AIADMK
DMK
TVK
NTK
TVVK
IND
BSP
IND
IND
नोटा
NOTA
IND
AIPTMMK
IND
MSK
IND
IND
IND
IND
IND
VTVTK
IND
IND
IND
Sankarapuram Vidhan Sabha Chunav Result: शंकरपुरम सीट पर Rakesh R ने लहराया जीत का परचम
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Tamil Nadu Election Results 2026 Live: तमिलनाडु चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
शंकरपुरम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 79), एक शांत लेकिन राजनीतिक रूप से संवेदनशील ग्रामीण सीट है. यह क्षेत्र तेनपेनई (दक्षिण पेन्नार) नदी प्रणाली, तालाबों पर आधारित सिंचाई व्यवस्था और जंगलों से सटे इलाकों के कारण विशेष पहचान रखता है. यहां के मतदाता व्यवहारिक सोच वाले और याद रखने वाले होते हैं. वे उन नेताओं को पसंद करते हैं जो पानी की सुरक्षा, फसलों की रक्षा और सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ सुनिश्चित करते हैं. यह ऐसा क्षेत्र है जहां पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत विश्वसनीयता और जनसंपर्क को महत्व दिया जाता है.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यहां का मतदाता वर्ग विविध है. इसमें वन्नियार (एमबीसी) समुदाय की संख्या अधिकांश पंचायतों में मजबूत है. इसके अलावा कई गांवों में अनुसूचित जाति (SC) की भी उल्लेखनीय आबादी है. यहां बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान रहते हैं, जो नदी और तालाबों की सिंचाई पर निर्भर हैं. साथ ही कृषि मजदूर, जंगल से सटे गांवों के लोग, महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) की सदस्याएं और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक रूप से इस क्षेत्र में तेनपेनई नदी के किनारे बसे गांव, तालाबों से सिंचित आंतरिक कृषि क्षेत्र, और जंगलों से लगे छोटे-छोटे बस्तियां शामिल हैं जहां पहुंच की समस्या रहती है. अंदरूनी गांवों में सड़क संपर्क कमजोर है. नदी के पास के इलाकों में बरसात के समय बाढ़ की स्थिति बन जाती है, जबकि नदी से दूर सूखे की समस्या देखी जाती है. इसलिए यहां पानी की उपलब्धता और उसकी सुरक्षा ही राजनीतिक संतुष्टि और असंतोष का मुख्य आधार है.
क्षेत्र के प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट) में कलवरायण हिल्स, मन्कोम्बू झरना, नदी किनारे के गांव, तालाब-सिंचित कृषि पंचायतें, सूखा प्रभावित आंतरिक गांव, अनुसूचित जाति बहुल बस्तियां, जंगल से सटी बस्तियां और साप्ताहिक हाट बाजार वाले गांव शामिल हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां नदी की सफाई (डीसिल्टिंग) और तटबंधों की मजबूती, तालाबों का रखरखाव और सिंचाई का सही समय निर्धारण, पीने के पानी की सुरक्षा, अंदरूनी सड़कों की बेहतर कनेक्टिविटी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक पहुंच और एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता, पेंशन, आवास और मनरेगा जैसी योजनाओं में देरी, तथा जंगल से लगे इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.
मतदाताओं की अपेक्षाएं स्पष्ट हैं, विधायक को गांवों में नियमित दौरा करना चाहिए, बाढ़, सूखा या फसल नुकसान के समय मौजूद रहना चाहिए, पानी और राजस्व से जुड़े विवादों में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए, और जातीय समुदायों के बुजुर्गों व महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ सम्मानपूर्वक संवाद बनाए रखना चाहिए. यहां की राजनीति मूल रूप से रिश्तों, भरोसे और जमीन से जुड़े कामों पर टिकी हुई है.
Dr.raja G
PMK
Rajiyama B
NTK
Arul P
IND
Mannan M P
IND
Nota
NOTA
Mayilamparai Mari A
IND
Sakthivel S
BSP
Vimalamary S
AMGRDMK
Ramesh G
IJK
Kubendiran A
IND
Mujibur Ragiman M
AIMIM
Dhanam K
IND
Babuganesh S
IND
Gopinath E
IND
Oviyar Anandh C
LJP
Arunkennadi A P
AINPMK
Uthayakumar A
IND
Jayaprakash K
IND
Rajkumar E
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.