रानीपेट तमिलनाडु के रानीपेट जिले की एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण औद्योगिक-शहरी विधानसभा सीट है. यह विधानसभा क्षेत्र संख्या 41 है. रानीपेट मुख्य रूप से एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में जाना जाता है, खासकर चमड़ा टैनिंग, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के लिए, जहां से गारमेंट्स और जूते निर्यात किए जाते हैं. इसके अलावा यह क्षेत्र रासायनिक (केमिकल) और इंजीनियरिंग उद्योगों का भी एक प्रमुख केंद्र है.
रानीपेट की पहचान एक मजबूत कामगार वर्ग (वर्किंग क्लास) वाले क्षेत्र के रूप में है. यहां की स्थानीय राजनीति मुख्य रूप से रोजगार की सुरक्षा, श्रमिक कल्याण, प्रदूषण नियंत्रण और शहरी बुनियादी ढांचे के इर्द-गिर्द घूमती है. चुनावी व्यवहार में औद्योगिक मजदूरों की संगठित भागीदारी और शहरी मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं का मिश्रण देखने को मिलता है. इसी कारण रानीपेट एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है जहां कामकाज का प्रदर्शन और मजबूत संगठन क्षमता बहुत मायने रखती है.
रानीपेट के मतदाताओं में विभिन्न वर्ग शामिल हैं. इनमें चमड़ा, केमिकल, इंजीनियरिंग और SIDCO औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले औद्योगिक मजदूर प्रमुख हैं. इसके साथ ही ट्रेड यूनियनों से जुड़े श्रमिक समूह, दलित और ओबीसी समुदायों के कामगार मोहल्ले, छोटे व्यापारी, ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग, सेवा क्षेत्र के कर्मचारी, शहरी मध्यम वर्ग के परिवार और सरकारी कर्मचारी भी बड़ी संख्या में हैं. यहां ट्रेड यूनियन और वार्ड स्तर के नेटवर्क चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, साथ ही स्थानीय समुदायों का संगठित होना भी बेहद अहम रहता है.
रानीपेट चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक कॉरिडोर पर स्थित है, जिससे इसे बेहतरीन हाईवे कनेक्टिविटी मिलती है. यह क्षेत्र आर्कोट, वलाजाह, काटपाड़ी और वेल्लोर के काफी करीब है. हालांकि भारी मालवाहक ट्रकों के कारण औद्योगिक सड़कों की हालत अक्सर खराब रहती है, वहीं रिहायशी इलाकों में जल निकासी की समस्या और औद्योगिक प्रदूषण का असर देखने को मिलता है.
रानीपेट में SIDCO और औद्योगिक बेल्ट, भारी वाहनों के मुख्य मार्ग, मजदूरों की आवासीय कॉलोनियां और रानीपेट शहर के बाजार प्रमुख हॉटस्पॉट माने जाते हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों में औद्योगिक प्रदूषण और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, नौकरी की सुरक्षा और श्रमिक कल्याण, पीने के पानी का प्रदूषण, खराब ड्रेनेज और जलभराव, भारी वाहनों से सड़कों का टूटना, सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, औद्योगिक कचरा और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समस्याएं शामिल हैं.
रानीपेट के मजदूर वर्ग को नौकरी की सुरक्षा, कार्यस्थल की सुरक्षा और उचित मजदूरी की चिंता रहती है. महिला मतदाता पानी की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता को प्राथमिकता देती हैं. मध्यम वर्ग प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर नागरिक सुविधाओं की मांग करता है. युवा वर्ग तकनीकी कौशल और स्थायी रोजगार के अवसर चाहता है, जबकि व्यापारी वर्ग परिवहन सुविधा और निर्बाध बिजली आपूर्ति पर ध्यान देता है. रानीपेट के मतदाता ऐसे नेताओं को पसंद करते हैं जो औद्योगिक विकास के साथ-साथ जनस्वास्थ्य, श्रमिक अधिकारों और जवाबदेही के बीच संतुलन बना सकें.
S.m.sugumar
ADMK
V.shylaja
NTK
M.atham Basha
MNM
Nota
NOTA
A.yuvaraj
BSP
G.veeramani
AMMKMNKZ
S.jayakumar
IND
Dr.k.sathiyaraj
TNLK
A.manikandan
IND
A.mansur Basha
IND
S.yuvaraj
IND
S.gandhi
IND
N.sugumar
IND
K.sakthivel Nathan
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.