अरणी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 67) तिरुवन्नामलाई जिले का एक व्यावसायिक रूप से सक्रिय शहरी-अर्धशहरी विधानसभा क्षेत्र है. यह पूरे देश में रेशमी साड़ियों की बुनाई और व्यापार के एक बड़े केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है. यहां की राजनीति मुख्य रूप से करघा (लूम) आधारित आजीविका, बुनकर-व्यापारी एकजुटता, पानी और बिजली पर निर्भरता, तथा नगर सेवाओं की उपलब्धता जैसे मुद्दों से प्रभावित होती है. इसी कारण यह सीट हमेशा कड़ी और प्रतिस्पर्धी मानी जाती है, जहां अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे चुनाव परिणाम तय करते हैं. यहां चुनाव अक्सर आजीविका की सुरक्षा, बाजार की स्थिरता और नगर प्रशासन के प्रदर्शन के आधार पर तय होते हैं. अरणी का सांस्कृतिक महत्व भी काफी है. यहां के प्रमुख मंदिरों जैसे श्री रेणुगम्मबल मंदिर और श्री वेणुगोपालस्वामी मंदिर स्थानीय सामाजिक जीवन और नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप की बात करें तो यहां के मुख्य मतदाता समूहों में हैं, हैंडलूम और पावरलूम बुनकर, रेशमी साड़ी व्यापारी और निर्यातक, कपड़ा मजदूर और रंगाई (डाइंग) से जुड़े श्रमिक, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अति पिछड़ा वर्ग (MBC) के व्यापारी समुदाय, नगर और बाहरी इलाकों में बसे अनुसूचित जाति (SC) के बस्तियां, तथा करघा उद्योग से जुड़े प्रवासी मजदूर. यहां जनमत को प्रभावित करने वाले प्रमुख समूहों में बुनकर संघ, करघा यूनियन, व्यापारी महासंघ, डाइंग यूनिट के मालिक, बाजार समिति और नगर पालिका के वार्ड पार्षद शामिल हैं. यहां मतदान व्यवहार संगठित होता है और आर्थिक हितों से प्रेरित रहता है, जिस पर विभिन्न संगठनों का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है.
भौगोलिक रूप से अरनी तिरुवन्नामलाई जिले के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है. इसकी सड़क संपर्क व्यवस्था चेय्यार, आर्कोट और वेल्लोर जैसे क्षेत्रों से मजबूत है, लेकिन यहां कोई बड़ा रेलवे जंक्शन नहीं है. क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों में बाजार क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम, पानी की कमी, डाइंग यूनिट से निकलने वाले अपशिष्ट (इफ्लुएंट) की समस्या, और तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के मुकाबले बुनियादी ढांचे की कमी शामिल हैं.
मुख्य इलाकों में अरनी शहर का केंद्रीय भाग और टेक्सटाइल बाजार, बुनकरों की आवासीय कॉलोनियां, रंगाई और प्रोसेसिंग क्लस्टर, शहर के बाहरी विस्तार क्षेत्र, तथा अनुसूचित जाति और श्रमिक बस्तियां शामिल हैं. हर क्षेत्र की अपनी अलग प्राथमिकताएं हैं, कहीं आजीविका का मुद्दा प्रमुख है, तो कहीं पानी और नागरिक सुविधाएं चुनावी रुख तय करती हैं.
चुनावी दृष्टि से कुछ खास क्षेत्र निर्णायक माने जाते हैं, जैसे श्री रेणुगम्मबल मंदिर और श्री वेणुगोपालस्वामी मंदिर के आसपास के इलाके, बुनकर-बहुल वार्ड, डाइंग यूनिट और प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र, बाजार के भीड़भाड़ वाले रास्ते, और पानी की कमी से जूझ रहे मोहल्ले. अक्सर यही इलाके चुनावी अंतर तय करते हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में बिजली दरों की स्थिरता और निर्बाध आपूर्ति, घरों और डाइंग यूनिट्स के लिए पेयजल की उपलब्धता, प्रदूषण नियंत्रण और अपशिष्ट उपचार व्यवस्था, बाजार ढांचे का विकास और यातायात प्रबंधन, श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, तथा बुनकरों के लिए सस्ती आवास व्यवस्था शामिल हैं.
मतदाताओं का रुझान भी उनके पेशे और जरूरतों के अनुसार अलग-अलग है. बुनकर बिजली की स्थिर आपूर्ति, कल्याणकारी योजनाओं और बाजार तक बेहतर पहुंच चाहते हैं. व्यापारी नियमों में स्थिरता और बेहतर ढांचा चाहते हैं. महिलाएं पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देती हैं. युवा आधुनिक टेक्सटाइल कौशल और उद्यमिता के अवसर चाहते हैं, जबकि मजदूर स्वास्थ्य सुरक्षा और आवास सुविधाओं पर जोर देते हैं. कुल मिलाकर अरनी के मतदाता उन नेताओं को पसंद करते हैं जो आजीविका की सुरक्षा के साथ-साथ शहर के आधुनिकीकरण और विकास को भी संतुलित रूप से आगे बढ़ाएं.
S.s.anbalagan
DMK
D.prakalatha
NTK
V.manikandan
MNM
G.baskaran
DMDK
Nota
NOTA
S.thanigaivel
VTVTK
N.karthikeyan
IND
K.anbu
BSP
Dhatchanamurthy.r
IND
A.arunkumar
IND
S.sakthivel
IND
S.ramachandran
IND
S.murali
IND
M.anbalagan
IND
K.anbalagan
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.