शोलिंगहुर रानीपेट जिले का एक धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण, कृषि आधारित और अर्ध-शहरी विधानसभा क्षेत्र है, जिसका विधानसभा क्षेत्र संख्या 39 है. यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर पेरिया मलाई पर स्थित योग नरसिंह स्वामी मंदिर और पास की छोटी पहाड़ी चिन्ना मलाई पर स्थित योग अंजनेय स्वामी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. ये दोनों मंदिर दिव्य देशम माने जाते हैं, जिनकी वजह से शोलिंगहुर को एक मजबूत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान मिली है. हालांकि, रोजमर्रा की राजनीति यहां धर्म से ज्यादा खेती, पानी की उपलब्धता, बुनियादी सुविधाओं और रोजगार जैसे मुद्दों से प्रभावित होती है.
धार्मिक महत्व होने के बावजूद, शोलिंगहुर के मतदाता काफी व्यावहारिक सोच रखते हैं. यहां के लोग प्रतीकों या धार्मिक पहचान से ज्यादा अच्छे प्रशासन, विकास कार्यों और जनसेवा को प्राथमिकता देते हैं. वोट डालते समय यह देखा जाता है कि नेता जमीन पर कितना काम करता है और आम समस्याओं का समाधान कितनी गंभीरता से करता है.
राजनीतिक और सामाजिक चरित्र की बात करें तो शोलिंगहुर में गांव और कस्बे का संतुलित स्वरूप देखने को मिलता है. शहर के आसपास कई ऐसे गांव हैं जो पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं. ग्रामीण इलाकों में जाति और समुदाय की भूमिका जरूर होती है, लेकिन चुनावों में निर्णायक भूमिका अक्सर स्थानीय विधायक का प्रदर्शन, उनकी उपलब्धता और बुनियादी समस्याओं को सुलझाने की क्षमता निभाती है. मंदिर पर्यटन से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को लाभ तो मिलता है, लेकिन इसका फायदा हर इलाके तक समान रूप से नहीं पहुंच पाता, जिससे सड़कों, साफ-सफाई और स्थानीय रोजगार की मांग लगातार उठती रहती है.
भौगोलिक स्थिति और कनेक्टिविटी के लिहाज से शोलिंगहुर वेल्लोर-तिरुत्तनी-अरक्कोनम मार्ग पर स्थित है. यहां से रानीपेट, आर्कोट और अरक्कोनम के लिए सड़क संपर्क मौजूद है. मुख्य सड़कें ठीक-ठाक हालत में हैं, लेकिन गांवों के अंदरूनी रास्ते, बसों की संख्या और आखिरी छोर तक पहुंचने वाली सुविधाएं कमजोर हैं. यह क्षेत्र पानी की भारी कमी से जूझ रहा है और टैंक, बोरवेल तथा मानसून पर बहुत अधिक निर्भर है. इसी कारण पानी का प्रबंधन यहां की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है.
संवेदनशील या महत्वपूर्ण क्षेत्र (हॉटस्पॉट्स) में मंदिरों तक जाने वाली पहाड़ी सड़कें, शोलिंगहुर का टाउन मार्केट और बस स्टैंड, टैंक आधारित गांव और वे दूरदराज के गांव शामिल हैं जहां सड़क सुविधा बेहद खराब है.
मुख्य समस्याओं में लंबे समय से चली आ रही पीने के पानी की किल्लत, सिंचाई टैंकों का ठीक से रखरखाव न होना, कस्बे के इलाकों में जल निकासी की खराब व्यवस्था, गांवों की अंदरूनी सड़कों की बदहाल स्थिति, सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, कॉलेज और स्किल सेंटरों का अभाव, मौसमी रोजगार की असुरक्षा और गांवों के लिए कमजोर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था शामिल हैं.
मतदाताओं के मूड की बात करें तो किसान भरोसेमंद पानी की आपूर्ति, टैंकों के पुनर्जीवन और फसलों के उचित दाम की मांग करते हैं. कस्बे के निवासी बेहतर ड्रेनेज, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाएं चाहते हैं. मंदिर से जुड़े व्यापारी अच्छी सड़कों और पर्यटक सुविधाओं की मांग करते हैं. युवा वर्ग कॉलेज, कौशल प्रशिक्षण और स्थानीय रोजगार के अवसरों पर ध्यान देता है, जबकि बुजुर्ग मतदाता पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन को प्राथमिकता देते हैं.
शोलिंगहुर के मतदाता उन नेताओं को लगातार समर्थन देते हैं जो जमीन पर दिखते हैं, पानी और ग्रामीण मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामों पर ध्यान देते हैं. यहां केवल धार्मिक पहचान या प्रतीकवाद के सहारे चुनाव जीतना मुश्किल माना जाता है.
A.m.krishnan
PMK
N.g.parthiban
AMMKMNKZ
Y.r.pavendhan
NTK
R.jawahar
MNM
Nota
NOTA
T.rajendran
IND
M.giridharan
BSP
M.munirathinam
IND
J.balaji
IND
A.palani
IND
K.mani
IND
N.mani
IND
G.vijayakumar
DESMI
P.parthiban
IND
C.munirathinam
IND
R.vinoth
VTVTK
K.sekar
IND
R.elumalai
IND
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