तिरुमायम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 181), पुदुक्कोट्टई जिला के पश्चिमी हिस्से में स्थित है. इसमें ऐतिहासिक तिरुमायम शहर के साथ-साथ आसपास के कई ग्रामीण गांव शामिल हैं. यह क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है. यहां प्रसिद्ध तिरुमायम किला और प्राचीन सत्यागिरिश्वरर मंदिर स्थित हैं.
यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर आधारित है, जो टैंक (तालाब) सिंचाई व्यवस्था और मौसमी बारिश पर निर्भर करती है. यहां के मतदाता अधिकतर किसान, कृषि मजदूर, छोटे व्यापारी और गांवों व छोटे कस्बों में रहने वाले लोग हैं.
इस क्षेत्र का सामाजिक और राजनीतिक स्वरूप मुख्यतः ग्रामीण है, जहां गांव और खेती से जुड़े लोग राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं. यहां की सामाजिक बनावट में मुक्कुलथोर (थेवेर) समुदाय, अनुसूचित जातियां, वन्नियार और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) शामिल हैं. स्थानीय समुदायों के नेटवर्क, किसान संगठनों और क्षेत्रीय नेताओं का चुनावी माहौल पर गहरा असर रहता है. चुनाव के समय मुख्य मुद्दे सरकारी योजनाएं, ग्रामीण विकास और किसानों से जुड़े विषय होते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र पुदुक्कोट्टई और कराईकुडी जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के बीच स्थित है. सड़क मार्ग से यह क्षेत्र आसपास के कस्बों और गांवों से जुड़ा हुआ है. यहां का भू-भाग खेती योग्य जमीन, सिंचाई के तालाब, पथरीली पहाड़ियां और गांवों से मिलकर बना है. यहां मुख्य रूप से धान, मूंगफली, दालें और मोटे अनाज की खेती होती है. साथ ही, ऐतिहासिक स्थल होने के कारण यहां कभी-कभी पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियां भी देखने को मिलती हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्रों में तिरुमायम का मुख्य बाजार और प्रशासनिक क्षेत्र, किले और मंदिर के आसपास के इलाके, खेती प्रधान गांव, ग्रामीण बाजार और पंचायत स्तर के क्षेत्र शामिल हैं, जहां सरकारी योजनाओं का असर मतदान पर दिखाई देता है.
यहां के मुख्य मुद्दों में सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन, गांवों की सड़कों और यातायात की सुविधा, किसानों के लिए सब्सिडी, फसल बीमा और अन्य सहायता योजनाएं, पीने के पानी की उपलब्धता और स्वच्छता, तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर शामिल हैं.
मतदाताओं का रुझान भी इन्हीं मुद्दों के आसपास घूमता है. किसान सिंचाई और स्थिर आय को प्राथमिकता देते हैं, ग्रामीण परिवार सरकारी योजनाओं और आवास सहायता को महत्व देते हैं, छोटे व्यापारी सड़क और बाजार विकास चाहते हैं, जबकि युवा रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसरों की मांग करते हैं. इस क्षेत्र में चुनाव परिणाम अक्सर जातीय समीकरणों और स्थानीय नेतृत्व के प्रभाव से तय होते हैं.
P.k.vairamuthu
ADMK
K.selvakumar
IND
U.sivaraman
NTK
S.muniaraju
AMMKMNKZ
R.thirumeni
MNM
Nota
NOTA
S. Gandipan
MIDP
M.selvakumar
IND
C. Alagu Subbiah
IND
M. Durairajan
IND
R.sivakumar
PT
S.selvakumar
IND
R. Palaniyappan
IND
S.purachibalan
ADK
Muthuadaikkan @ Adaikkalam
IND
R.sundaram
IND
S.manikandan
IND
M.karthick
IND
Al.mathialagan
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.