तिरुप्पत्तूर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 50), जो तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के उत्तरी हिस्से में स्थित है, मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों, छोटे बाजार कस्बों और कृषि आधारित बस्तियों से मिलकर बना है. यह क्षेत्र चेट्टिनाड सांस्कृतिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है और पास के कराईकुडी के व्यापारिक और सांस्कृतिक प्रभाव से प्रभावित है. यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खेती, छोटे व्यापार, परिवहन सेवाएं और बाहर काम करने वाले लोगों से आने वाली आमदनी है. यहां के मतदाता मुख्य रूप से किसान, व्यापारी, कृषि मजदूर और छोटे व्यवसाय करने वाले लोग हैं.
यह क्षेत्र सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी खास है, जहां ग्रामीण आबादी ज्यादा है और समाज में थेवर, अनुसूचित जाति, नागरथार (चेट्टियार) व्यापारी समुदाय और अन्य ओबीसी समूह शामिल हैं. यहां चुनावों में जातीय समीकरण, स्थानीय नेताओं का प्रभाव और समुदाय के नेटवर्क काफी अहम भूमिका निभाते हैं. चुनाव के समय ग्रामीण विकास, सरकारी योजनाएं और कल्याणकारी कार्यक्रम सबसे बड़े मुद्दे रहते हैं.
भौगोलिक रूप से यह इलाका अर्ध-शुष्क मैदानों में आता है और सड़कों के जरिए कराईकुडी, मदुरै और आसपास के शहरों से जुड़ा हुआ है. यहां की जमीन पर धान, दालें और मूंगफली जैसी फसलें उगाई जाती हैं. कई गांवों में तालाब (टैंक) आधारित सिंचाई प्रणाली खेती को सहारा देती है. वहीं, चेट्टिनाड क्षेत्र की संस्कृति यहां के पास के कस्बों के व्यापार और भवन शैली (architecture) में भी देखने को मिलती है।
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में तिरुप्पत्तूर शहर का केंद्र, जो प्रशासन और बाजार का मुख्य हब है, कृषि प्रधान गांव, कराईकुडी के पास के चेट्टिनाड प्रभाव वाले कस्बे, साप्ताहिक बाजार जहां किसान और व्यापारी लेन-देन करते हैं, और पंचायत स्तर के गांव शामिल हैं जो जमीनी राजनीति को प्रभावित करते हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां सिंचाई और पानी प्रबंधन, गांवों की सड़क और बुनियादी ढांचे का विकास, सरकारी योजनाओं का लाभ, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और स्थानीय बाजारों का विकास सबसे अहम हैं.
मतदाताओं का रुझान भी अलग-अलग वर्गों के हिसाब से दिखता है, किसान सिंचाई और फसलों के दाम को लेकर चिंतित रहते हैं, ग्रामीण परिवार सरकारी योजनाओं और आवास योजनाओं पर ध्यान देते हैं, व्यापारी बाजार और परिवहन सुविधाओं को महत्व देते हैं, और युवा रोजगार व शिक्षा के अवसर चाहते हैं. यहां चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं और जातीय समीकरण व राजनीतिक गठबंधन नतीजों को काफी प्रभावित करते हैं.
T.k. Raja
PMK
M. Sumathi
NTK
A. Gnanasekar
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
B. Vijayakumar
IND
S. Kalashthri
AIUUK
S. Sathiyamoorthy
MNK
R. Arockia Joe Prabu
IND
R. Palani
IND
M. Nallasivam
IND
Manithan
IND
I. Govindaraji
IND
I. Roselin Jeeva
SMKNK
G. Raja
IND
A. Jeyamma
AMPK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.