शंकरपुरम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 79), एक शांत लेकिन राजनीतिक रूप से संवेदनशील ग्रामीण सीट है. यह क्षेत्र तेनपेनई (दक्षिण पेन्नार) नदी प्रणाली, तालाबों पर आधारित सिंचाई व्यवस्था और जंगलों से सटे इलाकों के कारण विशेष पहचान रखता है. यहां के मतदाता व्यवहारिक सोच वाले और याद रखने वाले होते हैं. वे उन नेताओं को पसंद करते हैं जो पानी की सुरक्षा, फसलों की रक्षा और सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ सुनिश्चित करते हैं. यह ऐसा क्षेत्र है जहां पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत विश्वसनीयता और जनसंपर्क को महत्व दिया जाता है.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यहां का मतदाता वर्ग विविध है. इसमें वन्नियार (एमबीसी) समुदाय की संख्या अधिकांश पंचायतों में मजबूत है. इसके अलावा कई गांवों में अनुसूचित जाति (SC) की भी उल्लेखनीय आबादी है. यहां बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान रहते हैं, जो नदी और तालाबों की सिंचाई पर निर्भर हैं. साथ ही कृषि मजदूर, जंगल से सटे गांवों के लोग, महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) की सदस्याएं और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक रूप से इस क्षेत्र में तेनपेनई नदी के किनारे बसे गांव, तालाबों से सिंचित आंतरिक कृषि क्षेत्र, और जंगलों से लगे छोटे-छोटे बस्तियां शामिल हैं जहां पहुंच की समस्या रहती है. अंदरूनी गांवों में सड़क संपर्क कमजोर है. नदी के पास के इलाकों में बरसात के समय बाढ़ की स्थिति बन जाती है, जबकि नदी से दूर सूखे की समस्या देखी जाती है. इसलिए यहां पानी की उपलब्धता और उसकी सुरक्षा ही राजनीतिक संतुष्टि और असंतोष का मुख्य आधार है.
क्षेत्र के प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट) में कलवरायण हिल्स, मन्कोम्बू झरना, नदी किनारे के गांव, तालाब-सिंचित कृषि पंचायतें, सूखा प्रभावित आंतरिक गांव, अनुसूचित जाति बहुल बस्तियां, जंगल से सटी बस्तियां और साप्ताहिक हाट बाजार वाले गांव शामिल हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां नदी की सफाई (डीसिल्टिंग) और तटबंधों की मजबूती, तालाबों का रखरखाव और सिंचाई का सही समय निर्धारण, पीने के पानी की सुरक्षा, अंदरूनी सड़कों की बेहतर कनेक्टिविटी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक पहुंच और एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता, पेंशन, आवास और मनरेगा जैसी योजनाओं में देरी, तथा जंगल से लगे इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.
मतदाताओं की अपेक्षाएं स्पष्ट हैं, विधायक को गांवों में नियमित दौरा करना चाहिए, बाढ़, सूखा या फसल नुकसान के समय मौजूद रहना चाहिए, पानी और राजस्व से जुड़े विवादों में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए, और जातीय समुदायों के बुजुर्गों व महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ सम्मानपूर्वक संवाद बनाए रखना चाहिए. यहां की राजनीति मूल रूप से रिश्तों, भरोसे और जमीन से जुड़े कामों पर टिकी हुई है.
Dr.raja G
PMK
Rajiyama B
NTK
Arul P
IND
Mannan M P
IND
Nota
NOTA
Mayilamparai Mari A
IND
Sakthivel S
BSP
Vimalamary S
AMGRDMK
Ramesh G
IJK
Kubendiran A
IND
Mujibur Ragiman M
AIMIM
Dhanam K
IND
Babuganesh S
IND
Gopinath E
IND
Oviyar Anandh C
LJP
Arunkennadi A P
AINPMK
Uthayakumar A
IND
Jayaprakash K
IND
Rajkumar E
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.