अरियालुर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 149) तमिलनाडु के अरियालुर जिले के मुख्य शहर अरियालुर के आसपास स्थित है, जो इस जिले का मुख्यालय भी है. यह क्षेत्र अपनी खास पहचान के लिए जाना जाता है क्योंकि यहां कृषि और बड़े स्तर के खनिज आधारित उद्योग दोनों साथ-साथ चलते हैं, खासकर चूना पत्थर (लाइमस्टोन) की खनन और सीमेंट उत्पादन. अरियालुर को अक्सर तमिलनाडु का “सीमेंट हब” कहा जाता है, क्योंकि यहां चूना पत्थर के भरपूर भंडार होने के कारण कई बड़े सीमेंट प्लांट काम कर रहे हैं. यहां के मतदाताओं में किसान, औद्योगिक मजदूर, खनन श्रमिक, छोटे व्यापारी और ग्रामीण परिवार शामिल हैं. हालांकि खेती यहां की एक महत्वपूर्ण आजीविका है, लेकिन यह काफी हद तक बारिश और सीमित सिंचाई पर निर्भर करती है, फिर भी यह बड़ी आबादी को सहारा देती है.
इस क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक प्रकृति मिश्रित है, जहां ग्रामीण और औद्योगिक दोनों तरह के मतदाता हैं. समाज में वन्नियार, अनुसूचित जाति (SC), मुथारैयार और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों की अच्छी खासी उपस्थिति है. यहां मजदूर यूनियन, किसान संगठन और स्थानीय जातीय नेटवर्क राजनीति को प्रभावित करते हैं और लोगों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाते हैं. चुनावी प्रचार में आमतौर पर रोजगार (खासकर उद्योगों में), ग्रामीण विकास और सरकारी कल्याण योजनाओं जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.
भौगोलिक रूप से, यह क्षेत्र तमिलनाडु के मध्य भाग में स्थित है और यहां का इलाका सूखा से अर्ध-शुष्क है. यह सड़क और रेल मार्ग से तिरुचिरापल्ली, पेरंबलूर और कड्डालोर जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है. यहां चूना पत्थर के समृद्ध भंडार होने के कारण कई सीमेंट उद्योग विकसित हुए हैं. सिंचाई के साधन सीमित और बिखरे हुए हैं, इसलिए खेती मुख्य रूप से मानसून की बारिश पर निर्भर रहती है. इस विधानसभा क्षेत्र में ज्यादातर गांव हैं, जबकि अरियालुर शहर प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करता है.
यहां कुछ महत्वपूर्ण जनसंख्या और राजनीतिक केंद्र हैं, जैसे अरियालुर शहर (जिला मुख्यालय और प्रशासनिक केंद्र), सीमेंट फैक्ट्री और खनन वाले क्षेत्र जहां औद्योगिक मजदूर काम करते हैं, बारिश पर निर्भर कृषि गांव, स्थानीय बाजार और व्यापार केंद्र, और वे परिवहन मार्ग जो इस क्षेत्र को त्रिची और आसपास के जिलों से जोड़ते हैं.
इस क्षेत्र के मुख्य मुद्दों में सीमेंट और खनन उद्योगों में रोजगार के अवसर, खनन और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े पर्यावरणीय चिंताएं, सिंचाई और पीने के पानी की कमी, ग्रामीण इलाकों में सड़क और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं, और युवाओं के लिए शिक्षा व कौशल विकास शामिल हैं.
मतदाताओं का रुझान अलग-अलग समूहों के हिसाब से बदलता है. औद्योगिक मजदूर नौकरी की सुरक्षा और श्रमिक कल्याण को प्राथमिकता देते हैं, किसान सिंचाई और फसल की स्थिर आय चाहते हैं, ग्रामीण परिवार सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देते हैं, जबकि युवा रोजगार के अवसर (स्थानीय उद्योगों और नजदीकी शहरों में) तलाशते हैं. इस वजह से यहां के चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहां औद्योगिक और कृषि से जुड़े मुद्दे दोनों ही मतदाताओं के फैसलों को प्रभावित करते हैं.
Rajendran S
ADMK
Suguna Kumar
NTK
Durai.manivel
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Thanga. Shanmuga Sundaram
NGPP
Jawahar P
IJK
Ramesh K
IND
Ravichandran S
IND
Manikannan M
IND
Savarianandham V
BSP
Sivathasan V
IND
Deva P
IND
Kumar J
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.