TVK
DMK
BJP
NTK
नोटा
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IND
BSP
IND
IND
TVVK
IND
ACDP
IND
IND
IND
IND
Ranipet Vidhan Sabha Election Results Live: रानीपेट विधानसभा का रिजल्ट घोषित, TVK ने DMK को हराया
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Ranipet Vidhan Sabha Result 2026 Live: रानीपेट सीट पर विशाल जीत की ओर TVK! जानिए कितना पीछे DMK?
Tamil Nadu Election Results 2026 Live: तमिलनाडु चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
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Ranipet Election Results 2026 Live: रानीपेट सीट पर यह क्या हो गया! DMK बड़े अंतर से पीछे
रानीपेट तमिलनाडु के रानीपेट जिले की एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण औद्योगिक-शहरी विधानसभा सीट है. यह विधानसभा क्षेत्र संख्या 41 है. रानीपेट मुख्य रूप से एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में जाना जाता है, खासकर चमड़ा टैनिंग, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के लिए, जहां से गारमेंट्स और जूते निर्यात किए जाते हैं. इसके अलावा यह क्षेत्र रासायनिक (केमिकल) और इंजीनियरिंग उद्योगों का भी एक प्रमुख केंद्र है.
रानीपेट की पहचान एक मजबूत कामगार वर्ग (वर्किंग क्लास) वाले क्षेत्र के रूप में है. यहां की स्थानीय राजनीति मुख्य रूप से रोजगार की सुरक्षा, श्रमिक कल्याण, प्रदूषण नियंत्रण और शहरी बुनियादी ढांचे के इर्द-गिर्द घूमती है. चुनावी व्यवहार में औद्योगिक मजदूरों की संगठित भागीदारी और शहरी मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं का मिश्रण देखने को मिलता है. इसी कारण रानीपेट एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है जहां कामकाज का प्रदर्शन और मजबूत संगठन क्षमता बहुत मायने रखती है.
रानीपेट के मतदाताओं में विभिन्न वर्ग शामिल हैं. इनमें चमड़ा, केमिकल, इंजीनियरिंग और SIDCO औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले औद्योगिक मजदूर प्रमुख हैं. इसके साथ ही ट्रेड यूनियनों से जुड़े श्रमिक समूह, दलित और ओबीसी समुदायों के कामगार मोहल्ले, छोटे व्यापारी, ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग, सेवा क्षेत्र के कर्मचारी, शहरी मध्यम वर्ग के परिवार और सरकारी कर्मचारी भी बड़ी संख्या में हैं. यहां ट्रेड यूनियन और वार्ड स्तर के नेटवर्क चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, साथ ही स्थानीय समुदायों का संगठित होना भी बेहद अहम रहता है.
रानीपेट चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक कॉरिडोर पर स्थित है, जिससे इसे बेहतरीन हाईवे कनेक्टिविटी मिलती है. यह क्षेत्र आर्कोट, वलाजाह, काटपाड़ी और वेल्लोर के काफी करीब है. हालांकि भारी मालवाहक ट्रकों के कारण औद्योगिक सड़कों की हालत अक्सर खराब रहती है, वहीं रिहायशी इलाकों में जल निकासी की समस्या और औद्योगिक प्रदूषण का असर देखने को मिलता है.
रानीपेट में SIDCO और औद्योगिक बेल्ट, भारी वाहनों के मुख्य मार्ग, मजदूरों की आवासीय कॉलोनियां और रानीपेट शहर के बाजार प्रमुख हॉटस्पॉट माने जाते हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों में औद्योगिक प्रदूषण और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, नौकरी की सुरक्षा और श्रमिक कल्याण, पीने के पानी का प्रदूषण, खराब ड्रेनेज और जलभराव, भारी वाहनों से सड़कों का टूटना, सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, औद्योगिक कचरा और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समस्याएं शामिल हैं.
रानीपेट के मजदूर वर्ग को नौकरी की सुरक्षा, कार्यस्थल की सुरक्षा और उचित मजदूरी की चिंता रहती है. महिला मतदाता पानी की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता को प्राथमिकता देती हैं. मध्यम वर्ग प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर नागरिक सुविधाओं की मांग करता है. युवा वर्ग तकनीकी कौशल और स्थायी रोजगार के अवसर चाहता है, जबकि व्यापारी वर्ग परिवहन सुविधा और निर्बाध बिजली आपूर्ति पर ध्यान देता है. रानीपेट के मतदाता ऐसे नेताओं को पसंद करते हैं जो औद्योगिक विकास के साथ-साथ जनस्वास्थ्य, श्रमिक अधिकारों और जवाबदेही के बीच संतुलन बना सकें.
S.m.sugumar
ADMK
V.shylaja
NTK
M.atham Basha
MNM
Nota
NOTA
A.yuvaraj
BSP
G.veeramani
AMMKMNKZ
S.jayakumar
IND
Dr.k.sathiyaraj
TNLK
A.manikandan
IND
A.mansur Basha
IND
S.yuvaraj
IND
S.gandhi
IND
N.sugumar
IND
K.sakthivel Nathan
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
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थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
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