चेंगम तिरुवन्नामलाई जिले का एक प्रमुख रूप से ग्रामीण और पहाड़ी-तलहटी वाला विधानसभा क्षेत्र (संख्या 62) है. यहां की पहचान सूखा क्षेत्र खेती, आदिवासी बस्तियों, जंगल किनारे बसे गांवों और लंबे समय से चली आ रही पानी की कमी से जुड़ी है. इस क्षेत्र की राजनीति आजीविका की असुरक्षा, सरकारी कल्याण योजनाओं पर निर्भरता और अंतिम स्तर तक प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच (लास्ट-माइल गवर्नेंस) से प्रभावित होती है. इसलिए यह सीट भले ही शांत दिखाई दे, लेकिन संरचनात्मक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. यहां चुनाव शहरी मुद्दों या बड़े नारों पर नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक कल्याण योजनाओं की पहुंच, पानी की गारंटी और स्थानीय नेतृत्व पर भरोसे के आधार पर जीते-हारे जाते हैं.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यहां का मतदाता वर्ग विविध है. इसमें सूखा क्षेत्र के किसान और छोटे कृषक, पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय, ग्रामीण इलाकों के दलित बस्तियां, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (MBC) के कृषि परिवार, स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, साथ ही प्रवासी मजदूर परिवार शामिल हैं. यहां प्रभावशाली लोगों में पंचायत नेता, आदिवासी बुजुर्ग, स्वयं सहायता समूह और आंगनवाड़ी नेटवर्क से जुड़े लोग, किसान समूह और राशन दुकान से जुड़े स्थानीय चेहरे शामिल होते हैं. यहां मतदान का रुझान रिश्तों और भरोसे पर आधारित होता है तथा सरकारी कल्याण योजनाओं की संवेदनशीलता से प्रभावित रहता है.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र तिरुवन्नामलाई जिले के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में स्थित है. यहां पहाड़ी श्रंखलाएं, जंगलों के किनारे वाले इलाके और सूखे मैदान पाए जाते हैं. मुख्य सड़कों पर आवागमन की स्थिति ठीक-ठाक है, लेकिन अंदरूनी गांवों में सड़कें कमजोर हैं. अंतिम गांवों तक सड़क संपर्क की कमी, बारिश के मौसम में गांवों का कट जाना और सीमित बस सेवाएं यहां की प्रमुख समस्याएं हैं.
क्षेत्र के प्रमुख हिस्सों में चेंगम कस्बा और तालुक मुख्यालय, पहाड़ी और जंगल किनारे स्थित आदिवासी गांव, सूखा खेती वाले इलाके, अंदरूनी अनुसूचित जाति (SC) बस्तियां और साप्ताहिक बाजार वाले गांव शामिल हैं. हर क्षेत्र अलग-अलग मुद्दों जैसे पानी की कमी, सरकारी योजनाओं की पहुंच और सड़क संपर्क की स्थिति के आधार पर अपनी प्रतिक्रिया देता है.
मुख्य समस्याओं में पीने के पानी की भारी कमी और टैंकरों पर निर्भरता, सिंचाई सुविधाओं का अभाव और बोरवेल फेल होना, ग्रामीण सड़कों की खराब हालत, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं और अस्पताल तक पहुंच की समस्या, स्कूलों में स्टाफ की कमी और बच्चों का पढ़ाई छोड़ना, तथा जंगल क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड भी उनके वर्ग के अनुसार अलग-अलग है. किसान पानी की सुरक्षा और खेती के लिए सहायता चाहते हैं. आदिवासी समुदाय सम्मान, स्वास्थ्य सेवाएं और बुनियादी पहुंच की मांग करते हैं. महिला मतदाता पानी, राशन आपूर्ति और मनरेगा (MGNREGA) जैसी योजनाओं पर ध्यान देती हैं. युवा वर्ग कौशल विकास और स्थानीय रोजगार चाहता है, जबकि बुजुर्ग पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देते हैं. चेंगम के मतदाता बड़े भाषणों या नारों से ज्यादा निरंतर उपस्थिति और भरोसेमंद काम करने वाले नेतृत्व को महत्व देते हैं.
Nainakannu.m.s
ADMK
Vennila.s
NTK
Anbu.s
DMDK
Nota
NOTA
Suganraj.s
IJK
Shanmugam.g
BSP
Vijayachandran.g
IND
Selvaraji.v
IND
Dhinakaran.h
IND
Baskar.s
NGPP
Sivaprakash.k
IND
Sharma.s
IND
Arunkumar.m
IND
Anbazhagan.p.g
IND
Sivakumar.j
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
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