लालगुडी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 143) तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित है. यह उपजाऊ कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किनारे आता है. इस क्षेत्र में लालगुडी शहर के साथ-साथ कई आसपास के गांव शामिल हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से नदी आधारित कृषि पर निर्भर करती है. यहां की खेती को कावेरी नदी और उसकी नहरों से सिंचाई मिलती है, जिससे यह क्षेत्र धान, गन्ना और केले की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है. यहां के मतदाताओं में अधिकतर किसान, कृषि मजदूर, व्यापारी और ग्रामीण परिवार शामिल हैं, और कृषि ही यहां की अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों का मुख्य आधार है. इसी क्षेत्र में प्रसिद्ध वायलिन वादक जयरामन का जन्म हुआ था.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि प्रधान है. यहां की सामाजिक संरचना में मुथरैयार, अनुसूचित जाति (SC), वन्नियार और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय शामिल हैं. यहां किसान संगठनों और जातीय नेटवर्क का राजनीति में बड़ा प्रभाव है और चुनावी प्रचार में आमतौर पर सिंचाई, खेती और सरकारी योजनाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.
भौगोलिक स्थिति और संपर्क की बात करें तो लालगुडी तिरुचिरापल्ली के पूर्व में स्थित है और यहां सड़क और रेल दोनों से अच्छी कनेक्टिविटी है. यह क्षेत्र कावेरी की नहरों से सिंचित उपजाऊ जमीनों से घिरा हुआ है और यहां का परिदृश्य मुख्य रूप से खेतों और गांवों के समूहों से बना है. लालगुडी शहर आसपास के गांवों के लिए व्यापार और सेवाओं का केंद्र है और यह डेल्टा जिलों और नजदीकी शहरी क्षेत्रों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.
यहां के प्रमुख स्थानों में प्राचीन सप्तरिशीश्वर मंदिर शामिल है, जो चोल काल का है और अपनी लाल रंग की अनोखी मीनार और ऐतिहासिक शिलालेखों के लिए प्रसिद्ध है. इसके अलावा लालगुडी शहर का केंद्र, कावेरी की सिंचाई वाले गांव जहां धान की खेती होती है, केले और गन्ने के खेती क्षेत्र, ग्रामीण बाजार और कृषि व्यापार केंद्र, तथा तिरुचि को डेल्टा क्षेत्रों से जोड़ने वाले परिवहन मार्ग भी महत्वपूर्ण हैं.
मुख्य समस्याओं और मुद्दों की बात करें तो यहां सिंचाई और कावेरी के पानी का सही प्रबंधन, फसलों के उचित दाम और किसानों का कल्याण, ग्रामीण सड़कें और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं, पीने के पानी और स्वच्छता की व्यवस्था, और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सबसे अहम मुद्दे हैं.
मतदाताओं के रुझान को देखें तो किसान सिंचाई और पानी की उपलब्धता को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं, जबकि कृषि मजदूर रोजगार और सरकारी योजनाओं पर ध्यान देते हैं. ग्रामीण परिवार बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, वहीं युवा वर्ग शिक्षा और रोजगार के अवसरों के लिए तिरुचिरापल्ली जैसे नजदीकी शहरों की ओर देखते हैं. यहां चुनावों पर जातीय समीकरणों और मजबूत राजनीतिक दलों के नेटवर्क का भी काफी प्रभाव पड़ता है.
D.r.dharmaraj
ADMK
I.malar Tamil Prabha
NTK
M.vijayamurthy
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
U.johnson
IND
K.kamaraj
SMKNK
Anbil K.thangamani
IND
R.silambarasan
AMGRDMK
P.nambirajan
PT
K.dharmaraj
IND
A.anandhkumar
IND
P.m.sahadevan
IND
Veeran.muthukumar
SHS
K.ananthababu
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.