वंदावासी निर्वाचन क्षेत्र (संख्या 69) तिरुवन्नामलाई जिले का एक प्रमुख रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है. यहां की पहचान इसकी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, बड़ी अनुसूचित जाति (SC) आबादी, गन्ना और धान की खेती, तथा सहकारी समितियों पर आधारित ग्रामीण व्यवस्था से होती है. इस क्षेत्र की राजनीति मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन, जातीय समीकरणों और किसानों की आजीविका सुरक्षा के इर्द-गिर्द घूमती है. यही कारण है कि यह सीट जिले में संरचनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण और निर्णायक मानी जाती है. यहां चुनावों का परिणाम मुख्य रूप से दलित समुदाय के विश्वास, कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता और उम्मीदवार की लोगों तक पहुंच व उपलब्धता पर निर्भर करता है.
वंदावासी, जिसे ऐतिहासिक रूप से वांडीवाश भी कहा जाता है, 1760 में हुए प्रसिद्ध बैटल ऑफ वांडीवाश के कारण ऐतिहासिक महत्व रखता है. यह युद्ध भारत में ब्रिटिश सत्ता की मजबूती का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है. इसके अलावा यह क्षेत्र कोरा घास की चटाई बुनाई और अन्य ग्रामीण हस्तशिल्प के लिए भी जाना जाता है, जो यहां के छोटे कारीगरों और परिवारों की आजीविका का साधन है.
सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से यहां के प्रमुख मतदाता समूहों में अनुसूचित जाति समुदाय (जो संख्या में काफी अधिक हैं), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (MBC) के कृषि परिवार, छोटे और सीमांत किसान, कृषि मजदूर, स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं. यहां राय बनाने में SC समुदाय के नेता, पंचायत अध्यक्ष, सहकारी समितियों के प्रमुख, किसान संघों के प्रतिनिधि, SHG समन्वयक और आंगनवाड़ी कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. मतदान व्यवहार मुख्य रूप से कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित, जाति-संवेदनशील और स्थानीय मुद्दों पर आधारित रहता है.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र तिरुवन्नामलाई जिले के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है. यहां का भूभाग अधिकतर समतल और कृषि योग्य है. मुख्य सड़कों से अच्छी कनेक्टिविटी है, लेकिन अंदरूनी गांवों तक पहुंच कमजोर है. क्षेत्र की चुनौतियों में खराब अंतिम छोर (लास्ट-माइल) सड़कें, बरसात के मौसम में जलभराव और बस सेवाओं की सीमित आवृत्ति शामिल हैं.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से कुछ विशेष क्षेत्र (हॉटस्पॉट) भी महत्वपूर्ण हैं, जैसे वंदावासी नगर, गन्ना और धान की खेती वाले क्षेत्र, अनुसूचित जाति बहुल गांव, अंदरूनी कृषि प्रधान पंचायतें और साप्ताहिक बाजार केंद्र. हर इलाके की अपनी अलग प्राथमिकताएं हैं, कहीं पानी और सिंचाई का मुद्दा प्रमुख है, तो कहीं कल्याणकारी योजनाओं और पहुंच (एक्सेस) से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण होते हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में पेयजल की उपलब्धता और गुणवत्ता, सिंचाई व्यवस्था की स्थिरता, समय पर कृषि मजदूरी और मनरेगा (MGNREGA) के तहत काम, ग्रामीण सड़कों और बस कनेक्टिविटी की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, तथा जातीय सम्मान और निष्पक्ष रूप से योजनाओं का लाभ वितरण शामिल हैं.
मतदाताओं का रुझान भी अलग-अलग वर्गों के अनुसार बदलता है. अनुसूचित जाति के मतदाता सम्मान, योजनाओं तक सीधी पहुंच और निरंतर कल्याण पर ध्यान देते हैं. किसान सिंचाई, फसल खरीद व्यवस्था और मजदूर सहयोग जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं. महिलाएं पानी, पेंशन और राशन आपूर्ति को महत्वपूर्ण मानती हैं. युवा कौशल विकास और स्थानीय रोजगार के अवसर चाहते हैं, जबकि बुजुर्ग स्वास्थ्य सेवाओं और पेंशन पर अधिक ध्यान देते हैं. कुल मिलाकर यहां के मतदाता निरंतर संपर्क रखने वाले, सम्मानजनक व्यवहार करने वाले और जमीनी स्तर पर सक्रिय नेतृत्व को पसंद करते हैं और उसी को समर्थन देते हैं.
Murali S
PMK
Prabavathi G
NTK
Nota
NOTA
Venkatesan P
AMMKMNKZ
Suresh S
MNM
Manikandan K
IND
Arjunan M
BSP
Vignesh S
IND
Murali C
IND
Durai B
GPI
Muthuperumal K
IND
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.
तमिलनाडु चुनावों के लिए बीजेपी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें के. अन्नामलाई का नाम नहीं था. अब अन्नामलाई ने बताया है उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि वो अब पूरी ताकत से NDA उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे.
तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यपाल का भी नाम है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 27 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए गठित चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने ये कदम डीएमके के साथ हुए सीट बंटवारे के फॉर्मूले में कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलने की नाराजगी के कारण उठाया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को मुख्यमंत्री स्टालिन 'तमिल अस्मिता' बनाम 'दिल्ली के प्रभाव' की लड़ाई बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने और विपक्षी वोटों में सेंध लगाने का दांव खेल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
AIADMK तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK को सत्ता से बेदखल करने के लिए कई तरकीबें आजमा रही है, और उनमें आजमाया हुआ एक कारगर नुस्खा मुफ्त वाली योजना भी है. फर्क बस यही है कि डीएमके नए वादे भी कर रही है, और पुराने वादों को पूरा भी कर रही है - और AIADMK के सामने बड़ा चैलेंज यही है.
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने जनता से अपील की है कि चुनाव में उनकी पार्टी TVK को समर्थन दें.