AIADMK
TVK
DMK
NTK
IND
SMKNK
नोटा
NOTA
BSP
IND
IND
AIPTMMK
TLMNK
IND
IND
TVVK
PTM
IND
IND
IND
IND
IND
IND
IND
IND
IND
Lalgudi Vidhan Sabha Results Live: तमिलनाडु के लालगुडी विधानसभा क्षेत्र में AIADMK का दबदबा, TVK को हराया
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Lalgudi Vidhan Sabha Result Live: तमिलनाडु इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Tamil Nadu Election Results 2026 Live: तमिलनाडु चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
लालगुडी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 143) तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित है. यह उपजाऊ कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किनारे आता है. इस क्षेत्र में लालगुडी शहर के साथ-साथ कई आसपास के गांव शामिल हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से नदी आधारित कृषि पर निर्भर करती है. यहां की खेती को कावेरी नदी और उसकी नहरों से सिंचाई मिलती है, जिससे यह क्षेत्र धान, गन्ना और केले की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है. यहां के मतदाताओं में अधिकतर किसान, कृषि मजदूर, व्यापारी और ग्रामीण परिवार शामिल हैं, और कृषि ही यहां की अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों का मुख्य आधार है. इसी क्षेत्र में प्रसिद्ध वायलिन वादक जयरामन का जन्म हुआ था.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि प्रधान है. यहां की सामाजिक संरचना में मुथरैयार, अनुसूचित जाति (SC), वन्नियार और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय शामिल हैं. यहां किसान संगठनों और जातीय नेटवर्क का राजनीति में बड़ा प्रभाव है और चुनावी प्रचार में आमतौर पर सिंचाई, खेती और सरकारी योजनाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.
भौगोलिक स्थिति और संपर्क की बात करें तो लालगुडी तिरुचिरापल्ली के पूर्व में स्थित है और यहां सड़क और रेल दोनों से अच्छी कनेक्टिविटी है. यह क्षेत्र कावेरी की नहरों से सिंचित उपजाऊ जमीनों से घिरा हुआ है और यहां का परिदृश्य मुख्य रूप से खेतों और गांवों के समूहों से बना है. लालगुडी शहर आसपास के गांवों के लिए व्यापार और सेवाओं का केंद्र है और यह डेल्टा जिलों और नजदीकी शहरी क्षेत्रों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.
यहां के प्रमुख स्थानों में प्राचीन सप्तरिशीश्वर मंदिर शामिल है, जो चोल काल का है और अपनी लाल रंग की अनोखी मीनार और ऐतिहासिक शिलालेखों के लिए प्रसिद्ध है. इसके अलावा लालगुडी शहर का केंद्र, कावेरी की सिंचाई वाले गांव जहां धान की खेती होती है, केले और गन्ने के खेती क्षेत्र, ग्रामीण बाजार और कृषि व्यापार केंद्र, तथा तिरुचि को डेल्टा क्षेत्रों से जोड़ने वाले परिवहन मार्ग भी महत्वपूर्ण हैं.
मुख्य समस्याओं और मुद्दों की बात करें तो यहां सिंचाई और कावेरी के पानी का सही प्रबंधन, फसलों के उचित दाम और किसानों का कल्याण, ग्रामीण सड़कें और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं, पीने के पानी और स्वच्छता की व्यवस्था, और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सबसे अहम मुद्दे हैं.
मतदाताओं के रुझान को देखें तो किसान सिंचाई और पानी की उपलब्धता को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं, जबकि कृषि मजदूर रोजगार और सरकारी योजनाओं पर ध्यान देते हैं. ग्रामीण परिवार बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, वहीं युवा वर्ग शिक्षा और रोजगार के अवसरों के लिए तिरुचिरापल्ली जैसे नजदीकी शहरों की ओर देखते हैं. यहां चुनावों पर जातीय समीकरणों और मजबूत राजनीतिक दलों के नेटवर्क का भी काफी प्रभाव पड़ता है.
D.r.dharmaraj
ADMK
I.malar Tamil Prabha
NTK
M.vijayamurthy
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
U.johnson
IND
K.kamaraj
SMKNK
Anbil K.thangamani
IND
R.silambarasan
AMGRDMK
P.nambirajan
PT
K.dharmaraj
IND
A.anandhkumar
IND
P.m.sahadevan
IND
Veeran.muthukumar
SHS
K.ananthababu
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.