जिंजी (Gingee) विधानसभा क्षेत्र, सीट संख्या 70, विलुप्पुरम जिले का एक अर्ध-शहरी–ग्रामीण क्षेत्र है. यह ऐतिहासिक जिंजी किला (Gingee Fort) के आसपास केंद्रित है और व्यापार, पर्यटन तथा कृषि परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यहां की राजनीति पर विरासत पर्यटन, सूखा-प्रभावित कृषि, पानी की कमी और सरकारी कल्याण योजनाओं की पहुंच का गहरा प्रभाव पड़ता है. इसी कारण यह सीट राजनीतिक रूप से प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. यहां चुनाव किसी विचारधारा से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत, कल्याण योजनाओं की सही पहुंच और स्थानीय प्रशासन की विश्वसनीयता के आधार पर तय होते हैं.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से इस क्षेत्र की पहचान सूखा भूमि पर खेती करने वाले किसानों और छोटे कृषकों से जुड़ी है. यहां अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अति पिछड़ा वर्ग (MBC) की कृषि समुदायों की मजबूत उपस्थिति है. कई पंचायतों में अनुसूचित जाति (SC) की बस्तियां भी फैली हुई हैं. पर्यटन से जुड़े व्यापारी और श्रमिक, महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) और सरकारी योजनाओं से लाभान्वित महिलाएं, साथ ही प्रवासी और मौसमी मजदूर भी यहां के सामाजिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. स्थानीय जनमत को प्रभावित करने वाले प्रमुख लोग पंचायत नेता, किसान समूह, व्यापारी और पर्यटन संघ, स्वयं सहायता समूहों के समन्वयक तथा मंदिर या सांस्कृतिक समितियां होती हैं. यहां का मतदान व्यवहार कल्याण योजनाओं के प्रति संवेदनशील और स्थानीय नेटवर्क पर आधारित होता है.
भौगोलिक दृष्टि से जिंजी विधानसभा क्षेत्र विलुप्पुरम जिले के उत्तरी भाग में स्थित है. यहां पथरीली पहाड़ियां, सूखे मैदान और जंगल की सीमा से लगे गांवों का मिश्रण देखने को मिलता है. मुख्य सड़कों की स्थिति ठीक-ठाक है, लेकिन अंदरूनी गांवों तक संपर्क व्यवस्था कमजोर है. क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों में पानी की कमी, दूर-दराज के गांवों तक सार्वजनिक परिवहन की सीमित सुविधा और पर्यटन ढांचे का अधूरा विकास शामिल हैं.
इस क्षेत्र के राजनीतिक हॉटस्पॉट्स में जिंजी नगर और किले के आसपास के वार्ड, कृषि प्रधान गांवों के समूह, पहाड़ी और जंगल से लगे बस्तियां, अनुसूचित जाति बहुल हमलेट (छोटी बस्तियां) और साप्ताहिक बाजार वाले गांव शामिल हैं. हर इलाके की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, कहीं पानी और सिंचाई मुख्य मुद्दा है, तो कहीं कल्याण योजनाओं की पहुंच और बुनियादी सुविधाओं की कमी.
मुख्य समस्याओं में पीने के पानी की कमी, सिंचाई व्यवस्था का अभाव और बोरवेल फेल होना, ग्रामीण सड़कों और बस संपर्क की खराब स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच, पर्यटन ढांचे की अनदेखी और कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में कमियां शामिल हैं.
मतदाताओं का रुझान भी इन मुद्दों के अनुसार अलग-अलग दिखाई देता है. किसान जल सुरक्षा और कृषि इनपुट सहायता चाहते हैं. पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग बेहतर सुविधाएं और अधिक पर्यटकों की आवाजाही की मांग करते हैं. महिलाएं नियमित जल आपूर्ति, राशन और पेंशन जैसी योजनाओं पर ध्यान देती हैं. अनुसूचित जाति समुदाय सम्मान और योजनाओं में निष्पक्ष भागीदारी चाहते हैं. युवा स्थानीय स्तर पर कौशल विकास और रोजगार के अवसरों की अपेक्षा रखते हैं. कुल मिलाकर यहां के मतदाता बड़े-बड़े भाषणों से ज्यादा जमीनी स्तर पर दिखने वाले काम और ठोस परिणामों को महत्व देते हैं.
Rajendiran P
PMK
Sugumar Ap
NTK
Gowtham Sagar A
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Sripathi P
MNM
Gopi S
IND
Jagajanandam R
BSP
Varthamanan B
IND
Elumalai N A
ADK
Mariyappan S
IND
Kirubakaran T
IND
Saheera
IND
Senjiraja Knk
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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