तिरुविदैमरुदुर (SC), निर्वाचन क्षेत्र संख्या 170 तमिलनाडु के तंजावुर जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित है. यह कावेरी डेल्टा क्षेत्र का एक बहुत ही उपजाऊ इलाका है. इस क्षेत्र में ऐतिहासिक मंदिर नगर तिरुविदैमरुदुर के साथ-साथ आसपास के कृषि गांव और ग्रामीण बस्तियां शामिल हैं. यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है, खासकर धान की खेती, जो कावेरी नदी और उसकी शाखाओं से मिलने वाले सिंचाई पानी पर निर्भर रहती है. यह क्षेत्र अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित सीट है और यहां SC समुदाय की जनसंख्या के साथ-साथ अन्य कृषि आधारित समुदाय भी बड़ी संख्या में रहते हैं. इसके साथ ही यहां दलित समुदाय, वन्नियार, मुक्कुलाथोर और अन्य ओबीसी समूहों की भी महत्वपूर्ण उपस्थिति है.
तिरुविदैमरुदुर अपने प्रसिद्ध महालिंगेश्वरर मंदिर के लिए भी जाना जाता है, जो एक महत्वपूर्ण शैव तीर्थ स्थल है. यहां देशभर से भक्त आते हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह एक आरक्षित सीट है, जहां अनुसूचित जाति का मजबूत वोट बैंक है, साथ ही ग्रामीण अन्य समुदाय भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं. यहां राजनीतिक गतिविधियों में दलित संगठन, किसान संघ और गांव के स्थानीय नेता बड़ी भूमिका निभाते हैं. चुनावी मुद्दों में मुख्य रूप से कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक न्याय, और कृषि विकास शामिल रहते हैं.
भूगोल और कनेक्टिविटी की बात करें तो यह क्षेत्र कावेरी डेल्टा के उपजाऊ कृषि क्षेत्र में स्थित है. यहां सड़क मार्ग से कुंभकोणम, मयिलादुथुरै और तंजावुर जैसे शहरों से अच्छी कनेक्टिविटी है. इस क्षेत्र का पूरा भू-दृश्य धान के खेतों, सिंचाई नहरों और ग्रामीण गांवों से भरा हुआ है. कावेरी नदी पर आधारित सिंचाई व्यवस्था यहां बहु-फसल खेती को संभव बनाती है. इसके अलावा मंदिर पर्यटन भी स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देता है.
यहां के प्रमुख स्थानों में तिरुविदैमरुदुर कस्बा केंद्र (जहां मंदिर और प्रशासनिक गतिविधियां होती हैं), महालिंगेश्वरर मंदिर परिसर, धान और गन्ने की खेती वाले गांव, SC समुदाय की बहुलता वाले ग्रामीण पंचायत क्षेत्र, और साप्ताहिक बाजार शामिल हैं, जहां कृषि व्यापार होता है.
इस क्षेत्र के मुख्य मुद्दों में कावेरी डेल्टा के लिए भरोसेमंद सिंचाई और जल प्रबंधन, अनुसूचित जाति समुदाय के लिए सामाजिक न्याय और कल्याण योजनाएं, ग्रामीण सड़क और परिवहन सुविधा, पीने के पानी और स्वच्छता व्यवस्था, तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों का विकास शामिल हैं.
मतदाता मूड की बात करें तो अनुसूचित जाति के मतदाता मुख्य रूप से सामाजिक न्याय और कल्याण योजनाओं पर ध्यान देते हैं. किसान सिंचाई सुविधा और खेती की आय की स्थिरता चाहते हैं. ग्रामीण परिवार आवास योजनाओं और सरकारी सहायता को प्राथमिकता देते हैं, जबकि व्यापारी और मंदिर से जुड़े व्यवसायी तीर्थ पर्यटन के विकास का समर्थन करते हैं. यहां चुनाव आम तौर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और मजबूत गठबंधन राजनीति के कारण काफी दिलचस्प रहते हैं.
Union Veeramani, S.
ADMK
Divya Bharathi, M.
NTK
Puratchi Mani, M.
BSP
Kudanthai Arasan, J.
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Kannaiyan, T.
CPI(ML)(L)
Marimuthu, G.
IND
Madhankumar, R.
IJK
Mariyappan, N.
IND
Mathi, M.
IND
Suresh, R.
AMPK
Kannaiyan, N.
IND
Nedumaran, S.
IND
Dhanasekar, V.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.