अनाईकट्टू विधानसभा क्षेत्र (संख्या 44) तमिलनाडु के वेल्लोर जिले का एक प्रमुख ग्रामीण-अर्धशहरी क्षेत्र है. इस क्षेत्र की पहचान इसकी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, पहाड़ी और वन क्षेत्रों से सटे गांव, तथा आदिवासी और वंचित समुदायों की बड़ी आबादी से होती है. यह क्षेत्र पूर्वी घाट की तलहटी और नदियों से सिंचित मैदानी इलाकों में फैला हुआ है. अनाईकट्टू, वेल्लोर के अंदरूनी हिस्सों की विकास संबंधी चुनौतियों को दर्शाता है, जहां पेयजल सुरक्षा, सड़कें, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सरकारी योजनाओं का सही लाभ राजनीतिक फैसलों को प्रभावित करते हैं यहां की राजनीति काफी हद तक स्थानीय संबंधों पर आधारित है और मतदाता अपने विधायक से सीधी पहुंच, मौजूदगी और समस्याओं के त्वरित समाधान की अपेक्षा रखते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप की बात करें तो यहां का मतदाता वर्ग मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसान, कृषि मजदूर, अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) समुदाय, ग्रामीण महिलाएं और स्वयं सहायता समूह, तथा सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों से मिलकर बना है. हालांकि जाति और समुदाय के नेटवर्क यहां मायने रखते हैं, लेकिन मतदान का फैसला अधिकतर कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता, व्यक्तिगत संपर्क, और संकट के समय नेता की भूमिका पर आधारित होता है.
भौगोलिक स्थिति और कनेक्टिविटी के लिहाज से अनाईकट्टू में पहाड़ी गांव, जंगल से सटे छोटे-छोटे टोले, नदियों पर निर्भर खेती वाले इलाके, और दूर-दराज के पंचायत क्षेत्र शामिल हैं. खराब सड़कें, सीमित बस सेवाएं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां लोगों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजारों तक पहुंच को काफी मुश्किल बना देती हैं.
संवेदनशील और जरूरतमंद क्षेत्र (हॉटस्पॉट्स) में वे पहाड़ी गांव शामिल हैं जहां पानी और सड़कों की भारी कमी है, आदिवासी बस्तियां जहां सरकारी सेवाओं की पहुंच अभी भी सीमित है, और नदी-आधारित कृषि क्षेत्र जो सिंचाई पर पूरी तरह निर्भर हैं.
मुख्य समस्याएं (Core Issues) के रूप में यहां गर्मियों में पीने के पानी की भारी किल्लत, पहाड़ी और आदिवासी गांवों तक खराब संपर्क, प्राथमिक और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, सिंचाई व्यवस्था की अनिश्चितता, शिक्षा तक पहुंच में दिक्कत और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या, तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी प्रमुख हैं.
मतदाताओं का मिजीज (Voter Mood) स्पष्ट है. किसान पानी की सुनिश्चित उपलब्धता और फसल सुरक्षा चाहते हैं. आदिवासी समुदाय सम्मान, पहुंच और समान व्यवहार को प्राथमिकता देते हैं. महिलाएं खास तौर पर पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं को लेकर सजग हैं. युवा वर्ग कौशल विकास और अपने क्षेत्र के पास रोजगार की तलाश में है. बुज़ुर्ग मतदाता पेंशन, इलाज और परिवहन सुविधाओं को सबसे अधिक महत्व देते हैं.
अनाईकट्टू के मतदाता उसी नेता को समर्थन देते हैं जो मैदान में लगातार मौजूद रहता है, लोगों की बात संवेदनशीलता और सहानुभूति से सुनता है, और सरकारी योजनाओं को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने की क्षमता रखता है.
D.velazhagan
ADMK
A.sumithra
NTK
Nota
NOTA
M.senthil Kumar
IND
V.d.sathish Kumar
AMMKMNKZ
P Venkatesan
IND
K.rajasekar
IJK
M Rajbabu
IND
T.mathan Kumar
IND
N.kirubakaran
IND
K.naveenkumar
IND
R Karunamoorthy
IND
M.arun
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.