विरालिमलाई विधानसभा क्षेत्र (संख्या 179) एक मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है, जहां चुनावी नतीजों पर जातीय समीकरण, सूखा-प्रभावित कृषि की स्थिति और सरकारी योजनाओं की पहुंच का बड़ा असर पड़ता है. यह क्षेत्र तिरुचिरापल्ली और पुदुक्कोट्टई के बीच स्थित है, जिससे यहां एक मिश्रित मतदाता वर्ग बनता है, एक तरफ ग्रामीण किसान और दूसरी तरफ पास के शहरों में काम करने के लिए आने-जाने वाले लोग. यहां चुनावों में खास तौर पर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) का एकजुट वोट, अनुसूचित जाति (SC) के लोगों की सामाजिक और सरकारी योजनाओं से जुड़ी उम्मीदें, और किसानों की आजीविका की स्थिरता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यहां जीत का अंतर आमतौर पर मध्यम रहता है, लेकिन अगर जातीय गठबंधन या सरकारी योजनाओं की स्थिति में बदलाव आता है, तो यह अंतर तेजी से बदल भी सकता है.
यह क्षेत्र विरालिमलाई मुरुगन मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो 9वीं शताब्दी का पहाड़ी मंदिर है और भगवान मुरुगन को समर्पित है. इसके आसपास स्थित विरालीमलाई अभयारण्य (Sanctuary) भी काफी मशहूर है, जहां बड़ी संख्या में जंगली मोर पाए जाते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यहां के प्रमुख मतदाता समूहों में ओबीसी किसान समुदाय (जो सबसे ज्यादा प्रभावशाली हैं), कई गांवों में रहने वाले अनुसूचित जाति के लोग, छोटे और सीमांत किसान, कृषि मजदूर परिवार, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाली ग्रामीण महिलाएं, और तिरुचिरापल्ली में काम करने के लिए आने-जाने वाले युवा शामिल हैं.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र ज्यादातर सूखा-प्रभावित (ड्रायलैंड) खेती वाला इलाका है, जहां मूंगफली, मक्का और मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती होती है. विरालीमलाई कस्बा यहां का स्थानीय प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र है, जबकि पूरे क्षेत्र में कई छोटे-छोटे गांव फैले हुए हैं. सड़क संपर्क मध्यम स्तर का है, जो तिरुचिरापल्ली से इस क्षेत्र को जोड़ता है.
इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण इलाके (हॉटस्पॉट) में विरालीमलाई मुरुगन मंदिर और अभयारण्य, ओबीसी बहुल कृषि गांव (जो चुनावी आधार बनाते हैं), SC बस्तियां (जहां सम्मान और सरकारी योजनाओं का असर वोट पर पड़ता है), सूखा-प्रभावित किसान इलाके (जहां फसल की कीमतों का असर ज्यादा होता है), विरालीमलाई कस्बे के वार्ड (जहां व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और सेवा क्षेत्र के लोग रहते हैं), और मजदूर बस्तियां (जहां लोग मौसमी रोजगार पर निर्भर हैं) शामिल हैं.
यहां के मुख्य मुद्दों में भूजल और सिंचाई की व्यवस्था, सूखा क्षेत्र के किसानों के लिए फसल की स्थिर कीमत, ग्रामीण सड़कों का विकास, सरकारी बस सेवा की उपलब्धता, राशन (PDS) की गुणवत्ता और उपलब्धता, सरकारी स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति, और आवास व अन्य सरकारी योजनाओं तक पहुंच प्रमुख हैं.
मतदाताओं की सोच और अपेक्षाओं की बात करें तो यहां के लोग चाहते हैं कि उनके प्रतिनिधि गांवों में नियमित दौरे करें, सूखे या फसल नुकसान के समय किसानों की मदद करें, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सहायता करें, इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं का जल्दी समाधान करें, और किसानों व मजदूरों दोनों वर्गों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें.
Palaniappan
DMK
Azhagu Meena P
NTK
Karthi Prabhakaran O
AMMKMNKZ
Dhanalakshmi.m
IND
Saravanan R
MNM
Thiruventhiran V
IND
Ramesh M
IND
Nota
NOTA
Manikandan. C
IND
Alaguraja.v
BSP
Palanisamy A
IND
Arumugam P
PT
Jothivel A
IND
Balasubramanian M
IND
Rajavarman R
IND
Rameshkumar.p
IND
Manikandan K
IND
Syeed Mohamed J
IND
Elayaraja R
IND
Senthilkumar P
MIDP
Abdul Nazar K
IND
Vijay A
ADK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.