थुरैयुर विधानसभा क्षेत्र, जिसका नंबर 146 है, तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के उत्तरी भाग में स्थित है और इसका केंद्र थुरैयुर शहर है. यह इलाका कोल्ली हिल्स की पहाड़ियों के पास, उनकी तलहटी में बसा हुआ है. आसपास के कावेरी डेल्टा वाले क्षेत्रों से अलग, थुरैयूर की खासियत यह है कि यहां मिश्रित खेती (बारिश पर निर्भर और सिंचाई वाली खेती दोनों) होती है. साथ ही यहां आदिवासी और पहाड़ी समुदायों की अच्छी-खासी आबादी है, जो इस क्षेत्र की राजनीति को अलग पहचान देती हैय
इस क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को समझें तो यहां कई महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक समूह रहते हैं, जैसे ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के किसान समुदाय, कोल्ली हिल्स और आसपास के पहाड़ी इलाकों के अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय, अनुसूचित जाति (SC) के ग्रामीण बस्तियां, छोटे और सीमांत किसान, खेती पर निर्भर मजदूर परिवार, और छोटे शहर के व्यापारी व ट्रांसपोर्ट से जुड़े कामगार. खास बात यह है कि कोल्ली हिल्स के आदिवासी और पहाड़ी गांवों की आबादी चुनावों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र तिरुचिरापल्ली जिले के उत्तरी हिस्से में आता है और कोल्ली हिल्स की तलहटी के पास स्थित है. यहां मैदानी खेती वाले गांव और पहाड़ी गांव दोनों मिलते हैं. यह क्षेत्र मुसिरी, नामक्कल और अंदरूनी पहाड़ी इलाकों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण संपर्क क्षेत्र भी है. इसी वजह से यहां किसानों, आदिवासी समुदायों और छोटे व्यापारियों का मिश्रण देखने को मिलता है, जो इसकी सामाजिक और राजनीतिक बनावट को खास बनाता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में थुरैयुर शहर, जो प्रशासन और व्यापार का केंद्र है, मैदानी कृषि गांव, कोल्ली हिल्स के पास के पहाड़ी गांव, और SC समुदाय की ग्रामीण बस्तियों के समूह शामिल हैं.
यहां के मुख्य मुद्दों की बात करें तो मतदाताओं पर सबसे ज्यादा असर डालने वाले मुद्दों में ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की समस्या, पहाड़ी गांवों तक सड़क संपर्क, किसानों के लिए सब्सिडी और फसल सहायता, आदिवासी कल्याण और वन अधिकार, सरकारी स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर शामिल हैं.
मतदाताओं के रुझान को देखें तो यहां लोग उन योजनाओं और नेताओं को पसंद करते हैं जो किसानों की मदद, आदिवासी कल्याण योजनाएं, सड़क और पानी की परियोजनाएं, और पहाड़ी गांवों में सीधा संपर्क बनाए रखते हैं. थुरैयुर के मतदाता ऐसे नेताओं को ज्यादा पसंद करते हैं जो ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में जाकर लोगों से सीधे मिलते हैं और उनकी समस्याओं को समझते हैं.
T.indragandhi
ADMK
R.tamilzhselvi
NTK
T.n. Yuvarajan
MNM
K.subramanian
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
S.eswaramoorthy
BSP
K.gunasekaran
PT
S.karuppiah
IND
Srinivasan J
IND
K.sundarraj
IND
K.jayakkannan
MMKA
A.seerangan
IND
M.malarmannan
SMKNK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.