TVK
AIADMK
DMK
NTK
नोटा
NOTA
AIPTMMK
IND
TVVK
IND
IND
IND
IND
Kilvaithinankuppam Vidhan Sabha Election Results Live: किल्वैथिनंकुप्पम विधानसभा का रिजल्ट घोषित, TVK ने AIADMK को हराया
Kilvaithinankuppam Vidhan Sabha Result Live: तमिलनाडु इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Tamil Nadu Election Results 2026 Live: तमिलनाडु चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Kilvaithinankuppam Vidhan Sabha Chunav Result Live: तमिलनाडु के NORTH TAMIL NADU क्षेत्र में पार्टियों/गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
किल्वैथिनंकुप्पम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 45), वेल्लोर जिला मुख्य रूप से एक ग्रामीण इलाका है. यहां की अर्थव्यवस्था खेती पर निर्भर है, दलित आबादी की संख्या काफी है और गांवों की आजीविका सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी हुई है. यह क्षेत्र पालार नदी के बेसिन और तालाबों (टैंकों) से सिंचित इलाकों में फैला है. इसलिए यहां की राजनीति पानी की उपलब्धता, सरकारी योजनाओं का सही लाभ, जमीन से जुड़े कामकाज और विधायक की लोगों तक सीधी पहुंच जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है.
यह सीट दिखने में शांत लगती है, लेकिन चुनावी तौर पर काफी संवेदनशील मानी जाती है. यहां नतीजे इस बात पर तय होते हैं कि बूथ स्तर पर कितना संगठित मतदान हुआ और सरकार या विधायक का प्रदर्शन कैसा रहा. रणनीतिक रूप से यह क्षेत्र वेल्लोर-गुडियाट्टम मार्ग पर स्थित है. यहां मोरधाना बांध जैसे स्थानीय महत्व के स्थल हैं, जो सिंचाई और पानी के भंडारण में अहम भूमिका निभाते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक चरित्र की बात करें तो यहां के मतदाता मुख्य रूप से अनुसूचित जाति समुदायों, छोटे और सीमांत किसानों, खेतिहर मजदूरों, ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं, तथा सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों से मिलकर बने हैं. यहां दलित नेतृत्व और पंचायत स्तर के प्रभावशाली लोग चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. मतदान ज्यादातर विचारधारा से नहीं, बल्कि कामकाज और प्रदर्शन के आधार पर होता है.
भूगोल और कनेक्टिविटी के लिहाज से यह क्षेत्र पालार नदी पर निर्भर गांवों, तालाबों से सिंचित कृषि पट्टियों और अंदरूनी पंचायतों को शामिल करता है. मुख्य सड़कों की कुछ बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन अंदरूनी इलाकों की सड़कें, बस सेवाएं और पुलों की स्थिति अभी भी पर्याप्त नहीं है.
इस विधानसभा क्षेत्र के संवेदनशील और प्रमुख इलाके पालार सिंचाई पर निर्भर गांव, टैंक कमांड एरिया (तालाबों से पानी पाने वाले क्षेत्र) और अंदरूनी दलित बस्तियां हैं, जहां विकास और सुविधाओं की मांग अधिक रहती है.
मतदाताओं का मूड साफ तौर पर जरूरतों पर आधारित है. किसान सुनिश्चित और नियमित सिंचाई चाहते हैं. दलित परिवार सम्मान, सरकारी कल्याण योजनाओं का पूरा लाभ और जमीन से जुड़ी सुरक्षा की मांग करते हैं. महिलाएं पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और पेंशन को प्राथमिकता देती हैं. युवा स्थानीय स्तर पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर चाहते हैं, जबकि बुज़ुर्ग मतदाता अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं और भरोसेमंद सरकारी लाभों को अहम मानते हैं.
किल्वैथिनंकुप्पम के मतदाता हमेशा उसी नेतृत्व को समर्थन देते हैं जो जमीन पर दिखाई देने वाला काम करे, लोगों की शिकायतों को निष्पक्षता से सुने और गांव स्तर पर ठोस व वास्तविक सुधार लाए.
K Seetharaman
DMK
Divya Rani J
NTK
Nota
NOTA
P Dhanaseelan
DMDK
Elavarasan K
RPPRINAT
K Venkatasamy
IJK
Pushpalatha D
BSP
S Selva Chenguttuvan
IND
E.p.elanchezhiyan
IND
Sathu K
NDPOSI
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.