भुवनगिरी विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 157) तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के मध्य भाग में स्थित है. इसमें भुवनगिरी कस्बा और उसके आसपास के कई ग्रामीण गांव तथा कृषि आधारित बस्तियां शामिल हैं. यह क्षेत्र उपजाऊ कावेरी डेल्टा क्षेत्र के पास स्थित है, जिससे यहां खेती-किसानी अच्छी होती है. यहां कृषि को नहरों और मौसमी बारिश से पानी मिलता है, जिससे खेती मजबूत रहती है.
इस क्षेत्र के मतदाता अधिकतर किसान, कृषि मजदूर, छोटे व्यापारी और ग्रामीण पंचायतों में रहने वाले लोग हैं. भुवनगिरी का ऐतिहासिक महत्व भी है क्योंकि यह प्रसिद्ध वैष्णव दार्शनिक रामानुजाचार्य की जन्मभूमि माना जाता है, जिससे इस शहर को सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान भी मिलती है.
राजनीतिक और सामाजिक संरचना की बात करें तो यहां का मतदाता मुख्य रूप से ग्रामीण है और किसानों व कृषि मजदूरों का प्रभाव ज्यादा है. सामाजिक रूप से यहां वन्नियार, अनुसूचित जाति (SC), मुदलियार और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है. यहां चुनावों में किसान संगठन, जाति-आधारित सामाजिक नेटवर्क और स्थानीय नेता राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं. यहां चुनावों में अक्सर कल्याणकारी योजनाएं और कृषि विकास मुख्य मुद्दे रहते हैं.
भूगोल और कनेक्टिविटी के अनुसार यह क्षेत्र चिदंबरम और कुड्डालोर के बीच स्थित है. यह सड़क और रेलवे मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे आसपास के बड़े शहरों तक पहुंच आसान है. यहां का भूभाग मुख्य रूप से कृषि भूमि, सिंचाई नहरों और ग्रामीण बस्तियों से बना है. यहां की अर्थव्यवस्था का आधार धान की खेती, गन्ने की खेती और छोटे ग्रामीण व्यापार हैं. यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के तट के काफी पास भी स्थित है.
यहां के प्रमुख स्थानों में भुवनगिरी कस्बा केंद्र शामिल है, जो स्थानीय प्रशासन और व्यापार का मुख्य केंद्र है. इसके अलावा यहां धान और गन्ना उत्पादक कृषि गांव, मजबूत सामुदायिक मतदान पैटर्न वाले ग्रामीण पंचायत क्षेत्र और साप्ताहिक ग्रामीण बाजार शामिल हैं, जो कृषि व्यापार को बढ़ावा देते हैं. यह क्षेत्र चिदंबरम और कुड्डालोर को जोड़ने वाले परिवहन मार्गों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
मुख्य समस्याओं की बात करें तो यहां सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में कृषि के लिए सिंचाई और जल प्रबंधन, ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे का विकास, कृषि सब्सिडी और फसल बीमा जैसी योजनाएं, पीने के पानी की उपलब्धता और स्वच्छता, तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर, शामिल हैं.
मतदाताओं की सोच में किसान मुख्य रूप से सिंचाई की स्थिरता और फसल की आय को प्राथमिकता देते हैं. कृषि मजदूर रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान देते हैं. ग्रामीण परिवार आवास योजनाओं और सरकारी सहायता को महत्व देते हैं, जबकि युवा वर्ग शिक्षा और नौकरी के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करता है. यहां चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं क्योंकि जातीय समीकरण और गठबंधन राजनीति का प्रभाव मजबूत रहता है.
Saravanan. Durai.k
DMK
Rathinavel. R.
NTK
Balamurugan. K.s.k
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Ezhilvendhan. R
BSP
Ranjith. R
IND
Revathi. R.
IJK
Saravanan. J.
IND
Jeyakumar. K
IND
Pazhanivel. M
IND
Balamurugan. G.c
IND
Anandan. S (a) Kavignar Sella Aananthamaalai
IND
Sivakumari. T
IND
Ezhilvendan. P.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.