गुडियाट्टम तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में स्थित एक घनी आबादी वाला शहरी-अर्धशहरी विधानसभा क्षेत्र है. यह विधानसभा क्षेत्र संख्या 46 है. ऐतिहासिक रूप से गुडियाट्टम तमिलनाडु के प्रमुख चमड़ा प्रसंस्करण और टैनरी उद्योग का एक बड़ा केंद्र रहा है. इस क्षेत्र की राजनीति पर मजदूर वर्ग की मजबूत पकड़ है. यहां दलित और मुस्लिम आबादी की संख्या भी काफी अधिक है. यहां का मतदान व्यवहार रोजगार की सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, आवास और बुनियादी नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों से गहराई से जुड़ा हुआ है.
गुडियाट्टम एक कड़ा मुकाबला वाला विधानसभा क्षेत्र माना जाता है, जहां चुनाव जीतने में समुदायों का एकजुट होना और सरकारी कल्याण योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी निर्णायक भूमिका निभाती है. यहां मतदाता उन्हीं नेताओं को समर्थन देते हैं जो रोजगार की रक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं पर भी संतुलित ध्यान देते हैं.
गुडियाट्टम सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. यह क्षेत्र अपने प्राचीन मंदिरों, हथकरघा उद्योग (जिसमें राष्ट्रीय ध्वज की बुनाई भी शामिल है) और सेफ्टी माचिस उद्योग के लिए प्रसिद्ध है. इसी कारण इसे “लिटिल शिवकाशी” भी कहा जाता है. यहां पुराने शिलालेख, लोक कलाएं और स्थानीय त्योहार इसकी अलग पहचान बनाते हैं.
इस विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं में कई वर्ग शामिल हैं. इनमें टैनरी और उससे जुड़े उद्योगों में काम करने वाले मजदूर, व्यापार और प्रोसेसिंग से जुड़े मुस्लिम समुदाय, श्रमिक कॉलोनियों में रहने वाली अनुसूचित जाति की आबादी, छोटे व्यापारी, परिवहन कर्मचारी, सेवा क्षेत्र के कर्मचारी, प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के मजदूर शामिल हैं. यहां ट्रेड यूनियन, समुदाय के नेता, मस्जिद-स्तरीय और वार्ड-स्तरीय नेटवर्क मतदाताओं को संगठित करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
गुडियाट्टम वेल्लोर-कटपाडी-चित्तूर कॉरिडोर के पास स्थित है, जिससे इसे अच्छी सड़क कनेक्टिविटी और औद्योगिक क्षेत्रों की नजदीकी का लाभ मिलता है. हालांकि, अत्यधिक जनसंख्या घनत्व के कारण आंतरिक सड़कों, जल निकासी और स्वच्छता प्रणालियों पर भारी दबाव बना रहता है.
इस विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख हॉटस्पॉट्स में टैनरी और औद्योगिक क्षेत्र, मजदूरों की आवासीय कॉलोनियां, बाजार क्षेत्र और जल निकासी की समस्या से जूझ रही रिहायशी गलियां शामिल हैं.
गुडियाट्टम की प्रमुख समस्याओं में औद्योगिक प्रदूषण और उससे होने वाले स्वास्थ्य प्रभाव, चमड़ा और संबंधित उद्योगों में रोजगार की अनिश्चितता, पीने के पानी की गुणवत्ता और उसमें होने वाला प्रदूषण, खराब जल निकासी और बाढ़ की समस्या, भीड़भाड़ वाला आवास और स्वच्छता की कमी, तथा सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता शामिल है.
यहां औद्योगिक मजदूर चाहते हैं कि उनके रोजगार सुरक्षित रहें और काम करने की परिस्थितियां सुरक्षित हों. मुस्लिम व्यापारी और परिवार व्यापार की स्थिरता और नागरिक व्यवस्था की मांग करते हैं. दलित समुदाय कल्याण योजनाओं तक पहुंच, आवास और सम्मान को प्राथमिकता देता है. महिला मतदाता पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देती हैं. वहीं युवा वर्ग कौशल प्रशिक्षण और वैकल्पिक रोजगार के अवसर चाहता है.
गुडियाट्टम के मतदाता लगातार उन्हीं नेताओं को समर्थन देते आए हैं, जो रोजगार की सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और प्रभावी नागरिक सेवा वितरण के बीच संतुलन बना पाते हैं. यही संतुलन इस विधानसभा क्षेत्र की राजनीति की सबसे बड़ी कुंजी है.
Paritha.g
ADMK
Kalaiyenthiri.r
NTK
Jayanthi Padmanaban.c
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Raja.s
BSP
Rajan.c
IJK
Jaikarthikeyan.k
IND
Lakshmipathy.n
IND
Elumalai.m
IND
Gunaseelan.p
IND
Selvavinayagam.d
APEP
Radha
IND
Priya.m
IND
Vennila.r
RPPRINAT
Manojkumar.g
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.