कट्टुमन्नारकोइल (SC) विधानसभा क्षेत्र, निर्वाचन क्षेत्र संख्या 159 तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित है और यह उपजाऊ कावेरी डेल्टा क्षेत्र का हिस्सा है. इस क्षेत्र में ऐतिहासिक कस्बा कट्टुमन्नारकोइल के साथ-साथ कई आसपास के कृषि गांव और ग्रामीण बस्तियां शामिल हैं. यहां की मुख्य आजीविका कृषि है, खासकर धान की खेती, जो कावेरी नदी की सहायक नहरों से मिलने वाली सिंचाई पर निर्भर करती है. यह विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और यहां दलित समुदाय की बड़ी आबादी के साथ-साथ अन्य कृषि आधारित पिछड़े वर्ग (OBC) और वन्नियार समुदाय भी रहते हैं. यह क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे मध्यकालीन वैष्णव संत नाथमुनि की जन्मभूमि माना जाता है, जिससे इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बढ़ जाता है.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह एक आरक्षित सीट है जहां अनुसूचित जाति के मतदाता प्रमुख भूमिका निभाते हैं, साथ ही वन्नियार और अन्य OBC समुदाय भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं. यहां दलित संगठनों, किसान समूहों और स्थानीय नेताओं का राजनीतिक लामबंदी में बड़ा प्रभाव रहता है. चुनावों में कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक न्याय की नीतियां और ग्रामीण विकास कार्यक्रम प्रमुख मुद्दे होते हैं. यहां गठबंधन राजनीति भी चुनाव परिणाम तय करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
भौगोलिक और संपर्क की बात करें तो यह क्षेत्र तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है. यह सड़क मार्गों से चिदंबरम, मयिलादुथुराई और आसपास के डेल्टा कस्बों से जुड़ा हुआ है. यहां का भू-भाग मुख्य रूप से धान के खेतों, सिंचाई नहरों और ग्रामीण बस्तियों से भरा हुआ है. यहां की कृषि में धान, गन्ना और दलहन प्रमुख फसलें हैं. इस क्षेत्र में अक्सर मानसून के समय भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति भी बन जाती है.
यहां के प्रमुख स्थानों (Hotspots) में कट्टुमन्नारकोइल कस्बा केंद्र, जो प्रशासन और स्थानीय बाजार का मुख्य केंद्र है, कृषि गांव जहां अनुसूचित जाति मतदाता अधिक संख्या में रहते हैं, सिंचाई नहरों वाले क्षेत्र जो खेती की उत्पादकता को प्रभावित करते हैं, साप्ताहिक ग्रामीण बाजार जो कृषि व्यापार को बढ़ाते हैं, और पंचायत क्षेत्र जहां सरकारी कल्याण योजनाएं शामिल हैं, जिसका प्रभाव वोटिंग पर साफ दिखाई देता है.
मुख्य समस्याओं में कावेरी डेल्टा किसानों के लिए भरोसेमंद सिंचाई और जल प्रबंधन, अनुसूचित जाति समुदाय के लिए कल्याणकारी योजनाएं और सामाजिक न्याय, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और परिवहन सुविधा, गांवों में पीने के पानी और स्वच्छता व्यवस्था, तथा किसानों के लिए सब्सिडी, फसल बीमा और स्थिर आय जैसी जरूरतें शामिल हैं.
मतदाता मनोभाव के अनुसार, अनुसूचित जाति के मतदाता मुख्य रूप से सामाजिक न्याय और सरकारी योजनाओं पर ध्यान देते हैं. किसान वर्ग सिंचाई की स्थिरता और कृषि आय सुरक्षा को प्राथमिकता देता है. कृषि मजदूर रोजगार और कल्याण योजनाओं की उम्मीद रखते हैं. ग्रामीण परिवार आवास योजनाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार चाहते हैं. यहां चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहां जातीय समीकरण और गठबंधन राजनीति परिणामों को बहुत प्रभावित करती है.
N. Murugumaran
ADMK
P. Nivedha
NTK
S. Narayanamoorthy
AMMKMNKZ
Thanga Vikram
MNM
A. Anandan
IND
Nota
NOTA
M.g. Kalyanasundaram
AIJYMKG
Thanga Udhayakumar
BSP
M.a.t. Archunan
IND
P.m. Kumar
IND
Mathiazhagan
IND
S.tamilselvan
IND
M. Thirunavukarasu
APTADMK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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