किल्पेन्नाथुर विधानसभा क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 64) तिरुवन्नामलाई जिले का एक प्रमुख रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है. यह तिरुवन्नामलाई शहर के लिए एक कृषि-आधारित पिछड़ा (हिंटरलैंड) इलाका माना जाता है. यहां की राजनीति मुख्य रूप से खेती पर निर्भरता, पानी की कमी, सरकारी कल्याण योजनाओं की पहुंच और गांव स्तर की सामाजिक नेतृत्व संरचना से प्रभावित होती है. यह सीट भले ही ज्यादा चर्चित न हो, लेकिन यहां हर बूथ का महत्व बहुत ज्यादा है और चुनाव बहुत बारीकी से तय होते हैं. यहां चुनाव किसी बड़ी विचारधारा पर नहीं, बल्कि पानी की उपलब्धता, सरकारी योजनाओं का सही वितरण और उम्मीदवार की जनता तक पहुंच पर निर्भर करते हैं.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यहां का मतदाता वर्ग मुख्यतः छोटे और सीमांत किसान, ओबीसी और एमबीसी कृषि समुदाय, गांवों में बसे अनुसूचित जाति (SC) के बस्तियां, कृषि मजदूर, और महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्याएं तथा कल्याण योजनाओं की लाभार्थी महिलाएं हैं. यहां के प्रभावशाली लोगों में पंचायत नेता, गांव के बुजुर्ग, किसान प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह के समन्वयक और सहकारी समितियों के अध्यक्ष शामिल हैं. मतदाताओं का व्यवहार स्थानीय मुद्दों पर आधारित, सरकारी योजनाओं से जुड़ा और व्यक्तिगत संबंधों पर केंद्रित होता है.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र तिरुवन्नामलाई जिले के मध्य भाग में स्थित है और यहां का भू-भाग अधिकतर समतल और कृषि प्रधान है. यह तिरुवन्नामलाई शहर के चारों ओर एक ग्रामीण सुरक्षा घेरा जैसा काम करता है. हालांकि, यहां की प्रमुख समस्याओं में अंदरूनी सड़कों की खराब स्थिति, बसों की सीमित आवृत्ति और मौसम के अनुसार पानी की कमी शामिल हैं.
महत्वपूर्ण स्थानों में मीनाक्षी सुंदरेश्वरर मंदिर, श्री लक्ष्मी नारायण पेरुमल मंदिर, किलपेननाथुर टाउन पंचायत, भीतरी कृषि गांव, अनुसूचित जाति बहुल बस्तियां, टैंक और बोरवेल पर निर्भर पंचायतें तथा साप्ताहिक बाजार केंद्र शामिल हैं. इन सभी क्षेत्रों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं और वे पानी की उपलब्धता, सरकारी योजनाओं की पहुंच और परिवहन सुविधा के आधार पर अलग प्रतिक्रिया देते हैं.
मुख्य मुद्दों में पीने के पानी की कमी, तालाबों का रखरखाव और भूजल स्तर में गिरावट, खराब ग्रामीण सड़कें और परिवहन व्यवस्था, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं और सरकारी कल्याण योजनाओं का समय पर वितरण शामिल हैं.
मतदाताओं की भावना की बात करें तो किसान मुख्य रूप से पानी की सुरक्षा और फसल सहायता चाहते हैं. महिलाएं नियमित जल आपूर्ति, पेंशन और राशन की उपलब्धता को प्राथमिकता देती हैं. अनुसूचित जाति समुदाय सम्मान और निष्पक्ष रूप से कल्याण योजनाओं का लाभ चाहते हैं. युवा वर्ग स्थानीय रोजगार और कौशल प्रशिक्षण की मांग करता है, जबकि बुजुर्ग स्वास्थ्य सेवाओं और पेंशन की निरंतरता को महत्व देते हैं. यहां के मतदाता ऐसे नेतृत्व को पसंद करते हैं जो आसानी से उपलब्ध हो, उनकी समस्याएं सुने और तुरंत समाधान करे.
K.selvakumar
PMK
Dr.r.rameshbabu
NTK
P.karthikeyan
AMMKMNKZ
V.suganantham
MNM
Nota
NOTA
M.murugan
IND
R.subash Chandra Bose
BSP
S.sasikumar
IND
A.r.elumalai
VTVTK
M.sampathraj
IND
Sakthivel
IND
N.thangaraj
MKLMNTRAPR
M.dhinakaran
IND
Farmer Jayaraman
AMAK
P.ganeshraja
IND
M.athiyaman
IND
C.jothi
IND
A.venkatesan
RPPRINAT
G.krishnamurthy
IND
M.mohanraja
IND
R.lourdammal
IND
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.
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तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
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