कलासपक्कम (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 65) तिरुवन्नामलाई जिले का एक प्रमुख रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है. यहां की पहचान सूखे इलाकों की खेती, तालाबों (टैंक) पर आधारित सिंचाई व्यवस्था, कृषि समुदायों की सामाजिक एकजुटता और सरकारी कल्याण योजनाओं पर आधारित मतदान प्रवृत्ति से होती है. यह क्षेत्र पहाड़ी तलहटी और भीतरी मैदानी इलाकों के बीच स्थित है. संरचनात्मक रूप से यह पूरी तरह ग्रामीण है, लेकिन चुनावी दृष्टि से यहां कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है. यहां के चुनाव मुख्य रूप से पानी की उपलब्धता, खेती से जुड़ी आजीविका और स्थानीय नेताओं की विश्वसनीयता पर निर्भर करते हैं.
सामाजिक और राजनीतिक चरित्र की बात करें तो यहां के प्रमुख मतदाता समूहों में छोटे और सीमांत किसान, ओबीसी और एमबीसी कृषि समुदाय, पंचायतों में बसे अनुसूचित जाति (SC) के बस्तियां, स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएं और सरकारी योजनाओं की लाभार्थी महिलाएं, तथा मौसमी प्रवासी मजदूर परिवार शामिल हैं. इस क्षेत्र में प्रभावशाली लोगों में पंचायत अध्यक्ष, गांव के बुजुर्ग, किसान नेता, स्वयं सहायता समूह की समन्वयक, सहकारी समितियां और स्थानीय व्यापारी शामिल होते हैं. यहां का मतदान व्यवहार गांव-केंद्रित, कल्याण योजनाओं के प्रति संवेदनशील और व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित होता है.
भौगोलिक और संपर्क व्यवस्था के अनुसार यह क्षेत्र तिरुवन्नामलाई जिले के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में स्थित है. यहां सूखे मैदान, तालाब से सिंचित क्षेत्र और पहाड़ी तलहटी का मिश्रण देखने को मिलता है. मुख्य सड़कों की स्थिति ठीक-ठाक है, लेकिन अंदरूनी गांवों तक पहुंचने वाली सड़कों और संपर्क व्यवस्था कमजोर है. प्रमुख समस्याओं में तालाबों में गाद भर जाना (सिल्टेशन), पानी का रिसाव और बर्बादी, अंतिम गांवों तक खराब सड़कें और सीमित बस सेवाएं शामिल हैं.
क्षेत्र के महत्वपूर्ण हिस्सों (हॉटस्पॉट) में तालाब से सिंचित कृषि गांव, सूखे इलाके की खेती वाले समूह, अंदरूनी अनुसूचित जाति बस्तियां और साप्ताहिक बाजार वाले गांव शामिल हैं. हर इलाके की अपनी अलग जरूरतें हैं, जो मुख्य रूप से पानी, सरकारी योजनाओं और बुनियादी पहुंच से जुड़ी होती हैं.
आर्थिक प्रोफाइल के अनुसार यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से वर्षा-आधारित और तालाब-आधारित खेती पर निर्भर है, जिसमें धान, मोटे अनाज (मिलेट्स) और दालों की खेती की जाती है. डेयरी और पशुपालन भी आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. कई लोग मनरेगा (MGNREGA) के तहत रोजगार प्राप्त करते हैं. छोटे व्यापार और साप्ताहिक बाजार भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं. साथ ही कई परिवार मौसमी रूप से दूसरे इलाकों में मजदूरी करने जाते हैं. कुल मिलाकर यहां की घरेलू आय वर्षा और सरकारी योजनाओं पर काफी हद तक निर्भर रहती है.
मुख्य मुद्दों में पेयजल की कमी और बोरवेल का सूख जाना, तालाबों की सफाई और सिंचाई व्यवस्था का पुनर्जीवन, खराब ग्रामीण सड़कें और बस संपर्क, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी और कल्याण योजनाओं के वितरण में देरी शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड अलग-अलग वर्गों में अलग दिखता है. किसान पानी की सुरक्षा और फसल सहायता चाहते हैं. महिलाएं पानी, राशन आपूर्ति और पेंशन को प्राथमिकता देती हैं. अनुसूचित जाति समुदाय सम्मान और योजनाओं तक निष्पक्ष पहुंच की अपेक्षा रखते हैं. युवा कौशल विकास और स्थानीय रोजगार के अवसर चाहते हैं, जबकि बुजुर्ग पेंशन और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को अहम मानते हैं.
कुल मिलाकर, कलासपक्कम के मतदाता ऐसे नेतृत्व को पसंद करते हैं जो दिखाई दे, आसानी से उपलब्ध हो और भरोसेमंद हो. यहां वही नेता सफल होता है जो जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान करता है.
Panneerselvam.v
ADMK
Balaji.e
NTK
Nehru.m
DMDK
Nota
NOTA
Tirunavukarasu.m
IND
Panneerselvam.s
IND
Rajkumar.e
BSP
Rajamani.k
IND
Amutha.g
IND
Jagannathan.r
IND
Saravanan.k
IND
Rajendran.m.s
IJK
Panneerselvam.v
IND
Kalyanasundaram.a
VTVTK
Sampath.r.v
ADK
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स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
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