कटपडी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 40) तमिलनाडु के वेल्लोर जिले का एक रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण शहरी-अर्धशहरी इलाका है. यह पश्चिमी तमिलनाडु के लिए शिक्षा, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है. यहां स्थित कटपाड़ी जंक्शन एक बड़ा रेलवे हब है. इसके साथ ही वीआईटी यूनिवर्सिटी, प्रसिद्ध क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) और पास में स्थित वेल्लोर गोल्डन टेंपल इस क्षेत्र को साल भर अत्यधिक भीड़ वाला बनाते हैं.
राजनीतिक दृष्टि से, कटपडी एक ऐसा क्षेत्र है जहां प्रदर्शन बहुत मायने रखता है और मतदाता रुख बदलने की क्षमता रखते हैं. हालांकि, 1996 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व डीएमके के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु सरकार के मंत्री दुरई मुरुगन करते आ रहे हैं. इससे इस सीट पर उन्हें मजबूत पहचान और सत्ता का लाभ (इन्कम्बेंसी) मिलता है.
राजनीतिक और सामाजिक चरित्र की बात करें तो यहां का मतदाता वर्ग काफी विविध है. इसमें वीआईटी और अन्य कॉलेजों के छात्र और शैक्षणिक स्टाफ, रेलवे और परिवहन से जुड़े कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी और पेशेवर वर्ग, कामगार और दलित बस्तियां, तथा अर्ध-शहरी कृषि समुदाय शामिल हैं. जातीय समीकरण मौजूद हैं, लेकिन शहरीकरण, शिक्षा और छात्र आबादी के प्रभाव के कारण उनका असर अपेक्षाकृत कम हो गया है. यहां युवा और महिला मतदाता चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक स्थिति और कनेक्टिविटी के लिहाज से कटपडी बेहद अहम है. यह चेन्नई-बेंगलुरु-कोयंबटूर कॉरिडोर को जोड़ता है और वेल्लोर, रानीपेट, आर्कोट और चित्तूर जैसे शहरों से संपर्क प्रदान करता है. इसके बावजूद, भारी ट्रैफिक जाम, पार्किंग की कमी और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की समस्याएं बनी रहती हैं, खासकर रेलवे स्टेशन, वीआईटी और सीएमसी के आसपास.
प्रमुख हॉटस्पॉट इलाकों में रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड क्षेत्र, वीआईटी की ओर जाने वाली सड़कें, किराये के मकानों वाले इलाके और अर्ध-शहरी गांवों की सड़कें शामिल हैं, जहां समस्याएं ज्यादा दिखाई देती हैं.
मुख्य समस्याओं में रेलवे स्टेशन के पास ट्रैफिक जाम, अपर्याप्त जल निकासी और बरसात में जलभराव, छात्र इलाकों में कचरा प्रबंधन की कमी, मौसम के अनुसार पीने के पानी की दिक्कत, किराये के मकानों की सुरक्षा और नियमों की कमी, सार्वजनिक परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर अत्यधिक दबाव, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग का अभाव शामिल है.
मतदाताओं का मूड अलग-अलग वर्गों में अलग है. छात्र और युवा सुरक्षा, परिवहन और रोजगार चाहते हैं. मध्यम वर्ग साफ सड़कें, बेहतर ड्रेनेज और पानी की नियमित आपूर्ति की मांग करता है. कामगार वर्ग कल्याणकारी योजनाओं और आवास की स्थिरता को प्राथमिकता देता है. महिलाएं सुरक्षा, रोशनी और स्वच्छता पर खास ध्यान देती हैं. वहीं, अर्ध-शहरी मतदाता बुनियादी ढांचे के विकास की अपेक्षा रखते हैं.
कटपडी के मतदाता वही नेता पसंद करते हैं जो जमीन पर दिखने वाला, हाथ-से-काम करने वाला शासन दें. यहां के लोग काम में कमी या लापरवाही पर जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं और प्रदर्शन के आधार पर अपना समर्थन बदलने से नहीं हिचकते.
V Ramu
ADMK
S Thirukkumaran
NTK
Nota
NOTA
A S Raja
AMMKMNKZ
M Sudharsan
IJK
V Vinayagam
IND
K Raja
BSP
D Ramu
IND
R Baskaran
IND
J Anandhi
IND
P Dhananjayan
IND
Arumugam K P
RPPRINAT
Raman
IND
K Ramu
IND
R S Sridhar
AMGRDMK
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.
तमिलनाडु चुनावों के लिए बीजेपी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें के. अन्नामलाई का नाम नहीं था. अब अन्नामलाई ने बताया है उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि वो अब पूरी ताकत से NDA उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे.
तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यपाल का भी नाम है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 27 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए गठित चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने ये कदम डीएमके के साथ हुए सीट बंटवारे के फॉर्मूले में कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलने की नाराजगी के कारण उठाया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को मुख्यमंत्री स्टालिन 'तमिल अस्मिता' बनाम 'दिल्ली के प्रभाव' की लड़ाई बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने और विपक्षी वोटों में सेंध लगाने का दांव खेल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
AIADMK तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK को सत्ता से बेदखल करने के लिए कई तरकीबें आजमा रही है, और उनमें आजमाया हुआ एक कारगर नुस्खा मुफ्त वाली योजना भी है. फर्क बस यही है कि डीएमके नए वादे भी कर रही है, और पुराने वादों को पूरा भी कर रही है - और AIADMK के सामने बड़ा चैलेंज यही है.
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने जनता से अपील की है कि चुनाव में उनकी पार्टी TVK को समर्थन दें.