AIADMK
DMK
TVK
NTK
TVVK
नोटा
NOTA
BSP
IND
IND
IND
IND
IND
IND
IND
Tamil Nadu Election Result 2026 Live: भुवनगिरी विधानसभा सीट पर AIADMK ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Bhuvanagiri Vidhan Sabha Result Live: तमिलनाडु इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Tamil Nadu Election Results 2026 Live: तमिलनाडु चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
भुवनगिरी विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 157) तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के मध्य भाग में स्थित है. इसमें भुवनगिरी कस्बा और उसके आसपास के कई ग्रामीण गांव तथा कृषि आधारित बस्तियां शामिल हैं. यह क्षेत्र उपजाऊ कावेरी डेल्टा क्षेत्र के पास स्थित है, जिससे यहां खेती-किसानी अच्छी होती है. यहां कृषि को नहरों और मौसमी बारिश से पानी मिलता है, जिससे खेती मजबूत रहती है.
इस क्षेत्र के मतदाता अधिकतर किसान, कृषि मजदूर, छोटे व्यापारी और ग्रामीण पंचायतों में रहने वाले लोग हैं. भुवनगिरी का ऐतिहासिक महत्व भी है क्योंकि यह प्रसिद्ध वैष्णव दार्शनिक रामानुजाचार्य की जन्मभूमि माना जाता है, जिससे इस शहर को सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान भी मिलती है.
राजनीतिक और सामाजिक संरचना की बात करें तो यहां का मतदाता मुख्य रूप से ग्रामीण है और किसानों व कृषि मजदूरों का प्रभाव ज्यादा है. सामाजिक रूप से यहां वन्नियार, अनुसूचित जाति (SC), मुदलियार और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है. यहां चुनावों में किसान संगठन, जाति-आधारित सामाजिक नेटवर्क और स्थानीय नेता राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं. यहां चुनावों में अक्सर कल्याणकारी योजनाएं और कृषि विकास मुख्य मुद्दे रहते हैं.
भूगोल और कनेक्टिविटी के अनुसार यह क्षेत्र चिदंबरम और कुड्डालोर के बीच स्थित है. यह सड़क और रेलवे मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे आसपास के बड़े शहरों तक पहुंच आसान है. यहां का भूभाग मुख्य रूप से कृषि भूमि, सिंचाई नहरों और ग्रामीण बस्तियों से बना है. यहां की अर्थव्यवस्था का आधार धान की खेती, गन्ने की खेती और छोटे ग्रामीण व्यापार हैं. यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के तट के काफी पास भी स्थित है.
यहां के प्रमुख स्थानों में भुवनगिरी कस्बा केंद्र शामिल है, जो स्थानीय प्रशासन और व्यापार का मुख्य केंद्र है. इसके अलावा यहां धान और गन्ना उत्पादक कृषि गांव, मजबूत सामुदायिक मतदान पैटर्न वाले ग्रामीण पंचायत क्षेत्र और साप्ताहिक ग्रामीण बाजार शामिल हैं, जो कृषि व्यापार को बढ़ावा देते हैं. यह क्षेत्र चिदंबरम और कुड्डालोर को जोड़ने वाले परिवहन मार्गों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
मुख्य समस्याओं की बात करें तो यहां सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में कृषि के लिए सिंचाई और जल प्रबंधन, ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे का विकास, कृषि सब्सिडी और फसल बीमा जैसी योजनाएं, पीने के पानी की उपलब्धता और स्वच्छता, तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर, शामिल हैं.
मतदाताओं की सोच में किसान मुख्य रूप से सिंचाई की स्थिरता और फसल की आय को प्राथमिकता देते हैं. कृषि मजदूर रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान देते हैं. ग्रामीण परिवार आवास योजनाओं और सरकारी सहायता को महत्व देते हैं, जबकि युवा वर्ग शिक्षा और नौकरी के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करता है. यहां चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं क्योंकि जातीय समीकरण और गठबंधन राजनीति का प्रभाव मजबूत रहता है.
Saravanan. Durai.k
DMK
Rathinavel. R.
NTK
Balamurugan. K.s.k
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Ezhilvendhan. R
BSP
Ranjith. R
IND
Revathi. R.
IJK
Saravanan. J.
IND
Jeyakumar. K
IND
Pazhanivel. M
IND
Balamurugan. G.c
IND
Anandan. S (a) Kavignar Sella Aananthamaalai
IND
Sivakumari. T
IND
Ezhilvendan. P.
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.