी शामिल है. यहां जनमत को प्रभावित करने वालों में मंदिर व्यापार संघ, आध्यात्मिक संगठन, परिवहन यूनियन, नगर पालिका वार्ड प्रतिनिधि और बाहरी पंचायतों के प्रमुख शामिल हैं. यहां मतदान का व्यवहार व्यक्ति की छवि और प्रशासनिक क्षमता पर आधारित होता है, मतदाता शांत, भरोसेमंद और काम करने वाले नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र तिरुवन्नामलाई जिले के केंद्र में स्थित है और चेन्नई, वेल्लोर, विलुप्पुरम और कृष्णागिरि से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है. यहां कोई बड़ा रेलवे जंक्शन नहीं है, इसलिए सड़क परिवहन ही मुख्य साधन है. खासकर पूर्णिमा (पौर्णमी) की रातों और करिथिगई दीपम जैसे बड़े धार्मिक अवसरों पर तथा गिरिवलम के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश से आने वाले भक्त भी शामिल होते हैं. इससे ट्रैफिक जाम, पार्किंग, सफाई व्यवस्था और पुलिस प्रबंधन पर काफी दबाव पड़ता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख हिस्सों में अरुणाचलेश्वर मंदिर का मुख्य नगर क्षेत्र और गिरिवलम पथ, रमणाश्रम और सिद्धरों की समाधियां, पहाड़ी गुफाएं, व्यापारिक सड़कें और धर्मशालाएं, शहरी आवासीय वार्ड, अर्ध-शहरी गांवों के समूह और बाहरी ग्रामीण पंचायतें शामिल हैं. हर क्षेत्र की प्राथमिकताएं अलग हैं, कुछ आस्था आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं, तो कुछ नागरिक सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की निरंतरता पर.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में पीने के पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता, मंदिर में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा, पूर्णिमा की रातों में गिरिवलम प्रबंधन, ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या, कचरा प्रबंधन, जल निकासी और बरसात के समय जलभराव, तथा तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या के कारण सरकारी अस्पतालों पर पड़ने वाला दबाव शामिल है.
मतदाताओं का मूड भी वर्ग के अनुसार अलग है. व्यापारी और सेवा प्रदाता चाहते हैं कि तीर्थयात्रियों का आवागमन सुचारु और सुरक्षित रहे. स्थानीय निवासी साफ-सफाई, पानी और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देते हैं. महिला मतदाता स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को अहम मानती हैं. युवा वर्ग पर्यटन से जुड़े कौशल और रोजगार अवसर चाहता है, जबकि ग्रामीण मतदाता सड़कों और सरकारी कल्याण योजनाओं की निरंतरता को महत्व देते हैं. कुल मिलाकर यहां के मतदाता शांत, दृश्यमान और सक्षम प्रशासन को पुरस्कृत करते हैं, खासकर उन दिनों में जब आंध्र प्रदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और पूर्णिमा व गिरिवलम के अवसर पर व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है.
S Thanigaivel
BJP
J Kamalakkannan
NTK
Arul R
MNM
Nota
NOTA
A G Panchatcharam
AMMKMNKZ
J Jameel Basha
IND
J Agni Selvarasu
NADLMMKLK
Kothandapani.b
BSP
K Vinayagam
IND
R G Vasudevan
IND
N Palani
IND
D Manimaran
IND
A Nakkeeran
IND
S K Selvam
VTVTK
R Chandrakanth Pillai
NGPP
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.