कल्लाकुरिची, विधानसभा क्षेत्र (संख्या 80), एक ऐसा क्षेत्र है जो सीधे प्रशासन से जुड़ा हुआ और पूरी तरह कार्य पर आधारित सीट माना जाता है. यहां के मतदाता रोजाना जिला कलेक्टर कार्यालय, सरकारी अस्पतालों, अदालतों, बाजारों और विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं से जुड़े रहते हैं. इसलिए यहां की राजनीति विचारधारा पर नहीं, बल्कि इस बात पर तय होती है कि शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी होता है, प्रशासन पर किसका प्रभाव है, और जनता के बीच किसकी लगातार मौजूदगी दिखती है. यह एक ऐसी सीट है जहां मतदाता उसी विधायक (MLA) को पसंद करते हैं जो जिले का “समस्या समाधानकर्ता” बनकर काम करे और हर छोटी-बड़ी परेशानी में हस्तक्षेप करे. जून 2024 की कुख्यात जहरीली शराब (हूच) त्रासदी, जिसमें 65 से अधिक लोगों की मौत हुई और लगभग 200 लोग अस्पताल में भर्ती हुए, आज भी कल्लाकुरिची के मतदाताओं की यादों में एक काले साये की तरह मौजूद है और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करती है.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यहां का मतदाता समूह विविध है. वन्नियार (MBC) समुदाय संख्या में मजबूत है, खासकर शहर के बाहरी इलाकों और गांवों में. अनुसूचित जाति (SC) समुदाय की भी शहरी वार्डों और पंचायतों में काफी महत्वपूर्ण उपस्थिति है. इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के व्यापारी, चावल मिल और गोदाम संचालक, सरकारी कर्मचारी और ठेका कर्मचारी, शहरी गरीब और दिहाड़ी मजदूर, छात्र और पहली पीढ़ी के कॉलेज जाने वाले युवा भी यहां की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से यह जिला मुख्यालय होने के कारण यहां रोज भारी आवाजाही रहती है. बस स्टैंड और क्षेत्रीय परिवहन केंद्र इसे एक महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु बनाते हैं. शहर का फैलाव अर्ध-शहरी रूप में बढ़ रहा है, लेकिन ड्रेनेज की समस्या गंभीर है. बरसात के मौसम में निचले इलाकों के वार्डों में जलभराव हो जाता है. दूसरी ओर, बाहरी और ग्रामीण गांव खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं. इस तरह “शहरी असुविधा और ग्रामीण उपेक्षा” मिलकर यहां के मतदाताओं के व्यवहार को बदलने वाला (स्विंग) बना देती है.
चुनावी दृष्टि से कई अहम मतदान क्षेत्र हैं. गोमुखी डैम का क्षेत्र, तिरुनारुंगोंडई में पार्श्वनाथ और चंद्रप्रभु को समर्पित मंदिर, कल्लाकुरिची शहर के मुख्य वार्ड, शहरी अनुसूचित जाति बस्तियां, बाजार और बस स्टैंड के आसपास का इलाका, सरकारी कार्यालयों के समूह वाले क्षेत्र, शहर की सीमा से लगे गांव और अंदरूनी ग्रामीण पंचायतें हैं. इन सभी क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार की शिकायतें और समस्याएं हैं, और हर क्लस्टर अपने अलग मुद्दों के आधार पर वोट करता है.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में जल निकासी और बाढ़ की समस्या, पीने के पानी की आपूर्ति, सरकारी अस्पतालों की क्षमता और गुणवत्ता, पेंशन, आवास और राशन जैसी कल्याण योजनाओं में देरी, पट्टा और भूमि दस्तावेजों से जुड़ी समस्याएं, युवाओं में बेरोजगारी, तथा शहर की सड़कों और ट्रैफिक की दिक्कतें शामिल हैं.
यहां का मतदाता मूड साफ है. विधायक को लगभग रोज शहर में उपलब्ध रहना चाहिए. राजस्व, पुलिस और अस्पताल से जुड़े मामलों में तुरंत हस्तक्षेप अपेक्षित है. नियमित शिकायत निवारण शिविर आयोजित करना जरूरी है. बाढ़, विरोध-प्रदर्शन या सार्वजनिक सेवाओं में बाधा जैसी स्थिति में विधायक की सक्रिय और दिखाई देने वाली मौजूदगी ही यहां राजनीतिक सफलता की कुंजी मानी जाती है.
Manirathinem.k.i
INC
Dravidamuthamilselvi.d
NTK
Vijayakumar.n
DMDK
Nota
NOTA
Devimangayarkarasi.k
IND
Palanisamy.a
BSP
Prabu.c
IND
Ayyasamy.m
IJK
Suriyaprakash.m
IND
Selvaraj.m
IND
Subramaniyan.p
IND
Dinesh.m
MIDP
Elaiyaperumal.k
IND
Kuppusamy.k
AMGRDMK
Sivakumar.s
IND
Gurusamy.m
IND
Oviyar Ananth C
LJP
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.