पूम्पुहार विधानसभा क्षेत्र तमिलनाडु के पूर्वी हिस्से में बंगाल की खाड़ी के तट के साथ स्थित है और इसमें कई ऐतिहासिक तटीय बस्तियां और मछुआरा समुदाय शामिल हैं. इस क्षेत्र का नाम प्राचीन बंदरगाह शहर पूम्पुहार के नाम पर पड़ा है, जो कभी तमिल इतिहास में एक महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार केंद्र था. आज के समय में यहां की अर्थव्यवस्था मछली पालन (फिशरीज), कृषि और छोटे स्तर के व्यापार का मिश्रण है, और तटीय लोगों की आजीविका से जुड़े मुद्दे यहां की राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करते हैं.
पूम्पुहार को विशेष रूप से प्रारंभिक चोल साम्राज्य के प्राचीन बंदरगाह शहर के रूप में जाना जाता है, जिसे पहले कावेरीपूम्पट्टिनम कहा जाता था. यह शहर कावेरी नदी के मुहाने पर स्थित है. पूम्पुहार का संबंध प्रसिद्ध पौराणिक पात्र कन्नगी से भी जुड़ा हुआ है और यह तमिल के प्रसिद्ध महाकाव्यों सिलप्पथिकारम और मणिमेकलाई में प्रमुख रूप से वर्णित है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से इस क्षेत्र में मछुआरा समुदाय और तटीय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की मजबूत उपस्थिति है. यहां की राजनीति मुख्य रूप से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच प्रतिस्पर्धा पर आधारित रहती है. मछुआरों के संगठन और तटीय समुदायों के संघ भी स्थानीय राजनीति में काफी प्रभाव रखते हैं. वहीं अंदरूनी ग्रामीण इलाकों में मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर समुदाय रहते हैं. यहां की राजनीति अक्सर रोजगार, आजीविका सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों के आसपास घूमती है.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा हुआ है और इसमें कई मछुआरा गांव शामिल हैं. तटीय मैदानों के साथ-साथ अंदरूनी हिस्सों में कृषि भूमि और जलीय खेती (एक्वाकल्चर) के क्षेत्र भी हैं. यह इलाका सड़क मार्ग से मयिलादुथुरै और सीरकाझी जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है. तटीय क्षेत्र होने के कारण यह जगह चक्रवात (साइक्लोन) और तटीय कटाव (कोस्टल इरोजन) के खतरे से भी प्रभावित रहती है. साथ ही यह एक ऐतिहासिक समुद्री विरासत वाला क्षेत्र भी है.
यहां के प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट) में पूम्पुहार बीच, सिलप्पथिकारम आर्ट गैलरी, मरीटाइम म्यूजियम और कन्नगी मंदिर शामिल हैं. पूम्पुहार का तटीय क्षेत्र अपने इतिहास और पर्यटन के लिए जाना जाता है. इसके अलावा मछुआरा गांवों में मजबूत सामुदायिक नेटवर्क देखने को मिलता है. अंदरूनी डेल्टा क्षेत्र के गांव सिंचाई नहरों पर निर्भर कृषि करते हैं. हाईवे के किनारे छोटे-छोटे बाजार कस्बे भी हैं, जबकि कई तटीय बस्तियां आज भी कटाव और तूफानों के खतरे का सामना कर रही हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां मछुआरों का कल्याण और समुद्री आजीविका की सुरक्षा, तटीय सुरक्षा और आपदा से बचाव की तैयारी, कृषि के लिए सिंचाई और फसल उत्पादन, मछुआरा गांवों में बुनियादी ढांचे का विकास, और तटीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सबसे अहम मुद्दे हैं.
मतदाताओं के रुझान (वोटर मूड) को देखें तो तटीय क्षेत्रों के मतदाता मुख्य रूप से मछुआरों के हित और आपदा राहत योजनाओं को प्राथमिकता देते हैं, जबकि अंदरूनी गांवों के किसान पानी की उपलब्धता और फसलों के दाम को महत्वपूर्ण मानते हैं. सरकारी कल्याण योजनाएं निम्न आय वर्ग के लोगों के वोट पर बड़ा असर डालती हैं. यहां अक्सर सामुदायिक नेता भी लोगों के सामूहिक मतदान व्यवहार को प्रभावित करते हैं. कुल मिलाकर, यहां चुनावी मुकाबला अभी भी दो प्रमुख द्रविड़ पार्टियों (DMK और AIADMK) के बीच कड़ा और प्रतिस्पर्धात्मक बना रहता है.
S.pavunraj
ADMK
P. Kaliyammal
NTK
S.senthamizhan
AMMKMNKZ
M.h.meharajdeen
MNM
Nota
NOTA
T. Ilanchezhian
BSP
S.pandiyarajan
IND
S.murugan
IND
A. Kalaivanan
IND
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