आर्कोट, तमिलनाडु के रानीपेट जिले का एक ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील शहरी-अर्धशहरी विधानसभा क्षेत्र है. यह क्षेत्र अपनी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, मजबूत मुस्लिम व्यापारिक समुदाय और वेल्लोर, रानीपेट व कटपडी के बीच रणनीतिक स्थिति के लिए जाना जाता है. कभी यह कर्नाटक नवाबों की राजधानी रहा है, इसलिए आज भी इसकी एक अलग सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है. वर्तमान राजनीति में यहां अल्पसंख्यक एकजुटता, सरकारी कल्याण योजनाओं का लाभ, सिंचाई की स्थिरता और शहरी प्रशासन जैसे मुद्दे प्रमुख हैं.
आर्कोट का मतदाता वर्ग सामाजिक रूप से काफी विविध है. आर्कोट शहर और व्यापारिक इलाकों में मुस्लिम आबादी की संख्या अच्छी-खासी है, जो राजनीति में अहम भूमिका निभाती है. आसपास के गांवों में कृषि पर निर्भर ओबीसी समुदाय रहते हैं. इसके अलावा दलित कृषि मजदूर, शहरी कामगार परिवार, छोटे व्यापारी, बुनकर और सेवा क्षेत्र में काम करने वाले लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं. यहां अल्पसंख्यक वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों के मतदाता सिंचाई और कल्याण योजनाओं के प्रदर्शन पर अधिक प्रतिक्रिया देते हैं.
आर्कोट वेल्लोर-रानीपेट-चेन्नई और कटपडी-वालाजाह-आर्कोट जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर स्थित है. शहर के अंदर ट्रैफिक की स्थिति सामान्य रूप से संभालने योग्य है, लेकिन अंदरूनी गांवों की सड़कों और जल निकासी व्यवस्था पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है. आसपास के औद्योगिक क्षेत्र रोजगार के अवसर तो देते हैं, लेकिन शहर पर भारी यातायात दबाव नहीं डालते.
आर्कोट के बाजार क्षेत्र, शहर के आवासीय वार्ड, सिंचाई पर निर्भर गांवों के समूह, साप्ताहिक हाट (शंडी) और परिवहन केंद्र इस क्षेत्र के प्रमुख गतिविधि स्थल माने जाते हैं.
आर्कोट में सबसे बड़े मुद्दों में सिंचाई व्यवस्था की विश्वसनीयता और नहरों का रखरखाव शामिल है. इसके अलावा शहरी जल निकासी और सफाई व्यवस्था, पीने के पानी की आपूर्ति, ग्रामीण व अर्धशहरी सड़कों की खराब स्थिति, सीमित सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी भी गंभीर समस्याएं हैं.
किसान चाहते हैं कि उन्हें नियमित सिंचाई पानी मिले और उनकी फसलों को उचित दाम मिलें. मुस्लिम व्यापारी समुदाय स्थिर माहौल, सुरक्षा और बेहतर बुनियादी ढांचे की मांग करता है. शहरी परिवार जल निकासी, साफ-सफाई और पानी की समस्या से परेशान हैं. युवा वर्ग कौशल विकास और रोजगार से जुड़ी शिक्षा चाहता है. वहीं महिलाएं खास तौर पर पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देती हैं.
आर्कोट के मतदाता ऐसे नेतृत्व को पसंद करते हैं जो सभी समुदायों को साथ लेकर चले, क्षेत्र में नियमित रूप से मौजूद रहे और किसी भी संकट की स्थिति में स्थिरता और समझदारी से काम करे.
Elavazagan.k.l
PMK
R.kathiravan
NTK
A.r.mohamed Raffi
MNM
Nota
NOTA
N.janarthanan
AMMKMNKZ
A.c.kesavan
BSP
K.manigandan
IND
H.mohamed Ghouse
TPSTP
Vasanthakumar
IND
T.d.shanmugam
IND
Munivel.s
NDPOSI
P.eswaran
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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