मैलम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 71) एक शांत लेकिन बेहद संवेदनशील ग्रामीण सीट मानी जाती है, जिसका केंद्र मैलम मुरूगन मंदिर के आसपास है. यहां मतदान व्यवहार किसी एक विचारधारा से कम और गांव स्तर की पहुंच, जातीय संतुलन, पानी की समस्या और रोजमर्रा के कामों को हल करने की विश्वसनीयता से ज्यादा प्रभावित होता है.
सामाजिक और राजनीतिक चरित्र की बात करें तो यहां वन्नियार (MBC) समुदाय के कृषक परिवार संख्या में प्रमुख हैं. इसके साथ ही अंदरूनी गांवों में अनुसूचित जाति (SC) बस्तियां भी हैं. मंदिर से जुड़े व्यापारी और सेवा क्षेत्र के लोग, वर्षा पर निर्भर सूखा-भूमि किसान, कृषि मजदूर, महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHG) और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी सामाजिक ढांचे का अहम हिस्सा हैं. यहां प्रभावशाली लोगों में गांव के बुजुर्ग, पंचायत अध्यक्ष, मंदिर समितियां, SHG समन्वयक और सहकारी समितियां शामिल हैं, जिनकी राय का चुनाव परिणाम पर सीधा असर पड़ता है.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण है, जहां पथरीली और सूखा-प्रवण जमीन पाई जाती है. यहां पानी की भारी कमी एक गंभीर और स्थायी समस्या है. मंदिर के आसपास की सड़कों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन अंदरूनी गांवों और बस्तियों में सड़क और संपर्क व्यवस्था कमजोर है. कुल मिलाकर, पानी यहां की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा है.
चुनावी दृष्टि से कुछ प्रमुख इलाको में मैलम कस्बा और मुरुगन मंदिर क्षेत्र, वक्रकाली ओम्मन मंदिर का इलाका, कृषि प्रधान गांवों के समूह, अंदरूनी SC बस्तियां और सूखा-प्रभावित पथरीले क्षेत्र शामिल है. खास बात यह है कि हर क्षेत्र अपनी अलग छोटी-छोटी स्थानीय समस्याओं के आधार पर वोट करता है; यहां कोई एक बड़ा मुद्दा या एकल चुनावी कथा काम नहीं करती.
मुख्य समस्याओं में पीने के पानी की कमी, बोरवेल फेल होना और सिंचाई की असुरक्षा, अंदरूनी गांवों तक खराब सड़क संपर्क, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की दूरी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में दिक्कत, और मंदिर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे की उपेक्षा शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड इस बात पर निर्भर करता है कि जनप्रतिनिधि कितनी नियमित रूप से क्षेत्र में मौजूद रहते हैं, पानी के टैंकर संकट के समय कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं, कल्याणकारी योजनाओं की शिकायतों का कितना तेज समाधान करते हैं, और जाति व मंदिर नेटवर्क के साथ कितनी सम्मानजनक और संतुलित बातचीत रखते हैं. यहां मंदिर की अर्थव्यवस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी ज्यादा महत्व गांवों की रोजमर्रा की जरूरतों को दिया जाता है. कुल मिलाकर, यह एक कम चर्चित लेकिन बूथ स्तर पर अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाला और संवेदनशील विधानसभा क्षेत्र है.
Dr. Masilamani R
DMK
Umamaheswari L
NTK
Sundaresan A
DMDK
Nota
NOTA
Masilamani V
IND
Durai M
BSP
Rajasekar M
IND
Manavalan A
AMGRDMK
Sridhar D
IND
Chandra Prakash R
IND
Sathiyaraj S
IND
Sekar Nayakkar I M
IND
Kannan G
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.