पोलुर विधानसभा क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 66) तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले में स्थित एक अर्ध-शहरी और कृषि प्रधान क्षेत्र है. यह इलाका आसपास के ग्रामीण ब्लॉकों के लिए ग्रेनाइट उद्योग, व्यापार और साप्ताहिक बाजार का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां की राजनीति मुख्य रूप से ग्रेनाइट अर्थव्यवस्था, व्यापारियों के प्रभाव, पानी की कमी और गांव-शहर के आपसी निर्भर संबंधों से प्रभावित होती है. यही कारण है कि यह सीट काफी प्रतिस्पर्धी और स्थानीय मुद्दों पर आधारित मानी जाती है. यहां चुनाव किसी विचारधारा से ज्यादा रोजगार की निरंतरता, जल प्रबंधन और नगर स्तर की सेवाओं की उपलब्धता जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर तय होते हैं. पोलुर सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां प्राचीन संपथगिरि नरसिंह मंदिर, ऐतिहासिक जैन गुफाएं जिनमें 16 मीटर ऊंची नेमिनाथ की प्रतिमा है, और पास स्थित पर्वतमलाई ट्रैकिंग पहाड़ियां हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और पहचान को प्रभावित करती हैं.
राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप की बात करें तो यहां के प्रमुख मतदाता समूहों में ग्रेनाइट खदान मालिक और मजदूर, व्यापारी और कारोबारी समुदाय, छोटे और सीमांत किसान, ओबीसी और एमबीसी कृषि परिवार, शहर और गांवों में बसे अनुसूचित जाति (SC) समुदाय, तथा प्रवासी और ठेका श्रमिक शामिल हैं. इस क्षेत्र में प्रभाव डालने वाले समूहों में ग्रेनाइट एसोसिएशन, व्यापारी यूनियन, पंचायत नेता, परिवहन संगठन और सहकारी समितियां प्रमुख हैं. यहां का मतदान व्यवहार व्यावहारिक, अर्थव्यवस्था केंद्रित और सामाजिक नेटवर्क पर आधारित होता है.
भौगोलिक दृष्टि से पोलुर तिरुवन्नामलाई जिले के उत्तर-पश्चिम भाग में स्थित है और यह तिरुवन्नामलाई, अरानी और कृष्णागिरी क्षेत्रों के बीच एक व्यावसायिक केंद्र (कॉमर्शियल नोड) के रूप में काम करता है. यहां सड़क संपर्क मजबूत है, लेकिन कोई बड़ा रेलवे जंक्शन नहीं है. प्रमुख चुनौतियों में खदानों से आने-जाने वाले भारी वाहनों का ट्रैफिक, सड़कों का खराब होना, भीड़भाड़ और धूल प्रदूषण शामिल हैं.
क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में संपथगिरि नरसिंह मंदिर, 16 मीटर ऊंची नेमिनाथ प्रतिमा वाली जैन गुफाएं, पोलुर नगर और नगर पालिका वार्ड, ग्रेनाइट खदान क्षेत्र, मजदूर आवास कॉलोनियां, कृषि गांवों के समूह और साप्ताहिक बाजार क्षेत्र शामिल हैं. हर इलाके की अपनी आर्थिक और नागरिक समस्याएं हैं, जिन पर वहां के मतदाता प्रतिक्रिया देते हैं.
मुख्य मुद्दों में ग्रेनाइट उद्योग का नियमन और निरंतरता, धूल और पर्यावरण प्रदूषण, पीने के पानी की कमी, सड़क की गुणवत्ता और ट्रैफिक नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, तथा नाली और स्वच्छता व्यवस्था शामिल हैं.
मतदाताओं के मूड को समझें तो उद्योग से जुड़े लोग नीतिगत स्पष्टता और स्थिरता चाहते हैं, मजदूर रोजगार सुरक्षा और स्वास्थ्य संरक्षण, किसान पानी की गारंटी और बाजार सुविधा, महिलाएं पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं, और युवा कौशल विकास व खदान के बाहर रोजगार के अवसर चाहते हैं. कुल मिलाकर, पोलुर के मतदाता ऐसे संतुलित नेतृत्व का समर्थन करते हैं जो आजीविका की रक्षा करते हुए स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान करे.
Sekaran. K.v
DMK
Lavanya. L
NTK
Kalavathi. G
MNM
Daksnamoorthy. R
IND
Nota
NOTA
Vijayakumar. C
AMMKMNKZ
Ezhil Arasu. M
BSP
Murugesan. D
IND
Siva. A
IND
Shanmugasundaram. E
IND
Sathiyaraj. P
IND
Chidambaram. V
IND
Kalaimani. S
IND
Ganesan. C
IND
Krishnamurthi. K
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.