नागपट्टिनम विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 163) एक ऐतिहासिक तटीय शहर नागपट्टिनम के आसपास स्थित है. इस क्षेत्र में शहर के व्यापारिक इलाके, मछुआरा समुदाय और आसपास के ग्रामीण गांव शामिल हैं. यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मछली पालन (फिशरीज), बंदरगाह गतिविधियों, कृषि और छोटे व्यापार पर आधारित है. इसी कारण यहां के चुनावी मुद्दों में रोजगार और आपदा से बचाव (डिजास्टर रेजिलिएंस) बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इस क्षेत्र में कई धार्मिक और पर्यटन स्थल भी मौजूद हैं जैसे साउंडराजा पेरुमल मंदिर, नेल्लुकादाई मरियम्मन मंदिर, नागूर दरगाह और बेसिलिका ऑफ अवर लेडी ऑफ गुड हेल्थ, जो इस इलाके की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह एक बहु-समुदाय वाला क्षेत्र है, जहां मछुआरे, व्यापारी और किसान समुदाय साथ रहते हैं. यहां तटीय समुदायों के संगठन और मछुआरा यूनियन का खासा प्रभाव है. अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों की मौजूदगी सामाजिक रिश्तों को आकार देती है. शहर के मतदाता खासकर विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं जैसे सड़क, पानी और सफाई पर ज्यादा ध्यान देते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित है और यहां एक महत्वपूर्ण फिशिंग हार्बर (मछली बंदरगाह) भी है. यह क्षेत्र रेल और सड़क मार्ग से तिरुवरुर, मयिलादुथुराई और कराईकल से जुड़ा हुआ है. तटीय क्षेत्र होने के कारण यहां चक्रवात (साइक्लोन) और समुद्री तूफानों का खतरा बना रहता है. आसपास के गांवों में मुख्य रूप से धान की खेती और जलीय खेती (एक्वाकल्चर) की जाती है. नागपट्टिनम शहर इस पूरे क्षेत्र का एक बड़ा परिवहन और व्यापार केंद्र है.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट) में वही धार्मिक स्थल शामिल हैं, साउंडराजा पेरुमल मंदिर, नेल्लुकादाई मरियम्मन मंदिर, नागूर दरगाह और वेलंकन्नी चर्च, साथ ही नागपट्टिनम शहर खुद जिला का मुख्य व्यापार और प्रशासनिक केंद्र है. इसके अलावा मछुआरा बंदरगाह क्षेत्र, जहां मजबूत सामुदायिक नेटवर्क है, शहरी आवासीय इलाके जो नगर राजनीति को प्रभावित करते हैं, अंदरूनी डेल्टा क्षेत्र के कृषि गांव, और बाजार व परिवहन केंद्र जो तटीय और ग्रामीण इलाकों को जोड़ते हैं, ये सभी महत्वपूर्ण हिस्से हैं.
मुख्य समस्याओं की बात करें तो यहां के लोगों के लिए मछुआरों की सुरक्षा, समुद्री आजीविका, और बंदरगाह की बेहतर सुविधाएं बहुत जरूरी हैं. इसके अलावा चक्रवात से बचाव और आपदा की तैयारी, शहरी बुनियादी ढांचा (जैसे ड्रेनेज और सड़कें), कृषि के लिए सिंचाई व्यवस्था, और मछली पालन व स्थानीय व्यापार में रोजगार के अवसर भी बड़े मुद्दे हैं.
मतदाताओं के रुझान (वोटर मूड) में तटीय इलाकों के लोग खासकर मछुआरों के कल्याण और आपदा राहत को प्राथमिकता देते हैं. शहरी मतदाता नगर विकास और सुविधाओं के आधार पर सरकार का मूल्यांकन करते हैं. वहीं किसान वर्ग सिंचाई और आय की स्थिरता पर ध्यान देता है. सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लागू होना भी लोगों की संतुष्टि को प्रभावित करता है. कुल मिलाकर यहां चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से द्रविड़ पार्टियों के बीच कड़ा और प्रतिस्पर्धी बना रहता है.
Thanka.kathiravan
ADMK
S.augustine Arputharaj
NTK
C.manjula
AMMKMNKZ
Syed Anas Mohideen Sahip
MNM
Nota
NOTA
Mayilarasi
NADLMMKLK
V. Manikandan
IND
V. Canagaradjou
IND
N P Bhashgaran
IND
Durai. Selvakumar
IND
T. Singaravadivelan
SHS
S. Prem
IND
J.v. Durai
MKat
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.